जयपुर की न्यू सांगानेर रोड पर टूटेंगी 200 दुकानें:व्यापारियों को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली, जेडीए अब इस रोड की चौड़ाई बढ़ाएगा

जयपुरएक वर्ष पहले
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जेडीए के नोटिसों मिलते ही व्यापारियों ने अपने-अपने प्रतिष्ठान को बंद कर वीटी रोड चौराहे पर धरना दिया था। - Dainik Bhaskar
जेडीए के नोटिसों मिलते ही व्यापारियों ने अपने-अपने प्रतिष्ठान को बंद कर वीटी रोड चौराहे पर धरना दिया था।

जयपुर के मानसरोवर स्थित न्यू सांगानेर रोड के व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई। राजस्थान हाईकोर्ट की डबल बैंच ने सड़क सीमा से अतिक्रमण हटाने के मामले में लगाई पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब ये तो तय हो गया है कि इस रोड पर प्रभावित करीब 200 से ज्यादा दुकानें व अन्य स्ट्रक्चर टूटेंगे।

वर्तमान में यह रोड मानसरोवर रीको से मानसरोवर मेट्रो यार्ड तक करीब 7 किलोमीटर लम्बी है। मास्टर प्लान में इस रोड को जेडीए ने 200 फीट कर रखा है, जबकि मौके पर यह रोड 160-170 फीट चौड़ाई में है। पृथ्वीराज नगर की तरफ से रोड की चौड़ाई बढ़ाने का काम जेडीए करेगा, जिसके चलते 200 से ज्यादा दुकान, मैरिज गार्डन व अन्य स्ट्रक्चर तोड़े जाएंगे। करीब एक महीने पहले जेडीए ने जब इन प्रभावित व्यापारियों को नोटिस दिए थे, तब व्यापारियों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था।

जेडीए के नोटिसों मिलते ही व्यापारियों ने अपने-अपने प्रतिष्ठान को बंद कर वीटी रोड चौराहे पर धरना दिया था। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि उन्हे यहां व्यापार करते हुए 40 साल से भी ज्यादा समय हो गया। मौके पर 160 फीट का रोड है और इसमें करीब 30 फीट से ज्यादा चौड़ाई पर बीआरटीएस कॉरिडोर बना है, जो किसी काम का नहीं है। खुद परिवहन मंत्री समेत अन्य मंत्री, विधायक इस कॉरिडोर को हटाने की बात कह चुके है। अब जेडीए इस रोड को 200 फीट करने पर तुला है। इस कारण पृथ्वीराज नगर वाले एरिया में करीब 200 दुकानें प्रभावित हो रही है। इन दुकानों को हटाने से पहले न तो जेडीए मुआवजा देने की बात कह रहा और न ही इनके पुनर्वास की।

6 दिसंबर तक पेश करनी है पालना रिपोर्ट
करीब 3 महीने पहले हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जेडीए को इस रोड से अतिक्रमण हटाकर पालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। इस पालना रिपोर्ट को जेडीए को 6 दिसंबर को पेश करनी है। लेकिन मौके पर व्यापारियों के विरोध को देखते हुए जेडीए अधिकारियों को भी अतिक्रमण हटाने में परेशानी हो रही है। क्योंकि इन प्रभावितों को कोई मुआवजा या पुनर्वास करने के मूंड में नहीं है।