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पायलट समर्थक विधायक का सरकार पर हमला:वेदप्रकाश सोलंकी ने कहा- दलित मंत्रियों को किसी कमेटी में शामिल नहीं करना समाज का अपमान, क्या गहलोत सरकार की नजर में वे कम योग्य हैं?

जयपुर2 महीने पहले
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कांग्रेस विधायक वेदप्रकाश सोलंकी। - Dainik Bhaskar
कांग्रेस विधायक वेदप्रकाश सोलंकी।

सचिन पायलट समर्थक चाकूस विधायक वेदप्रकाश सोलंकी ने एक बार फिर दलित मंत्रियों के साथ भेदभाव का मुद्दा उठाकर सियासी चर्चाओं की शुरुआत कर दी है। सोलंकी ने सरकार की मंत्रिमंडलीय कमेटियों, सब कमेटियों और एंपावर्ड कमेटियों में दलित मंत्रियों की अनदेखी करने पर गहलोत सरकार पर हमला बोला है।

सोलंकी ने कहा कि राजस्थान सरकार ​की ओर से मंत्री टीकाराम जुली और भजनलाल जाटव को कमेटियों में शामिल नही करना आश्चर्य की बात है। यह दोनों काबिल मंत्रियों सहित पूरे दलित समाज का अपमान है। इन दोनों की योग्यता में कहां कमी रह गई, जो इस तरह उन्हें बाहर रखा गया।

सालेह मोहम्मद केवल एक कमेटी में ही क्यों?
सोलंकी ने कहा- अल्पसंख्यक वर्ग से आने वाले सालेह मोहम्म्द को एक ही कमेटी में लिया है। दलित और अल्पसंख्यक समाज कांग्रेस का परंपरागत रूप से मजबूत वोट बैंक है, इसके बावजूद दलित समाज से आने वाले मंत्रियों को महत्वपूर्ण समितियों में तवज्जों नही देना समझ से परे है। दलित मंत्रियों को एक तो पहले से विभाग अच्छे नहीं दिए, अब उन्हें किसी कमेटी में नहीं रखकर अपमान किया है। क्या दलित मं​त्रियों में योग्यता की कमी है या वे काम नहीं कर सकते?

पहली बार के विधायक से मंत्री बने सुभाष गर्ग को किस मापदंड के तहत नौ कमेटियों में लिया ?
वेद प्रकाश ने कहा, पहली बार विधायक बनकर मंत्री बने सुभाष गर्ग को नौ कमेटियों में शामिल किया है। सरकार बताए कि सुभाष गर्ग को किस पैरामीटर से नौ कमेटियों का सदस्य बनाया और दो दलित मंत्रियों को एक कमेटी में शामिल करने योग्य भी नहीं समझा। इससे दलित समाज में अच्छा मैसेज नहीं गया। इतने बड़े तबके के प्रतिनिधियों से इस तरह का बर्ताव ठीक नहीं है। सरकार को इस भेदभाव पर जवाब देना होगा, दलित समाज के वोटों से सरकार बनी है। इस तरह उनका अपमान और भेदभाव करेंगे तो... जनता आजकल सब समझती है।

कमेटियों के विवाद का मामला समझिए

सरकार में पिछले ढाई साल में अलग अलग मुद्दों पर मंत्रियों की दो दर्जन कमेटियां बन चुकी हैं। जिनमें कैबिनेट सब कमेटियां और एंपावर्ड कमेटियां हैं, जिनमें मंत्री अध्यक्ष और सदस्य हैं। इन दो दर्जन समितियों में दलित वर्ग से आने वाले मंत्री टीकाराम जूली और भजनलाल जाटव को किसी कमेटी में नहीं लिया है। वेदप्रकाश सोलंकी ने उसी पर सवाल उठाया है। हालांकि सरकार में एकमात्र महिला मंत्री ममता भूपेश भी दलित वर्ग से है, ममता भूपेश को पांच कमेटियों में लिया है।

विधानसभा के बजट सत्र से ही मोर्चा खोल रखा है सोलंकी ने

वेद प्रकाश इससे पहले भी दलित-अल्पसंख्यक मंत्रियों को कम महत्व के विभाग देने का मुद्दा उठा चुके हैं। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान रमेश मीणा के साथ वेद सोलंकी ने भी एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्याक विधायकों की आवाज दबाने के लिए उन्हें जानबूझकर बिना माइक वाली सीटें देने का आरोप लगाया था। वेदप्रकाश सोलंकी ने अप्रैल में दलित विधायकों को मंत्री बनाने और उन्हें महत्वपूर्ण विभाग देने की मांग उठाई थी।

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