आरजीएचएस में डेंटल हॉस्पिटल्स को जोड़ने के लिए नियम बदले:सरकारी कर्मियों का उन अस्पतालों में भी इलाज जहां डेंटल और एनएबीएच लैब नहीं

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: संदीप शर्मा
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आरजीएचएस में अधिक डेंटल स्पेशलिटी हॉस्पिटल को जोड़ने के लिए सरकार ने वर्ष 2013 के नियमों में बदलाव किया है। - Dainik Bhaskar
आरजीएचएस में अधिक डेंटल स्पेशलिटी हॉस्पिटल को जोड़ने के लिए सरकार ने वर्ष 2013 के नियमों में बदलाव किया है।

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम में डेंटल स्पेशलिटी हॉस्पिटल को जोड़ने के लिए सरकार ने नियम बदले हैं। इससे स्कीम में ये हॉस्पिटल शामिल जरूर हो रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि नियमों में बदलाव से मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ होना तय है क्योंकि सरकार ने जरूरी शर्तें भी हटा दी हैं। ऐसे में वे क्लीनिक भी आरजीएचएस से जोड़े गए हैं और जोड़े जाएंगे, जिनमें डेंटल लैब तक नहीं हैं।

यहां तक कि एनएबीएच के सामान्य नियमों को भी हटा दिया गया है। नियमों में इन बदलावों का सर्वाधिक नुकसान उन सरकारी कर्मचारियों और आरजीएचएस के लाभार्थियों को होगा, जो बेहतर गुणवत्ता का इलाज चाहते हैं। सरकार की मंशा है कि अधिक से अधिक क्लीनिक को आरजीएचएस से जोड़ा जाए लेकिन गुणवत्ता से समझौता करने से सैकड़ों लोगों नुकसान हो सकता है।

मालूम हो कि आरजीएचएस में अधिक डेंटल स्पेशलिटी हॉस्पिटल को जोड़ने के लिए सरकार ने वर्ष 2013 के नियमों में बदलाव किया है। 28 अप्रैल 2021 को किए गए इन बदलावों में हॉस्पिटल्स के पैरामीटर और नियम दोनों बदले गए हैं। इसमें एनएबीएच के उन नियमों को भी दरकिनार कर दिया गया है, जो जरूरी थे। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल पाएगा, इस पर संशय है।

जो सुविधाएं जरूरी, उनकी अनिवार्यता भी हटाई

  • पहले 21 बेड जरूरी थे, जिन्हें अब शून्य कर दिया गया है।
  • न्यूनतम 5 से 10 बेड की क्षमता जरूरी थी, इसे भी शून्य किया गया।
  • सुपर स्पेशलिस्ट, डेंटिस्ट क्लीनिक में जरूरी नहीं है। पहले यह आॅन कॉल पर तो होना जरूरी था, अब यह अनिवार्यता हटा दी गई है।
  • ऑन कॉल फिजिशियन के होने की सुविधा भी हटा दी गई है।
  • डायग्नोसिस और रेडियोलॉजिस्ट के होने की सुविधा भी शर्तों से हटा दी गई है। जबकि मरीजों के लिए ये दोनों ही होने बहुत जरूरी हैं।
  • डेंटल हाइजेनिस्ट, चेयर साइड असिस्टेंट, मैकेनिक की अनिवार्यता भी हटा दी गई है।

इंफ्रास्ट्रक्चर में ये बदलाव किए

  • पहले पांच चेयर विद मशीन की अनिवार्यता थी, अब हटा दी गई है। अब केवल एक से काम चलाया जाएगा।
  • माइनर ओटी के मशीन के साथ होने की प्रतिबद्धता थी, वह भी अब खत्म कर दी गई है।
  • किसी भी तरह के उपकरणों और उनकी गुणवत्ता की मानकता भी खत्म कर दी गई है,जबकि यह मरीजों के लिए जरूरी था।
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