संडे बिग स्टोरी10 रुपए में अरबपति बनना चाहते हैं तो सावधान:जयपुर के युवक ने गंवाए 27 लाख; रिलायंस-लुलु माल के फर्जी ग्रुप बनाकर फंसा रहे

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: विक्रम सिंह सोलंकी

सोचिए, आपके मोबाइल में एक मैसेज आता है…10 रुपए लगाइए और अरबपति बन जाइए। इसके लिए बस एक काम करना होगा। ग्रीन या रेड कलर में से एक चुनना है। आप सोचेंगे रातोंरात अमीर बनने का इससे आसान तरीका और क्या हो सकता है?

इसी लालच का फायदा कुछ फ्रॉड ऐप उठा रहे हैं, जिन्हें लोग कलर वाले गेम ऐप समझ लेते हैं। जयपुर के विजय ने भी यही गलती की।

3 महीने पहले विजय को टेलीग्राम ऐप के एक ग्रुप से ऐसे गेम के बारे में पता चला। दावा किया गया कि भारत में पहली बार ऐसा इन्वेस्टमेंट ऐप आया है, जिसमें केवल 10 रुपए लगाकर जितना चाहे पैसा कमा सकते हैं। बस बिड लगाने और जीतने का दम होना चाहिए। विजय ने पहली बार गेम खेला तो 100 रुपए लगाकर 3000 हजार रुपए कमा लिए।

गेम का सीधा सा रूल- आपको ग्रीन और रेड में से 1 बटन चुनना है…
अरबपति बनने की चाहत में विजय ने धीरे-धीरे कर, सारी सेविंग 27 लाख रुपए इस गेम में लगा दी। कभी रेड कभी ग्रीन बटन दबाते-दबाते विजय का पूरा पैसा ऐप चलाने वाले मास्टरमाइंड के बैंक अकाउंट में खाली होता गया।

विजय की बर्बादी का किस्सा तो केवल एक उदाहरण है। असल में ऐसे हजारों युवा हैं जो चाइनीज कंपनियों के तैयार किए इस गेम का शिकार हो रहे हैं।

भास्कर रिपोर्टर ने इस पूरे रैकेट की पड़ताल की। इस खेल को समझने के लिए 15 दिनों तक टेलीग्राम पर बने इनके प्रमोटर्स ग्रुप में खुद को जोड़ा। फिर जो सच सामने आया, वो हैरान और परेशान करने वाला था।

दरअसल, ये कोई गेमिंग ऐप नहीं। ये एक तरह से ऑनलाइन 'कलर सट्टा' है जो चीन से ऑपरेट हो रहा है। वहां से डेवलप हुए 15 से 20 फर्जी ऐप के जरिए राजस्थान सहित कई राज्यों में लोगों को फंसाया जा रहा है। इस गेम के रूल्स इतने खतरनाक हैं कि जो एक बार खेलना शुरू कर दे तो वो इसमें फंसता चला जाता है।

पढ़िए भारत से बैन होने के बावजूद राजस्थान सहित दूसरे राज्यों में ये रैकेट कैसे फल-फूल रहा है....

इस खतरनाक गेम को समझने से पहले विजय की तरह बर्बाद होने वाले दो लोगों की कहानी सुनिए...

5 मिनट में 12 हजार जीता, 3 महीने में 9 लाख गंवाए
जयपुर के रहने वाले सचिन (बदला नाम) ने बताया कि 3 महीने पहले टेलीग्राम में एक रिलायंस माल ग्रुप में मेंबर बना। ग्रुप में 4 मिनट में 40 हजार रुपए कमाने का ऑफर आ रहा था। लिंक पर क्लिक कर पहले एक हजार रुपए से शुरुआत की। पहले दिन 2 हजार जीता, लेकिन 9 हजार हार गया।

ग्रुप में फिर मैसेज आया, जल्दी से खेलो और अपना सारा घाटा पूरा कर लो। मैंने बीते दिन हुए नुकसान को पूरा करने के लिए खेलना शुरू किया। 5 मिनट में 12 हजार रुपए जीत गया, लेकिन शाम होते-होते 1.5 लाख रुपए हार चुका था। सिलसिला यहीं नहीं रुका। तीन महीने में 9 लाख रुपए गवाएं। इनमें करीब 5 लाख रुपए दोस्तों से कर्ज लेकर खेला था।

घर की अलमारी से रुपए निकाल गेम में लगाए
22 साल के राहुल (बदला हुआ नाम) ने बताया कि किसी अनजान ने उसे एक साथ टेलीग्राम के 5 से 7 ग्रुप में जोड़ लिया। उसमें गेम खेलने के लिंक आते थे। एक दिन उसकी भी इच्छा हुई। लिंक पर क्लिक कर 500 रुपए जमा किए। पहले दिन की शुरुआत जीतने से हुई।

