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30 साल में 3 बार सरकार पर संकट:तीनों बार भंवरलाल शर्मा की अलग-अलग भूमिका, कभी सरकार बचाई तो कभी गिराई

जयपुर10 महीने पहले
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विधायक भंवरलाल शर्मा एक (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
विधायक भंवरलाल शर्मा एक (फाइल फोटो)

राजस्थान विधानसभा के चर्चित चेहरे एवं चूरू की सरदारशहर सीट से 7 बार से विधायक भंवरलाल शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में है। इसलिए, कि वे भी कांग्रेस सरकार के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजाने वाले विधायकों में शामिल है।

पिछले 30 साल के राजनीतिक दौर में प्रदेश की सरकारों पर तीन बार बड़ा संकट आया है। इसमें पहली बार शर्मा संकटमोचक के तौर पर रहे। वहीं, 1996-97 में उन पर भाजपा सरकार को अस्थिर करने के आरोप लगे।  अब तीसरी बार वे कांग्रेस सरकार के लिए सिरदर्द पैदा कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष रहे राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी करके भी वे सुर्खियों में रहे हैं।

पहली बार शेखावत सरकार को बचाने में शामिल 

मार्च, 1990: भैरोंसिंह शेखावत की अगुवाई में संयुक्त मोर्चा की सरकार बनी। भाजपा एवं जनता दल ने मिलकर चुनाव लड़ा। भाजपा को 85 एवं जनता दल को 54 सीटें मिली। 23 अक्टूबर, 1990 को लालकृष्ण आडवाणी की अयोध्या रथ यात्रा के विरोध में जनता दल के 7 कैबीनेट सहित सभी मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया। सरकार अल्पमत में आ गई थी।

5 नवंबर, 1990 को दिग्विजय सिंह की अगुवाई में जनता दल से 22 विधायक अलग होकर जनता दल- दिग्विजय का गठन किया और भाजपा सरकार को समर्थन दिया। शेखावत सरकार बच गई। जनता दल - दिग्विजय कोटे से विधायक भंवरलाल शर्मा को केबीनेट मंत्री बनाया गया था।  हालांकि, 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद ढांचा ढहाए जाने पर 15 दिसंबर को सरकार को बर्खास्त कर दिया गया।

शेखावत सरकार को गिराने की साजिश में शामिल रहे

दिसंबर, 1996: वर्ष 1992 से दिसंबर, 1993 तक राष्ट्रपति शासन रहा। दिसंबर, 1993 के चुनाव में एक बार फिर भैरों सिंह शेखावत के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। उन्हें 116 विधायकों का समर्थन मिला। इसमें जनता दल के छह एवं निर्दलीय विधायक शामिल थे।

चुनाव से पहले भंवरलाल शर्मा भाजपा में शामिल हो गए थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें बाहर कर दिया। इसके बाद शर्मा जनता में शामिल हो गए और फिर 1996 में उपचुनाव में जीत गए। शर्मा पर आरोप लगे कि उन्होंने भाजपा के विधायकों के साथ मिलकर शेखावत सरकार को गिराने की कोशिश की, जब शेखावत इलाज कराने 1996 में अमेरिका गए थे। हालांकि, वे इसमें सफल नहीं रहे।

अब...गहलोत सरकार पर संकट, विरोधियों में शामिल

जुलाई, 2020 : दिसंबर, 2018 में अशोक गहलोत की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार बनी। कांग्रेस के टिकट पर भंवरलाल शर्मा लगातार चौथी बार और कुल मिलाकर सातवीं बार विधायक चुने गए। प्रदेश अध्यक्ष एवं डिप्टी सीएम रहे सचिन पायलट की अगुवाई में एक धड़े ने बगावत कर दी। इस धड़े में विधायक शर्मा भी शामिल हैं। सरकार अल्पमत में आ गई है।

राहुल गांधी पर टिप्पणी को लेकर विवादों में रहे

जनवरी, 2014 में कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने के मामले में भंवरलाल शर्मा ने कांग्रेस पार्टी से निलंबित कर दिया था। उन्होंने कहा था राहुल गांधी जोकरों से घिरे रहते हैं। हालांकि, बाद में बहाल कर दिया और वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट भी दिया और वे जीत भी गए।

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