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  • View Of Hallmark Jewellery VIDEO After 4 Hours Of Process In Jaipur, In 6 Steps How The Purity Of 22 Carat Gold Is Tested, These Five Marks Are Applied On The Real Gold

VIDEO... कैसे पहचानें खरा सोना, जानें A TO Z:जयपुर में 4 घंटे की प्रोसेस के बाद 6 चरणों में होती है 22 कैरेट गोल्ड की शुद्धता की परख, असली सोने पर लगाए जाते हैं ये 5 मार्क

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: विष्णु शर्मा
छह चरणों में समझिए किस तरह खरे सोने की होती है परख।

भारतीय मानक ब्यूरो ने 16 जून से देशभर में हॉलमार्किंग गोल्ड ज्वेलरी ही बेचना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि कोरोना और अन्य कारणों से देश के 256 जिलों में ही हॉलमार्किंग को अनिवार्य किया जाएगा। इनमें जयपुर, जोधपुर सहित राजस्थान के प्रमुख शहर शामिल हैं, जहां पर सिर्फ हॉलमार्किंग ज्वैलरी ही बिकेगी। हालांकि 40 लाख रुपए तक टर्नओवर वाले ज्वेलर को हॉलमार्क वाली ज्वेलरी बेचने से छूट रहेगी।

ज्वेलरी कारोबार के लिए दुनिया भर में पहचान रखने वाले गुलाबी नगर में हमारे संवाददाता ने करीब 4 घंटे की प्रोसेस के बाद यह समझा कि आखिर हॉलमार्क ज्वेलरी और नॉर्मल ज्वेलरी में क्या अंतर होता है? आखिर कैसे 22 कैरेट गोल्ड की शुद्धता को परखा जाता है। सामने आया कि कुल छह चरण है, जिनमें यह समझा जा सकता है। ये भी जाना कि कैसे गोल्ड ज्वेलरी पर हॉल मार्किंग की जाती है। जयपुर में चांदपोल बाजार स्थित लावट हॉलमार्किंग सेंटर पर पहुंचकर संचालक नवल किशोर सोनी से बातचीत की और जाना आखिर कैसे गोल्ड ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग की जाती है? देखिए भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट

पहला चरण: सबसे पहले ज्वेलर हॉलमार्किंग सेंटर पर अपनी गोल्ड ज्वेलरी लेकर आता है। वहां रिसेप्शन पर गोल्ड ज्वेलरी का इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर वजन किया जाता है। इसके बाद रिसेप्शन इंचार्ज इस ज्वेलरी को लेकर क्वालिटी मैनेजर के पास जाता है।

हॉलमार्किंग से पहले XRF मशीन में ज्वेलरी का कैरेट टेस्ट किया जाता है
हॉलमार्किंग से पहले XRF मशीन में ज्वेलरी का कैरेट टेस्ट किया जाता है

दूसरा चरण: XRF डिपार्टमेंट में मौजूद क्वालिटी मैनेजर इस ज्वेलरी को XRF (कैरेट मीटर) मशीन में रखते हैं। इसमें सोने की शुद्धता देखी जाती है। इस मशीन पर टेस्टिंग में भी जो ज्वेलरी 9.1.6. मतलब 22 कैरेट की पाई जाती है। उस गोल्ड को हॉल मार्क सेंटर प्रभारी अपने पास आगे की टेस्टिंग के लिए रख लेते हैं। यदि गोल्ड की शुद्धता 22 कैरेट से कम पाई जाती है तब उसको ज्वेलर को लौटा दिया जाता है।

तीसरा चरण: XRF मशीन में गोल्ड की शुद्धता जांचने के बाद जेवर को खरोंचा जाता है। इसके लिए गोल्ड ज्वेलरी को औजार से खरोंचकर 0.400 मिलीग्राम का सैंपल लिया जाता है। यह टेस्टिंग प्रोसेस गोल्ड ज्वेलरी में यह पता लगाने के लिए होता है कि उसमें तांबा, पीतल, चांदी या अन्य धातु की मिलावट तो नहीं की गई है। यहां मिलावट नहीं पाई जाती है तो इस गोल्ड को आगे जांच के लिए भेजा जाता है।

कैरेट टेस्ट के बाद ज्वेलरी को खरोंचकर देखा जाता है कि उसमें कोई अन्य धातु तो नहीं मिलाई गई है।
कैरेट टेस्ट के बाद ज्वेलरी को खरोंचकर देखा जाता है कि उसमें कोई अन्य धातु तो नहीं मिलाई गई है।