दूसरे दिन भी कई सेशन में 10 हजार तक जीता, लेकिन आखिरी सेशन में वह 15 हजार रुपए हार गया। हार का सिलसिला कई दिनों तक चला। कई दोस्तों से गेम खेलने के लिए 10-10 हजार रुपए उधार लिए। हारने के बाद ऐसी नौबत आ गई कि दोस्तों की उधारी चुकाने के लिए घर की अलमारी से 50 हजार रुपए चोरी कर गेम खेला, लेकिन वह भी हार गया।

समझिए, कैसे काम करता है ये ऐप और आप खुद को अपने बच्चों को इसका शिकार होने से कैसे रोक सकते हैं… इससे पहले पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय जरूर दीजिए।

सबसे पहले, आसान भाषा में समझते हैं ये पूरा खेल है क्या?
दरअसल, गेमिंग ऐप का ये पूरा रैकेट टेलीग्राम से ऑपरेट होता है। इसमें रिलायंस मॉल, लुलु मॉल, रिलायंस ऑफिशियल, रॉयल 777, एप्पल मॉल, एममेक्स मॉल, येसमाल मॉल, रॉयल 68, लाइफ टाइम सपोर्ट के नाम से 20 से ज्यादा ग्रुप बने हुए हैं। हर ग्रुप में 3 लाख से 15 लाख तक मेंबर जुड़े हुए है। इन्हीं ग्रुप से ये अपने ऐप का प्रचार करते है। गेम कैसे खेलना है, रिचार्ज कैसे करना है, गेम खेलने की शर्तें क्या है, इसकी पूरी डिटेल शेयर करते हैं।

ग्रुप में बताते हैं इन्वेस्टमेंट प्लान
गेम डाउनलोड करने के बाद ग्रुप में सबसे पहले रिचार्ज कराने के लिए प्रेशर बनाया जाता है। ऐसे-ऐसे ऑफर देते हैं कि हर कोई सोचता है कि अमीर बनना बहुत आसान है। हरे रंग या लाल रंग के बटन को दबाकर केवल इतना बताना होता है कि अब कौन-सा कलर खुलेगा।

मैसेज भेजने वाले इसे इन्वेस्टमेंट प्लान बताकर कहते हैं... जल्दी से रीचार्ज कर लीजिए। दावा करते हैं कि 10 रुपए लगाने पर पहली बार में 19 रुपए मिलेंगे। 30 रुपए खेलने पर 57 रुपए जीत जाएंगे। जैसे-जैसे रकम बढ़ाएंगे, जीतने की रकम भी कई गुना बढ़ती जाएगी।

लेकिन इनका गेम प्लान दूसरा होता है। शुरुआत में तो एक दो बार जितवाते हैं। जीतने के बाद अलग से गिफ्ट देते हैं। वहीं 15 दिन लगातार खेलने पर बुलेट बाइक, फॉर्च्यूनर जैसी लग्जरी गाड़ी जीतने का लालच देते हैं। ऑडियो मैसेज डाल कर 40 मिनट में 40 हजार रुपए कमाने जैसे ऑफर देते हैं।

लेकिन जैसे ही एक हजार का लॉस होता है, उसके बाद खेलने के लिए 3 हजार रुपए की बिड लगानी पड़ती है। फिर 3 हजार लॉस होने पर 9 हजार, इसी तरह 27 हजार का लॉस होने पर 81 हजार और इससे भी आगे कई गुना रकम लगानी पड़ती है।

15 से अधिक एजेंट, दो मेन एडमिन
भास्कर ने पूरे मामले की जांच-पड़ताल शुरू की तो पता लगा कि 20 से अधिक बड़ी कंपनियों के नाम पर ऐप बने हुए हैं। हर ऐप में दो लोग मुख्य एडमिन होते हैं। ऐप के मालिक के अलावा 15 से ज्यादा एजेंट कमीशन पर काम करते हैं। इनका काम ज्यादा से ज्यादा लोगों को ग्रुप में जोड़ना और मैसेज भेजकर खेलने के लिए उकसाना होता है।

मार्केटिंग का तरीका इतना जबरदस्त होता है कि लोग खुद ही अमीर बनने के सपने देखने लगते हैं। ये मौका कहीं हाथ से छूट न जाए....इस तरह के मैसेज रिकॉर्डिंग कर ग्रुप में भेजते हैं, जिससे लोग झांसे में आ जाते हैं।

