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नवरात्र महोत्सव:इस बार नवरात्र 9 दिन के, घट स्थापना 17 काे, महानवमी-दशहरा एक ही दिन 25 को

जयपुर8 महीने पहले
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  • मंदिरों में तैयारियां शुरू, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ होंगे दर्शन

इस साल नवरात्र 17 अक्टूबर से प्रारंभ हो रही है। चित्रा नक्षत्र में प्रारंभ हो रही नवरात्र अत्यंत सुख और समृद्धि प्रदान करने वाली होगी। इस बार की नवरात्र पूरे 9 दिन की हैं। ज्योतिषशास्त्री पं दिनेश मिश्रा ने बताया कि किसी भी तिथि का लोप नहीं है। इधर, पर्व नजदीक आते ही देवी मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। जो मंदिर माता के दर्शनों के लिए खुलेंगे, वहां भक्तों को सोशल डिस्टेंस की पालना करनी होगी।

कई देवी मंदिरों के इस बार भक्त लाइव दर्शन कर सकेेंगे। नवरात्र में प्रथम दिन अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:49से 12:35 बजे के बीच घट स्थापना होगी। उधर, इस साल माता के मंडप नहीं सजने और गरबा रास नहीं होने से मूर्तिकार बड़ी मूर्तियों की बजाए छोटी मूर्तियां ही बना रहे हैं।

20 साल बाद घट स्थापना की सुबह सूर्य लग्न में नीच का
इस बार महत्वपूर्ण है कि जिस दिन घट स्थापना हो रही है, उसी दिन सुबह सूर्य लग्न में नीच का होगा। पं. मिश्रा ने बताया कि यह अत्यंत दुर्लभ घटना है जो कि करीब 20 वर्ष बाद हो रही है।

आमेर शिला माता मंदिर के पट दर्शनों के लिए बंद रहेंगे
शक्ति पीठ आमेर शिला माता मंदिर के पट दर्शनार्थियों के लिए नहीं खुलेंगे। छठ का मेला भी नहीं भरेगा। मंदिर पुजारी बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि मंदिर श्रदालुओं के लिए 31 अक्टूबर तक बंद रहेगा। नवरात्र में घट स्थापना से लेकर सभी अनुष्ठान यथावत होंगे। बता दें कि नवरात्र में माता के दर्शनों के लिए पांच लाख से अधिक लोग नौ दिन में और छठ के मेले में पहुँचते हैं।

घट स्थापना के मुहूर्त
पं मिश्रा ने बताया कि इस नवरात्र में कलश स्थापना सुबह 8:16 से 10:30 बजे तक वृश्चिक लग्न के मुहूर्त में, सुबह 11:49से 12: 35 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में, इसके अलावा सुबह 6:31 से सुबह 8:45 तक और प्रातः 7:56 से प्रातः 9:22 बजे तक शुभ के चौघड़िया में घट स्थापना कर माता की जोत लेकर आरती स्तुति और कन्या पूजन किया जा सकता है।

नवमी व दशमी रहेगी एक ही दिन
सिद्ध पीठ श्री फतेह बालाजी धाम के पंडित रामवतार मिश्र ने बताया कि अष्टमी तिथि 24 अक्टूबर शनिवार को सुबह 6:58 तक रहेगी और नवमी तिथि रविवार 25 अक्टूबर सुबह 7:42 तक रहेगी। नवमी तिथि के बाद सुबह 7:43 से दशमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। रविवार को दशमी तिथि दोपहर और सायंकाल में होने के कारण दशहरा रविवार को ही मनाया जाएगा।

जबकि दूसरे दिन सोमवार को दशमी तिथि सुबह 9:00 बजे तक ही रहेगी। इसलिए रविवार को अपराजिता पूजन, शमी पूजन एवं दशहरा उत्सव मनाया जाएगा। इसी दिन अबूझ एवं स्वयं सिद्ध मुहूर्त होने के चलते अनेक जगह व्यापाराम आरंभ नवीन गृह प्रवेश मुहूर्त और नए कार्य की शुरुआत के साथ ही कई वाहनों की खरीद भी होगी।

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