चौथा चरण: ज्वेलरी का खरोंचा गया सैंपल माइक्रो बैलेंस मशीन पर जाता है। फिर इसको गलाकर कटिंग की जाती है। यहां गोल्ड ज्वेलरी की खरोंचे गए हिस्से के एक मिलीग्राम में 10वें हिस्से को माइक्रो बैलेंस मशीन बताती है। इससे गलती होने की कोई गुंजाइश नहीं रहती है। यहां वजन होने के बाद आगे का प्रोसेस शुरू होता है।

इन भटि्टयों में गोल्ड के साथ सिल्वर और शीशा मिलाकर गर्म किया जाता है। इसके बाद शुद्ध गोल्ड तप कर निकलता है।
इन भटि्टयों में गोल्ड के साथ सिल्वर और शीशा मिलाकर गर्म किया जाता है। इसके बाद शुद्ध गोल्ड तप कर निकलता है।

पांचवां चरण: माइक्रो बैलेंस मशीन से गोल्ड के वजन के बाद इसमें चांदी और चार ग्राम लैड मिलाई जाती है। एक ग्राम गोल्ड में 2 ग्राम चांदी और 4 ग्राम शीशा मिलाया जाता है। इन तीनों को मिलाकर एक पात्र (कोपल) में रखा जाता है। नवल किशोर के मुताबिक गोल्ड के साथ शीशा इसलिए मिलाया जाता है, शीशा गोल्ड में मौजूद अवांछित अशुद्धि को खत्म कर देता है। इस तरह गोल्ड में चांदी व शीशा मिलाकर करीब 45 मिनट तक एक भट्‌टी में रखा जाता है। इसको 865 डिग्री तापमान पर रखकर भट्‌टी में गर्म करते हैं। इससे शीशा बिल्कुल खत्म हो जाता है।

650 डिग्री पर भट्‌टी में गर्म किया जाता है

अब इस पात्र में सिर्फ चांदी व गोल्ड रह जाता है। इसको नाइट्रिक एसिड में डाला जाता है। इसके बाद एक और भट्‌टी में करीब 150 डिग्री तापमान पर रखा जाता है। इसमें गोल्ड में मिली हुई चांदी भी गल जाती है। इस प्रक्रिया के बाद सिर्फ गोल्ड बच जाता है। इसको दोबारा 650 डिग्री पर भट्‌टी में गर्म करना पड़ता है। इस प्रक्रिया के पूरी होने पर सोने के बाहर निकालते हैं और उसे वापस माइक्रो बैलेंस मशीन पर वजन करते हैं।

करीब चार घंटे चली पूरी प्रक्रिया के बाद जो गोल्ड तपकर बाहर आता है। इसकी शुद्धता 9.1.6. मतलब 22 कैरेट का मिलान XRF में आई शुद्धता के बराबर होता है। तब वह गोल्ड शुद्ध मतलब 22 कैरेट माना जाता है। अगर शुद्धता का यह पैमाना समान नहीं होता तो वह गोल्ड ज्वैलर को लौटा दिया जाता है।

भटि्टयों में तपकर निकले गोल्ड को सबसे अंत में पांच मार्क लगाकर हॉल मार्किंग की जाती है
भटि्टयों में तपकर निकले गोल्ड को सबसे अंत में पांच मार्क लगाकर हॉल मार्किंग की जाती है

छठा चरण: गोल्ड की शुद्धता परखने की इस पूरी प्रक्रिया के बाद जो गोल्ड ज्वेलरी पास हो जाती है मतलब 22 कैरेट गोल्ड ज्वेलरी होना सामने आती है। उस ज्वेलरी को हॉलमॉर्किंग लैब में लाया जाता है। यहां ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग करने वाले सेंटर, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), 22 कैरेट, 916 और पांचवां ज्वेलर फर्म का LOGO (मार्का) अंकित किया जाता है।

जिस ज्वेलरी पर ये पांच मार्क स्टांप होते हैं, वही शुद्ध 22 कैरेट गोल्ड माना जाता है। हॉल मार्किंग सेंटर के संचालक नवल किशोर के मुताबिक गोल्ड की शुद्धता परखने और हॉलमार्किंग करने की यह पूरी प्रक्रिया करीब चार घंटे में पूरी होती है। इसी तरह से 18 और 24 कैरेट गोल्ड की शुद्धता मापने की प्रक्रिया होती है। आपको बता दें कि पूरे जयपुर में गोल्ड ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग करने वाली सिर्फ 13 लैब है।

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