मैंने 80 लाख कमा लिए, फॉर्च्यूनर खरीदने जा रहा हूं...
टेलीग्राम पर ग्रुप में एजेंट हमेशा महंगी गाड़ियों के साथ फेक फोटो लगाकर रखते हैं। यह शो करते हैं कि गेम खेलने के बाद उनके पास इतनी बेशुमार दौलत आ गई है कि अब लग्जरी लाइफ जी रहे हैं। दिन भर गेम खत्म होने के बाद ये मैसेज डालते हैं कि मैंने इतने रुपए कमा लिए हैं, अब फॉर्च्यूनर खरीदने जा रहा हूं।

एजेंट महंगी घड़ियों, आईफोन, मैकबुक की फोटो के साथ गेम खेलने से हुई कमाई के फेक स्क्रीनशॉट भेजते हैं, जो एडिटेड होते हैं। इससे लोगों को भरोसा हो जाता है कि वाकई गेम से अरबपति बना जा सकता है।

एजेंट कमाते हैं लाखों रुपए
टेलीग्राम पर ग्रुप बना कर भारत में एजेंट दो से पांच लाख तक लोगों को जोड़ लेते हैं। उन्हें एक मेंबर खिलाने पर 150 से 200 रुपए तक मिलते हैं। अगर 5 लाख में से 10 हजार मेंबर भी गेम खेलते हैं तो उन्हें सीधे तौर पर 15 लाख रुपए की कमाई रोज होती है। जितने ज्यादा प्लेयर, उतनी ज्यादा कमाई बढ़ती जाती है।

अब आपको बताते हैं पर्दे के पीछे का असली खेल कैसे होता है....

कमाई का गणित जो आपने ऊपर समझा, वह केवल उदाहरण मात्र है। गेमिंग एक्सपर्ट बताते हैं कि एक सेशन में खेलने वालों की संख्या 7-7 लाख से भी ज्यादा होती है। अब जरा सोचिए ऐसे 20 से ज्यादा ऐप चल रहे हैं तो इससे कितने लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं।

भास्कर ने ऐसे की पड़ताल
ऑनलाइन सट्टे के इस कारोबार की पड़ताल के लिए भास्कर रिपोर्टर ने पीड़ितों से कुछ जानकारी जुटाई। फिर रैकेट को समझने के लिए जिन टेलीग्राम लिंक के जरिए यह बाजार चलता है, उन्हें जॉइन कर करीब 15 दिन तक हर एक्टिविटी को नोट किया।

एक दिन ग्रुप में एडमिन ने खुद की फोटो एपल के एक लैपटॉप के साथ डाली। जिसके मैसेज में लिखा कि 'मैने 4 लाख की मैकबुक खरीद ली है। एक नई गाड़ी भी ली है। अगर मेरे हिसाब से खेलोगे तो आगे करोड़पति हो जाओगे।

एडमिन के इसी मैसेज से खेल पकड़ में आ गया। पड़ताल की तो सामने आया कि ये दोनों युवक जयपुर के आसपास के रहने वाले हैं। इनके यूपीआई नंबरों के आधार पर पुलिस की मदद से जानकारी जुटाई तो पता चला कि बेंगलुरु के किसी बैंक में इन्होंने अकाउंट खोल रखे हैं।

दोनों युवक काफी साधारण परिवार से हैं, लेकिन गेमिंग ऐप से कमाई के मास्टरमाइंड हैं। रोज लाखों युवाओं को झांसे में लेकर खुद करोड़ों कमा रहे हैं, लेकिन इनकी बात मानकर झांसे में आने वाले युवा कर्ज के दलदल में धंसते जा रहे हैं।

भारत में पूरी तरह से बैन है चाइना ऐप
आईटी एवं साइबर एक्सपर्ट दीपेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि लुलु मॉल, रिलायंस मॉल, मंत्री मॉल जैसे गेमिंग ऐप चाइना में डेवलप हुए हैं। भारत में ये पूरी तरह से बैन हैं। ये कलर प्रीडिक्शन पर गेम खिलाते हैं, जो काफी रिस्की गेम है। इनका लिंक आने पर डाउनलोड नहीं करें।

क्योंकि इनका एडमिन पैनल चाइना में ही होता है। चाइना से ही पूरे गेम को हैंडल किया जाता है। फर्जी मोबाइल नंबरों से यूपीआई आईडी बना लेते हैं। फिर पेमेंट आने पर खुद के अकाउंट में ट्रांजैक्शन कर लेते हैं। सिम को तोड़कर फेंक देते हैं और नई सिम से नई आईड़ी बना लेते हैं। पहले युवकों को छोटा लालच देकर जोड़ते हैं। इसके बाद आदत लग जाने पर लोगों को कर्जा लेने पर मजबूर कर देते हैं।

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