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राहत की बात:जिन्हें कोरोना हुआ; दोनों डोज लगी, उनमें एंटीबॉडीज सबसे बेहतर, भास्कर ने एसएमएस अस्पताल के साथ मिलकर किया हर आयु-वर्ग का टेस्ट

जयपुर7 महीने पहलेलेखक: संदीप शर्मा
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पिछले 6 दिन से बढ़ रहे नए केस को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि सर्वे में हुए टेस्ट के चलते केस बढ़े हैं। - Dainik Bhaskar
पिछले 6 दिन से बढ़ रहे नए केस को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि सर्वे में हुए टेस्ट के चलते केस बढ़े हैं।

कोरोना के बढ़ते केस फिर डराने लगे हैं। स्कूल जाते बच्चों सहित बुजुर्गों को लेकर हर कोई चिंतित है। इस बीच राहत भरी बात यह सामने आई है कि जो लोग 6 से 7 महीने पहले तक वैक्सीन की दोनों डोज लगवा चुके, उनमें अभी भी पर्याप्त एंटीबॉडीज हैं। जिस स्तर पर एंटीबॉडीज सामने आई है, उससे स्पष्ट है कि दोनों डोज लगवा चुके लोगों को आने वाले कई महीनों तक बूस्टर डोज की जरूरत नहीं होगी।

मालूम हो कि दैनिक भास्कर ने एसएमएस अस्पताल के साथ 27 मेडिकल वॉरियर्स की एंटीबॉडीज टेस्ट कराई थी। इनमें 25 से 65 वर्ष तक की आयु के डॉक्टर्स शामिल थे। साथ ही 5 जने ऐसे शामिल थे, जिन्हें डायबिटीज और हाइपरटेंशन की शिकायत थी। पहले आशंका थी कि इन लोगों में कम एंटीबॉडीज हो सकती हैं। लेकिन बेहतर एंटीबॉडीज आने के बाद उन लोगों में भी डर खत्म हो गया है, जो किन्हीं बीमारियों (कार्डियक, लंग्स, न्यूरो आदि) से जूझ रहे हैं। हालांकि 5 जनों में कम एंटीबॉडीज होना भी सामने आया है लेकिन एक्सपर्ट्स इन्हें भी खतरे से बाहर मान रहे हैं क्योंकि एंटीबॉडीज तो हैं, भले ही कम हैं।

टेस्ट में 13 लोगों का उच्चतम स्कोर रहा, जबकि सिर्फ 5 जनों में ही कम मिली

एंटीबॉडीज टेस्ट सर्वे के लिए सबसे पहले उन डॉक्टर्स का चयन किया, जिन्हें 7 से 8 महीने पहले दोनों डोज लगी। इनमें 25 से 68 साल आयु तक का स्टाफ लिया गया। इसके अलावा 5 जने वे लिए गए, जिन्हें कोई न कोई डिजीज थी। जांच के बाद 13 जनों में एंटीबॉडीज का उच्चतम स्कोर सामने आया। यानी जितनी एंटीबॉडीज 6 महीने पहले थी, उतनी ही अब मिली। हालांकि 5 जनों में कम एंटीबॉडीज पाई गई।

शुक्र है...अभी निमोनिया के केस नहीं के बराबर आ रहे हैं
पिछले 6 दिन से बढ़ रहे नए केस को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि सर्वे में हुए टेस्ट के चलते केस बढ़े हैं। अब जबकि ए-सिम्पटोमेटिक कोविड लगभग सभी को हो चुका है तो बॉडी में वायरस मौजूद है। ऐसे में टेस्ट कराने पर पॉजिटिव आ रहे हैं। हालांकि अभी सभी ए-सिम्पटोमटिक हैं और कोई भी अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ है। राहत की दूसरी बात यह भी है कि वर्ष 2019-2020 के नवम्बर में हर दिन निमाेनिया के केस आ रहे थे और इस वजह से अधिक परेशानी हुई थी लेकिन अभी निमोनिया के केस न के बराबर हैं।

लगातार जीनोम सिक्वेंसिंग, वेरिएंट आते ही पता लगेगा
एसएमएस मेडिकल कॉलेज में हर दिन पॉजिटिव आ रहे केस की जीनोम सिक्वेंसिंग हो रही है। ऐसे में वेरिएंट आता है तो तुरंत पता चल सकेगा। हालांकि डॉक्टर्स का यह भी कहना है कि वायरस का वेरिएंट होना अधिक चिंताजनक नहीं है क्योंकि वेरिएंट होना एक प्रक्रिया है। लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि वेरिएंट खतरनाक स्तर का न हो।

टेस्ट में काफी बेहतर स्थिति मिली

  • एंटीबॉडीज टेस्ट में काफी बेहतर स्थिति मिली है। उन लोगों में अधिक एंटीबॉडीज मिली है, जिन्हें कोविड हुआ और वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी थी। केवल 5 लोगों में कम एंटीबॉडीज मिली है। लेकिन जरूरी यह है कि कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन हो। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग से ही कोविड को हराया जा सकेगा। हर किसी को कोरोना को लेकर सावधानी ही बरतनी ही होगी। - डॉ. पुनीत सक्सेना, सीनियर प्रोफेसर, एसएमएस मेडिकल कॉलेज
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