ठगी के शिकार को टेलीकॉम कंपनी देगी 27 लाख रुपए:कंज्यूमर की सिम बंद कर दूसरे व्यक्ति को अलॉट कर दी, उसने 5 दिन में 68 लाख खाते से ऑनलाइन किए पार; कंपनी पर लगा 27 लाख का जुर्माना

जयपुर3 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।
  • आईटी एक्ट-2000 के तहत किसी टेलीकॉम कंपनी पर की गई कार्रवाई का राजस्थान में यह पहला केस

जयपुर के एक व्यक्ति से धोखाधड़ी का अनोखा मामला सामने आया है। मोबाइल की सिम बंद करने के नाम पर यह वारदात की गई। टेलीकॉम कंपनी पर आईटी विभाग ने 27.53 लाख का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना एक व्यक्ति को अलॉट नंबर को धोखे से बंद करने, फिर उसी नंबर को 5 दिन के लिए किसी दूसरे व्यक्ति को अलॉट करने के मामले में लगाया गया है। राजस्थान में किसी भी टेलीकॉम कंपनी पर इस नियम के तहत जुर्माना लगाने का यह पहला केस है। इसके ऑर्डर 2 दिन पहले ही जारी किए गए। शनिवार को मामला सामने आया।

कृष्णलाल नैन की सिम 25 मई 2017 को अचानक बंद हो गई। वो उस समय हनुमानगढ़ में थे। उन्होंने हनुमानगढ़ स्थित कंपनी के स्टोर में शिकायत की। वहां बताया गया कि सिम पुरानी हो गई है। नई लेनी पड़ेगी। उस समय स्टोर से नया सिम कार्ड भी जारी किया गया। नंबर एक्टिवेट नहीं किया गया। कृष्णलाल ने अगले दिन उसी स्टोर पर शिकायत की, फिर भी नंबर एक्टिवेट नहीं किया। इसके बाद 30 मई को आवेदक जयपुर पहुंचा। यहां अजमेर रोड स्थित कंपनी के स्टोर पर पहुंचकर नम्बर एक्टिवेट करने की गुजारिश की। 31 मई को सिम एक्टिवेट हो गई। अगले ही दिन आवेदक को पता चला कि उसके आईडीबीआई बैंक से इन 5 दिनों के अंदर 68.50 लाख रुपए दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर हो गए।

दूसरे व्यक्ति के नाम नंबर जारी कर दिया

बैंक से पैसे निकलने की रिपोर्ट पुलिस में करवाने के बाद जब जांच हुई तो पता चला कि कृष्णलाल के रजिस्टर्ड नंबर पर ओटीपी आने के बाद पैसे ट्रांसफर किए गए। जो नंबर 25 मई को बंद हो गया था, उसी दिन अलवर में किसी भानू प्रताप नाम की आईडी पर वही नंबर अलॉट करके एक्टिवेट भी कर दिया गया। इस नंबर पर आए बैंक ओटीपी से 6 अलग-अलग ट्रांजेक्शन किए गए। खाते से 68 लाख 50 हजार रुपए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए।

मई 2020 में दर्ज कराई शिकायत

जांच के दौरान पुलिस ने 44 लाख रिकवर भी कर लिए, लेकिन करीब 24 लाख रुपए बच गए। इसके खिलाफ कृष्णलाल ने मई 2020 में आईटी विभाग के प्रमुख से शिकायत की। उसने बताया कि कंपनी के कर्मचारियों ने मिलीभगत करके पहले सिम को बंद किया। उसके बाद 5 दिन के लिए अलवर के भानु प्रताप नाम के व्यक्ति की फर्जी आईडी से सिम को किसी दूसरे व्यक्ति के लिए चालू कर दिया। इस दौरान 5 दिन तक कंपनी के अधिकृत स्टोर पर संपर्क वह संपर्क करते रहे। फिर भी किसी ने नहीं बताया कि उनकी सिम अलवर के स्टोर पर चालू हो चुकी है। इसे देखते हुए आईटी विभाग के प्रमुख ने कंपनी को दोषी माना और परिवादी को 27.53 लाख रुपए जुर्माने के तौर पर चुकाने के आदेश दिए।

10 फीसदी ब्याज भी देगी कंपनी

आईटी विभाग के प्रमुख अधिकारी आलोक गुप्ता ने ऑर्डर में 10 फीसदी ब्याज के साथ जुर्माना राशि चुकाने के आदेश कंपनी को दिए हैं। इस पूरे मामले में टेलीकॉम कंपनी को दोषी माना है, जिसकी ओर से परिवादी के मोबाइल नंबर को किसी दूसरे व्यक्ति को अलॉट कर दिया गया था। इस अलॉटमेंट के बाद दूसरे व्यक्ति ने परिवादी के बैंक खाते से 68.50 लाख रुपए निकाल लिए। खास बात ये है कि धोखाधड़ी के दौरान गई राशि में से 44 लाख रुपए तो परिवादी को मिल गए, लेकिन शेष रकम को टेलीकॉम कंपनी को चुकाने के आदेश दिए हैं। साथ ही, आवेदन फीस और ब्याज की राशि भी देने के लिए कहा गया है।

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