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देव दर्शन यात्रा में वसुंधरा के तेवर:गहलोत सरकार को उखाड़ फेंकने की बात कहकर दिए फिर से राजस्थान में सक्रिय होने के संकेत

जयपुर10 महीने पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी
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राजे ने राजमाता विजयराजे सिंधिया को याद कर पार्टी में विरोधियों को मैसेज दिया है। - Dainik Bhaskar
राजे ने राजमाता विजयराजे सिंधिया को याद कर पार्टी में विरोधियों को मैसेज दिया है।
  • राजमाता विजयराजे सिंधिया को याद कर पार्टी में विरोधियों को मैसेज

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आज से दो दिन का देव दर्शन अभियान शुरू कर दिया है। राजस्थान यूपी बॉर्डर पर पूंछड़ी के लौठा में देव दर्शन अभियान की शुरुआत में समर्थकाें को संबोधित किया। वसुंधरा राजे ने आगे राजस्थान में सक्रिय होने के संकेत और पार्टी में विरोधी खेमे को भी मैसेज दे दिया है। राजे के दो बयानों की सियासी हलकों में जबर्दस्त चर्चा है।

पहला बयान- राजमाता विजयराजे सिंधिया के रग-रग में भाजपा और राष्ट्रभक्ति थी, मैं उन्हीं राजमाता विजयराजे सिंधिया की बेटी हूं। राजे ने इस बयान के जरिए पार्टी में अपने विरोधियों को उनके परिवार का जनसंघ से लेकर भाजपा की मजबूती में दिए योगदान को याद दिलाने से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके जरिए विरोधियों को यह जता दिया है कि भाजपा को मजबूत करने और राष्ट्रवाद की विचारधारा को पाेषित करने में उनके और उनके परिवार को भी योगदान कम नहीं है।

दूसरा बयान- मैं आज गिरिराज भगवान के सामने प्रार्थना करती हूं कि वह हमें ताकत दें। दो हिस्सों में बंटी हुई गहलोत सरकार को मिलकर उखाड़ने का काम हम काम करेंगे। राजे का यह बयान उनके राजस्थान की राजनीति में सक्रिय रहने के संकेत है। मतलब यह कि अब वे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी होने के बावजूद राजस्थान में लगातार सक्रिय रहेंगी। पिछले दिनों भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा था कि राजे की भूमिका राष्ट्रीय लेवल पर तय कर दी गई है। लेकिन राजे के आज के बयान से साफ है कि वे राजस्थान में ही मुख्यधारा की राजनीति करेंगी। आगे अब भाजपा में राजे और विरोधी खेमों के बीच वर्चस्व की लड़ाई होना तय माना जा रहा है।

देव दर्शन के जरिए राजे ने दिखाई ताकत

कल 8 मार्च को वसुंधरा राजे का जन्मदिन है, देव दर्शन को राजे का धार्मिक कार्यक्रम बताया जा रहा था लेकिन इसकी शुरुआत और स्वरूप पूरी तरह सियासी है। राजे के इस देव दर्शन को सियासी शक्ति प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है। पूंछड़ी के लौठा में समर्थकों को संबोधित करने के बाद राजे ने देव दर्शन शुरू कर दिया है। यूपी में जैतपुरा के गिरिराज मंदिर में दर्शन कर शुरुआत कर दी है। पूजा अर्चना के बाद समथर्कों सहित गोवर्धन की सप्तकोसी परिक्रमा का भी सियासी मैसेज है। राजे आज गोवर्धन के आदि बद्रीनाथ मंदिर में रात्रि विश्राम करेंगी। 8 मार्च को राजे सुबह आदि बद्री मंदिर की मंगला आरती सहित धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होंगी। दोपहर में रवाना होकर भरतपुर के केदारनाथ मंदिर पहुंचेंगी। जहां पूजा अर्चना करेंगी। केदारनाथ मंदिर में पूजा अर्चना के बाद राजे कल 3:30 बजे हेलिकॉप्टर से धौलपुर के लिए रवाना होंगी।

दो दिन में राजे से मिलने पहुंचने वाले नेताओं की संख्या से बनेगा सियासी नरेटिव

वसुंधरा राजे के देवदर्शन की शुरुआत में करीब 25 भाजपा विधायक और 5 सांसदों के अलावा राजे खेमे के 50 के करीब पूर्व विधायक जुटे हैं। राजे ने इन समर्थक विधायकों-सांसदों के साथ गोवर्धन परिक्रमा भी की है। राजे का यह कार्यक्रम भले ही धार्मिक हो लेकिन पहले ही दिन इसने सियासी रूप ले लिया है। वसुंधरा राजे के समर्थक भाजपा नेता और विधायक भी देव दर्शन अभियान में उनके साथ हैं। दो दिन के देव दर्शन में पहुंचने वाले नेताओं के चेहरों पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। आज और कल राजे से मिलने कितने नेता और विधायक पहुंचते हैं। इस पर भाजपा की अंदरूनी सियासत के नरेटिव पर असर होगा।

भाजपा के भीतर चल रही वर्चस्व की लड़ाई में भी इस दो दिन के आयोजन से बहुत कुछ तय होना है। वसुंधरा राजे कोई राजनीतिक सभा नहीं कर रही हैं लेकिन देव दर्शन के जरिए पार्टी नेतृत्व को सियासी ताकत जरूर दिखाने का प्रयास माना जा रहा है।

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