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भरतपुर पुलिस ने किया खुलासा:ट्रक ड्राइवर असम, उड़ीसा व बंगाल से 500 में सिम खरीदकर भरतपुर के कामां और नगर क्षेत्र में हजार में साइबर ठगों को बेचते हैं

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: ओमप्रकाश शर्मा
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अधिकांश बदमाश ऐसे जो पहले गाड़ियां चुराते थे, पर अब सायबर ठगी करते हैं - Dainik Bhaskar
अधिकांश बदमाश ऐसे जो पहले गाड़ियां चुराते थे, पर अब सायबर ठगी करते हैं

भरतपुर का कामां और नगर क्षेत्र प्रदेश में साइबर ठगी का गढ़ बन गया है। इसका खुलासा हुआ है भरतपुर पुलिस द्वारा वाहनों की जांच के लिए शुरू किए गए अभियान के दौरान। स्थिति यह है कि कामां और नगर के 129 गांव में रहने वाले 750 से ज्यादा युवा साइबर ठगी में लिप्त हैं। ये सभी अपराधी पूर्व में गाड़ियों की चोरियां करते थे।

सर्वे के दौरान पुलिस ने जांच की तो सामने आया कि दोनों विधानसभा क्षेत्रों के पास में अलग-अलग कंपनियों के 2154 मोबाइल टॉवर हैं। पुलिस ने इनमें से 647 मोबाइल टॉवर की जांच की तो सामने आया कि इन गांवों में असम, उड़ीसा व पश्चिम बंगाल के 1011 सिमकार्ड एक्टिव हैं।

साइबर ठग इन्हीं सिम से लोगों को फोन कर झांसे में लेकर उनके बैंक खातों से रुपए निकाल रहे हैं। राज्य में साइबर ठगों द्वारा लोगों के खातों से औसतन रोज 2 लाख रुपए निकाले जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि तीन राज्यों की करीब 4 हजार सिम कामां व नगर में एक्टिव हैं। इस संबंध में भरतपुर पुलिस ने सिमकार्ड की जांच करने के लिए एसओजी व एटीएस को गोपनीय रिपोर्ट कार्रवाई करने के लिए भेजी है।

भास्कर Explainer- गाड़ी पकड़े जाने पर आरोपी की पहचान हो जाती थी, अब ठगी के लिए जिस नंबर से कॉल किया जाता है वह दूसरे राज्य का होता है, अपराधी ठगी करने के बाद वह नंबर बंद कर देते हैं और आसानी से पकड़ में नहीं आते
Q. ट्रक ड्राइवरों को सिम कैसे मिल जाती हैं?
A. पड़ताल में सामने आया है कि सायबर ठगों को सिम उपलब्ध कराने वाले अधिकांश ट्रक ड्रायवर मेवात के हैं। ये ड्राइवर जब असम, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल ट्रांसपोर्टर का माल लेकर जाते हैं, तब इन राज्यों के मजदूरों को पैसों का लालच देकर उनकी आईडी से सिम खरीद लेते हैं। इसके बदले में ड्राइवर हर मजदूर को 500 रुपए देता हं। सिम उपलब्ध होने पर ड्रायवर इसकी जानकारी ठगों को देता है। ड्रायवर जब लौटकर आता है तो साइबर ठग इनसे 1000 रुपए में सिम खरीद लेते हैं। फिर इन्हीं सिम से वारदात करते हैं।

Q. सायबर ठगों वारदात को अंजाम कैसे देते हैं? A. इसके तीन प्रमुख तरीके हैं। पहला- ठगी के लिए ठग दिल्ली के कॉल सेंटर्स व ई-मित्र से लोगों के मोबाइल नंबर खरीदते हैं। फिर ड्रायवरों से खरीदी गई दूसरे राज्यों के सिमकार्ड से लोगों को कॉल करते हैं और इनाम या लॉटरी निकलने का झांसा देकर फंसाते हैं। इसके बाद एक लिंक भेजकर ओटीपी नंबर पूछने के बाद खाते से पैसे निकाल लेते हैं। दूसरा- फेसबुक पर महिला के नाम से आईडी बनाते हैं और पुरुषों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं। फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट होते ही मैसेंजर पर चैटिंग कर वाट्सएप नंबर शेयर करते हैं। फिर महिला वाट्सएप पर वीडियो कॉल कर न्यूड हो जाती है और पुरुष का वीडियो बनाकर ठग उसे पुरुष के मोबाइल पर शेयर करते हैं। इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर रकम एंठते रहते हैं। तीसरा- आर्मी जवान बनकर ओलेक्स पर गाड़ी व अन्य सामान बेचने का विज्ञापन पोस्ट करते हैं। लोग जब विज्ञापन पर दिए गए नंबर पर कॉल कर संपर्क करते हैं, तो ठग गाड़ी व अन्य सामान की डिलेवरी देने का झांसा देकर एक लिंक भेजते हैं और ओटीपी नंबर पूछकर उसके खाते से पैसे निकाल लेते हैं।

Q. ठगी गई राशि बैंक से निकाली कैसे जाती है? A. पुलिस जांच में सामने आया है कि कामां व नगर क्षेत्र में 3 प्राइवेट कंपनियों के 54 एटीएम लगे हैं। इन्हीं एटीएम मशीन से साइबर ठग ठगी की राशि निकालते हैं। पुलिस इन एटीएम मशीनों व कंपनी की भूमिका की भी जांच करने ती तैयारी में है।

Q. सायबर ठगी करने वाले कौन हैं?
A. अधिकतर साइबर ठगी करने वाले बदमाश पहले गाड़ियां चोरी करते थे। पर गाड़ी पकड़े जाने पर आरोपी आसानी से पकड़ लिया जाता था। इसलिए अब ये बदमाश साइबर ठगी करने लगे हैं। क्योंकि जिस नंबर से वे कॉल करते हैं, वह दूसरे राज्य का होता है। ऐसे में उस नंबर से साइबर ठगी करने के बाद उसे बंद कर देते हैं। ऐसे में आरोपी आसानी से पकड़ में नहीं आते हैं।
(जैसा भरतपुर एसपी श्याम सिंह ने भास्कर को बताया।)