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  • This Should Not Happen In Ranthambore, So Where 50 Tigers Live In 456 Sq Km, For The First Time, 12 Posts Were Made By Completing The Protection Road.

हर साल 3-5 बाघ गायब, हर माह 50 घुसपैठ:रणथंभौर में ऐसा न हो, इसलिए 456 वर्गकिमी में जहां 50 बाघ रहते हैं, वहां पहली बार प्रोटेक्शन रोड पूरी कर 12 चौकियां बनाईं

जयपुर7 दिन पहलेलेखक: महेश शर्मा
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भास्कर ने वन विभाग के साथ 456 वर्गकिमी जंगल की पेरिफेरी पर पहाड़ और दुर्गम रास्तों से होकर तैयार प्रोटेक्शन रोड का दौरा किया। - Dainik Bhaskar
भास्कर ने वन विभाग के साथ 456 वर्गकिमी जंगल की पेरिफेरी पर पहाड़ और दुर्गम रास्तों से होकर तैयार प्रोटेक्शन रोड का दौरा किया।

बेलगाम टूरिज्म के कारण एमपी जैसा खतरा राजस्थान में भी है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व में हर साल 3 से 5 बाघ गायब हो रहे हैं, जबकि हर माह 50 से ज्यादा घुसपैठ होती हैं। दुर्गम जंगल और कठिन रास्तों के कारण गश्त भी मुश्किल है। इसलिए जंगल और बाघों को सुरक्षा देने के लिए कड़ी मोर्चाबंदी हो रही है।

नेशनल पार्क की 4 रेंज में (आरओपीटी, खंडार, कुंडेरा और तालड़ा) जहां सर्वाधिक 50 बाघ रहते हैं, उसके चारों ओर 170 किमी एरिया में पहली बार ‘प्रोटेक्शन रोड’ के घेरे को पूरा किया गया है। अभी तक यहां चारों ओर 70 किमी पेरिफेरी पर न तो किसी सुरक्षा चौकी का नामोनिशान था और न ही गश्त के लिए कोई रोड (ट्रैक) बनी थी। इसके अलावा 12 चौकियां भी बनाई गई हैं। यह सुरक्षा की दृष्टि से बड़ा कदम है।

तीन महीने पहले मिर्जाघाटी एरिया में ऐसा ही हुआ, जब शिकारी एक चिंकारा को मारकर ले जा रहे थे। विभाग की टीम जब तक बाहर आबादी एरिया से मौके पर पहुंचती, तब तक शिकारी गायब हो चुके थे। मामला दर्ज किया गया, लेकिन हर बार की तरह शिकारी पकड़ से बाहर रहे।

यही नहीं हर साल जंगल से औसतन 3-5 बाघ गायब होते रहे और सबूत के तौर पर कभी-कभार मिले तो कैमरा ट्रैप में बंदूकधारी शिकारी भी दिखे। रणथंभौर के जिस एक ही एरिया से दो साल पहले एक के बाद एक 5 बाघ गायब हुए, वहां भी जंगल में 10 किोमी भीतर तक बेरोकटोक घुसपैठ रोकने के लिए कोई स्टाफ, चौकी, रास्ते मौजूद नहीं थे।

घुसपैठ पर अंकुश लगता देख विरोध-व्यवधान इतना कि कहीं टेंडर फेल हुए तो कहीं 2-2 एफआईआर दर्ज कर पुलिस सुरक्षा में पूरे हुए काम
मानसरोवर पर चौकी का विरोध देख 10 स्टाफ की मौजूदगी में काम शुरू हो पाया, लेद की तलाई पर बाहरी लोगों का भारी विरोध हुआ, छोलादेह चौकी के लिए तो दो एफआईआर दर्ज करानी पड़ी। मिर्जाघाटी में चिंकारा के शिकार के चलते विभाग के अफसरों ने लगातार उपस्थिति दर्ज करा काम कराया। आचेर, बेड़ा की कुई, मेई कला में भी अतिरिक्त स्टाफ के साथ काम हो रहे हैं।

जंगल में शिकारी घूमते रहे, क्योंकि स्टाफ आबादी एरिया में लगा था:
बनास की ओर छोलादेह अंतिम चौकी बन रही है, जहां लगते हुए पूरा खुला एरिया है। यहां कभी गांव में चौकी थी, और भीतर 10 किमी तक रास्ते नहीं होने से गश्त की कोई व्यवस्था नहीं थी। स्टाफ गांव के बीच रहता था, जिसका खुद का पता नहीं चल पाता था। शिकारी आए और गए तो भी खबर नहीं। यही कारण है कि पेरिफेरी से बाघ गायब होते रहे और सबूत तक नहीं मिले।

शावकों वाली बाघिन नूर की सुरक्षा को टूरिज्म बैन, यहीं पैदल-मोटर साइकिल से घुसपैठ थी
वन विभाग ने जोन 1 के गाड़ाडूग एरिया में टूरिज्म पर रोक लगाई है। कारण है, यहां बाघिन नूर अपने नन्हें शावकों के साथ है। इससे एकाएक टूरिज्म का दखल बढ़ा और उसके साथ ही शावकों के लिए परेशानी। इससे अलग यहीं पर पिछले दिनों तक सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से आबादी एरिया से पैदल, मोटरसाइकिल से बेरोकटोक प्रवेश करते रहे हैं। इसे पूरी तरह रोकने को चौकी, गश्त के साथ समझाइश शुरू की गई है।

42 स्टाफ के साथ खड़ी हुई 9 चौकियां, 3 बन रहीं

  • चौकियां जो बनाई गई: भदलाव, छोलादेह, मानसरोवर, लेद की तलाई, मिर्जाघाटी। {जो बन रहीं: आचेर, बेड़ा की कुई, मेई कला।
  • जिन्हें फिर चालू किया: जोखा, खेड़ी, मुहम्मदपुरा, नई रेंज तालड़ा।

(दो साल पहले शिकार की घटना के बाद पूरे एरिया में गश्त के लिए प्रोटेक्शन रोड, चौकियां, स्टाफ, गाड़ी की व्यवस्था करने के प्लान तैयार किए गए।

पहले- क्रिटिकल टाइगर एरिया में ट्रैकिंग हो रही थी, अब- पेरिफेरी सेे हर दिन टाइगर की रिपोर्टिंग शुरू हुई
जोन 6 एरिया में मिर्जाघाटी, जोन 5 के पीछे उलियाना आदि से बेरोकटोक एंट्री हो रही थी। लोग ट्रैकिंग व पार्टी करने प्लेटो पर पहुंचते। अब प्रोटेक्शन रोड तैयार होने से नियमित गश्त शुरू हुई है। रोज वायरलैस से टाइगर की रिपोर्टिंग की जा रही है।

अब हमें गश्त में आसानी हो गई : पांडेय
प्रोटेक्शन रोड बनने से बाहर आबादी एरिया के चक्कर काटे बगैर सीधे जंगल में गश्त करवा पा रहे हैं। इससे अपराधियों में भय बन रहा है। -डॉ. डी.एन. पांडेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक

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