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राजस्थान की राजनीति में बाड़ाबंदी नई नहीं:हमेशा रहता है बाड़े में सुराख का डर, जयपुर में ही टूटा था मेयर का बाड़ा; लाटा कूद भागे थे

जयपुर6 महीने पहले
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विष्णु लाटा (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
विष्णु लाटा (फाइल फोटो)

विधानसभा में संख्या बल का प्रदर्शन हो चाहे राज्यसभा चुनावों के दौरान विधायकों के जोड़-तोड़ की राजनीति, विधायकों की बाड़ाबंदी कर दी जाती है। बाड़ाबंदी के लिए शहर से बाहर के लग्जरी होटलों को सबसे उपयुक्त माना जाता है।

कारण बताया जाता है कि कोई भी बाड़ाबंदी में विधायकों से संपर्क नहीं कर सकें। इसके बाद भी बाड़े में सुराख का डर रहता है। कोई बाड़ा कूद ना जाए, बाड़े में भेदिया ना घुस जाए। एक समय था जब शहर के बीचो बीच रामबाग, जय महल पैलेस, होटल क्लार्क्स में बाड़ाबंदी की जाती थी, हालांकि तब शहर भी इतना बड़ा नहीं था।

इन होटलों में की जाती है बाड़ाबंदी; दिल्ली रोड स्थित होटल ली-मेरिडियन, शिव विलास, फेयरमोंट, जेडब्ल्यू मेरियट, आगरा रोड पर राजविलास, टोंक रोड पर क्राउन प्लाजा व चोखी ढाणी को बाड़ाबंदी के लिए उपयुक्त माना जाता है। होटल फेयरमोंट की वेबसाइट पर बताएं चार्ज के अनुसार एक रात के ठहरने का किराया ही 15 से 17 हजार रुपए प्रतिव्यक्ति होता है। ऐसे में 100 लोगों का एक रात ठहरने खर्च करीब ही 15 लाख रुपए से अधिक होता है।

बाड़े में भाजपा के पार्षद लाटा कांग्रेस के मेयर बनकर लौटे

नगर निगम में मेयर अशोक लाहोटी के विधायक बनने के बाद मेयर के चुनाव के लिए भाजपा पार्षदों की अजमेर रोड स्थित एक होटल में बाड़ाबंंदी की गई। भाजपा पार्षद विष्णु लाटा बागी होकर होटल की बाउंड्रीवाल कूदकर बाहर आ गए। इसके बाद कांग्रेस के साथ मिलकर खेल करते हुए कांग्रेस व भाजपा के बागी पार्षदों के समर्थन से खुद मेयर बन गए। इस घटना से सभी पार्टियों को बाड़ाबंदी के सुराखों को लेकर अलर्ट कर दिया।

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