जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल:अर्थशास्त्री अरुण कुमार बोले- कोरोना के बाद देश की अर्थव्यवस्था ऐसी स्थिति में है, जैसी विश्व युद्ध के दौरान भी नहीं होती

8 महीने पहले
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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन की शुरुआत कुछ इस तरह कुमाऊं लोकगीतों के साथ हुई। - Dainik Bhaskar
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन की शुरुआत कुछ इस तरह कुमाऊं लोकगीतों के साथ हुई।
  • आज होंगे 20 सेशन, 50 स्पीकर होंगे भागीदार

साहित्य के सबसे बड़े उत्सव का शनिवार को दूसरा दिन है। जहां देश के प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार ने साहित्य उत्सव के सत्र ‘अर्थ का अनर्थ: पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था’ में आंकड़े रखते हुए अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि कोरोना के बाद देश की अर्थव्यवस्था ऐसी स्थिति में है, जैसी विश्व युद्ध के दौरान भी नहीं होती। प्रो. कुमार ने कहा कि सरकारी आंकड़ों में बहुत गलतियां होती हैं, उनके आधार पर अर्थव्यवस्था के बारे में सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

अर्थव्यवस्था से जुड़ी इस चर्चा में प्रो. अरुण कुमार के साथ ही सी.ए. रघुवीर पूनिया और प्रो. वृजेन्द्र उपाध्याय से सुरेश देमन ने बातचीत की। रघुवीर मानते हैं कि नोटबंदी और जीएसटी पहले ही अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला चुके थे, जिस पर कोरोना का कहर भी टूट पड़ा। स्टॉक मार्केट पर अपना पक्ष रखते हुए वे कहते हैं कि सेंसेक्स को अर्थव्यवस्था का मापक नहीं कहा जा सकता। वहीं, प्रो. वृजेन्द्र उपाध्याय ने विश्व बैंक के आंकड़े दर्ज करते हुए हालिया बजट पर अपनी राय रखी।

वर्चुअली गूंजा कुमाऊं और गढ़वाली लोक संगीत

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन इस कुमाऊं व गढ़वाली लोक संगीत की शुरुआत लोकगीत 'ठंडो रे ठंडो मेरा पाणे की हौवा ठंडो... मेरा पाणी ठंडा...;, से हुई। ढोलक, हारमोनियम और बांसुरी साज थे। मात्र तीन साजों के रिदम के संयोजन के बीच निकले इस लोकगीत के बोल निश्चित ही वर्चुअल जुड़े श्रोताओं को आल्हादित किया होगा। निश्चित ही लोकगीतों के इस समरस जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन की भोर को भरपूर आनंदमयी बना दिया।

हिमाली मोऊ लोक संगीत के कलाकारों के मुख से दूसरा गीत 'तम पीटो पीतल पीटो विझोले झम...' निकला। यह गीत गांवों में श्रम की महत्ता को बताता है, जिसमें कलाकार बता रहे हैं कि कैसे पीतल पीट-पीट को उसे अलग रूप में बदला जाता है। इसी तरह पिथौरागढ़ और नेपाल के बीच मौजूद काली गंगा नदी और वहां बाॅर्डर के खुलने-बंद होने और वहां की गतिविधियों को दर्शाने वाले लोक गीत भी प्रस्तुत किए गए।

दिन भर चलेंगे 20 सेशन

लोक गीतों के साथ शुरू हुए दूसरे दिन अलग-अलग बीस सेशन होंगे। इसमें 50 से अधिक स्पीकर मौजूद रहेंगे। इन सेशन में फिल्मों की बात होगी। एक सेशन गीत-संगीत तो दूसरा कुकिंग पर आधारित होगी। इस आयोजनों को श्रोता वर्चुअली सुन व देख सकेंगे। हर बार जयपुर के डिग्गी पैलेस में इसका ऑफलाइन आयोजन होता रहा है। जेएलएफ का यह 14वां संस्करण है।