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जब नेहरू के खासमखास व्यास ने गंवाया पद:आपसी कलह और बगावत के बाद पहले भी हट चुके आलाकमान के ‘खास’ मुख्यमंत्री

जयपुर10 महीने पहले
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राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और नेहरू जी के खास माने जाने वाले जयनारायण व्यास (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और नेहरू जी के खास माने जाने वाले जयनारायण व्यास (फाइल फोटो)

प्रदेश की कांग्रेस पार्टी में आपसी कलह और बगावत पहली बार नहीं है। इससे पहले भी पावर पॉलिटिक्स के लिए नेताओं ने गुटबाजी व खेमाबंदी की और केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री बदले है। बगावत का  पहला दौर 1954 में हुआ था। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के खास माने जाने वाले सीएम जयनारायण व्यास को पद गंवाना पड़ा था तथा वोटिंग के बाद मोहनलाल सुखाडिय़ा को सीएम बनाया गया।

पिछले 23 साल में कांग्रेस 3 बार सत्ता में आई तथा दिग्गज नेताओं में कलह भी हुुआ। लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी सत्ता बचा गए। अब फिर से कांग्रेस के वरिष्ठ  नेता सचिन पायलट बगावत  पर है। लेकिन आलाकमान ने पायलट  को ही प्रदेशाध्यक्ष पद से हटा दिया।

1980 के बाद 10 साल में कांग्रेस ने बदले पांच मुख्यमंत्री 

मार्च 1980 से मार्च 1990 तक के शासन काल में सबसे ज्यादा सीएम बदले। राष्ट्रपति शासन के बाद चुनावों में मार्च 1980 में कांग्रेस ने जगन्नाथ पहाड़िया को सीएम बनाया। उनकी कार्यप्रणाली व ब्यूरोक्रेसी के फीडबैक के बाद आलाकमान ने जुलाई 1981 में उन्हें हटाकर शिवचरण माथुर को सीएम बना दिया। फरवरी 1985 में भरतपुर में मानसिंह एनकाउंटर की घटना हुई।

जाट समाज के आक्रोश को शांत करने के लिए आलाकमान ने शिवचरण माथुर को हटा दिया। हीरालाल देवपुरा को कार्यवाहक सीएम बना दिया। मार्च 1985 में हरिदेव जोशी को मुख्यमंत्री बनाया। लेकिन पार्टी का विरोधी गुट लगातार जोशी के खिलाफ सक्रिय रहा।

राजीव गांधी ने जोशी को बुलाकर इस्तीफा ले लिया व असम का राज्यपाल बना कर भेज दिया। जनवरी 1988 में शिवचरण माथुर को फिर से मुख्यमंत्री बनया। लेकिन लोकसभा चुनावों में हुई हार के बाद सीएम शिवचरण माथुर का इस्तीफा हो गया। हरिदेव जोशी को फिर से दिसंबर 1989 में मुख्यमंत्री बनाया।

आलाकमान के आशीर्वाद के बाद भी मुख्यमंत्री नहीं बन पाए थे मिर्धा

सीएम बरकतुल्लाह खान की हार्ट अटैक से मौत के बाद अगस्त 1973 में हरिदेव जोशी को सीएम बनाया। जाट नेता रामनिवास मिर्धा के विरोध के बाद विधायक दल के नेता के लिए वोटिंग हुई। मिर्धा को हरिदेव जोशी से कम वोट मिले और जोशी मुख्यमंत्री बने रहे।

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