आतंकवादी की टांग तोड़ने वाले IPS बनेंगे पुलिस के मुखिया:जयपुर बम ब्लास्ट की साजिश की थी नाकाम, 3 नवंबर को लेंगे चार्ज

जयपुर3 महीने पहले

राजस्थान के अगले डीजीपी के नाम पर गहलोत सरकार ने मुहर लगा दी है। सरकार पर संकट के दौरान डीजी इंटेलिजेंस रहे उमेश मिश्रा प्रदेश के 35वें डीजीपी होंगे। इस सिलसिले में राज्य सरकार ने गुरुवार रात साढ़े 11 बजे आदेश भी जारी कर दिए। मौजूदा डीजीपी एमएल लाठर 3 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। इसके बाद उमेश मिश्रा अपना कार्यभर संभालेंगे।

उमेश मिश्रा खुफिया सूचनाओं के माहिर माने जाते हैं। उन्होंने 6 साल तक आईबी में काम किया है। राजस्थान में एटीएस एडीजी रहते हुए उन्होंने एसओजी के साथ जॉइंट ऑपरेशन चलाकर करीब 2 दर्जन से ज्यादा लोगों को हनीट्रैप मामले में गिरफ्तार किया था।

वहीं आईबी में तैनाती के दौरान ऑपरेशन जुबैदा में जम्मू कश्मीर और नागालैंड से फर्जी आर्म्स लाइसेंस बनाकर देशभर में सप्लाई करने वाले 100 से ज्यादा आरोपियों को पकड़ा था। देशभर में इस मामले की चर्चा हुई थी।

उनकी टीम ने आतंकी संगठन सिमी से ताल्कुक रखने वाले एक आतंकी को शेखावाटी से गिरफ्तार कर जयपुर लाया गया था। इस आरोपी की टांगें तक तोड़ दी गई थीं। वहीं, उनके नेतृत्व में पुलिस की टीम ने 2018 में जयपुर बम ब्लास्ट की साजिश को नाकाम किया।

उनके नेतृत्व में पुलिस ने सीकर और जयपुर में इंडीयन मुजाहिदिन की स्लीपर सेल पकड़ी थीं। जो जयपुर में बम ब्लास्ट करना चाह रहे थे। आईबी ने रहते हुए उनकी टीम ने ऑपरेशन सरहद के तहत लम्बा अभियान चलाकर पाकिस्तानी महिला एजेंट के जाल में फंसने वाले जवानों को गिरफ्तार किया था। ये जवान गोपनीय जानकारियां पाकिस्तानी हैंडलर को देते थे। इस मामले में उन्होंने बड़े स्तर पर गिरफ्तारियां कीं।

पत्नी के साथ पूजा के दौरान उमेश मिश्रा। वे 3 नवंबर को पदभार ग्रहण करेंगे। फाइल फोटो
पत्नी के साथ पूजा के दौरान उमेश मिश्रा। वे 3 नवंबर को पदभार ग्रहण करेंगे। फाइल फोटो

1989 बैच के IPS अधिकारी उमेश मिश्रा को विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक मिल चुका हैं। मिश्रा ने राजस्थान पुलिस में सबसे पहले 1992 से 94 में एएसपी रामगंज के पद पर कार्य किया। इसके बाद वह चूरू, भरतपुर, पाली, कोटा सिटी में जिला पुलिस अधीक्षक(SP) के पद भी रहे। 1999 से 2005 तक दिल्ली में केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी में असिस्टेंट डायरेक्टर का चार्ज संभाला।

उन्होंने 2005 से 2007 तक डीआईजी एसीबी के पद पर काम किया। 2007 में आईजी एटीएस की जिम्मेदारी निभाई। इसी तरह मिश्रा 2009 में आईजी विजिलेंस के पद पर भी रहे। दोबारा आईजी बनने के बाद मिश्रा ने एसीबी जॉइन की।

साल 2011 और 12 में आईजी जोधपुर के पद पर भी काम कर चुके हैं। साल 2014 में एडीजी एटीएस के पद पर काम किया। वर्ष 2014-15 में मिश्रा को एडीजी एसडीआरएफ के पद पर भी लगाया गया। साल 2015-16 में मिश्रा को एडीजी सिविल राइट्स में लगाया गया। वर्ष 2016 से 19 तक मिश्रा एटीएस-एसओजी में एडीजी के पद पर रहे। 2019 से मिश्रा अब तक निरंतर एडीजी-डीजी इंटेलिजेंस के पद पर काम कर रहे हैं।

उमेश मिश्रा को बधाई देने घर पहुंचे रिश्तेदार और साथी अफसर।
उमेश मिश्रा को बधाई देने घर पहुंचे रिश्तेदार और साथी अफसर।

गहलोत सरकार बनने के बाद से ही इंटेलिजेंस की कमान
यूपी के कुशीनगर निवासी मिश्रा गहलोत सरकार बनने के बाद से इंटेलिजेंस की कमान संभाल रहे हैं। पहले एडीजी थे, फिर डीजी बने। 2020 के सियासी संकट के दौरान पूरा खुफिया तंत्र उन्होंने संभाला था। कई गोपनीय सूचनाएं पहुंचाईं। बताया जा रहा है कि इसके सहारे ही कांग्रेस संकट से उबर पाई। मिश्रा चूरू, भरतपुर, पाली व कोटा सिटी के एसपी, भरतपुर व जोधपुर में आईजी रहे। एसीबी, एटीएस-एसओजी, में सेवाएं दे चुके हैं। साल 1999 से 2005 तक डेप्यूटेशन पर भी थे।

पीके सिंह और सोनी पहले ही रेस से बाहर

  • पीके सिंह, सेंट्रल डेपुटेशन पर डीजी बीएसएफ हैं।
  • बीएल सोनी, डीजी अभी एसीबी हैं।
  • यूआर साहू, डीजी होमगार्ड हैं।
  • भूपेंद्र दक, डीजी जेल हैं। ये 1989 बैच के ही हैं।

घर पर फूटे पटाखे
मिश्रा को डीजी बनाने के आदेश जारी होने के बाद शुक्रवार सुबह उनके घर पर पटाखे फोड़े गए। वहीं उन्हें बधाई देने वालों की भीड़ भी जुटी। मिश्रा 3 नवंबर को डीजीपी का पद संभालेंगे।