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परीक्षा का ही इम्तिहान:ऑफलाइन परीक्षा की साजिश थी क्या? क्योंकि उसी कंपनी को फिर काम सौंपा, जिसकी लापरवाही से पहले परीक्षा रद्द हुई थी

जयपुर8 महीने पहले
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नेटवर्क काम न करने से पेपर लेट। - Dainik Bhaskar
नेटवर्क काम न करने से पेपर लेट।
  • 2000 मेडिकल अफसरों की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा तीन महीने में दूसरी बार रद्द; सिस्टम पर सवाल
  • आरयूएचएस को परीक्षा करानी थी, उसने एमएनआईटी को काम दे दिया और एमएनआईटी ने निजी कंपनी को

(संदीप शर्मा) कोरोनाकाल में जब डॉक्टरों की जल्द से जल्द भर्तियां होना बेहद जरूरी है...ऐसे में पिछले तीन महीने के अंदर दो हजार मेडिकल अफसरों की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा दो बार रद्द हो चुकी है। वजह- आरयूएचएस की लापरवाह कार्यप्रणाली। दरअसल, यह परीक्षा आरयूएचएस को करानी थी। मगर उसने यह काम एमएनआईटी को सौंप दिया।

एमएनआईटी ने परीक्षा कराने का जिम्मा एक निजी कंपनी को दे दिया। ये वही कंपनी है, जिसकी लापरवाही की वजह से पिछली भर्ती प्रक्रिया रद्द करनी पड़ी थी। तब इस पर कड़ी कार्रवाई और जुर्माना लगाना तो दूर, उसे ही दोबारा परीक्षा कराने का जिम्मा सौंप दिया गया। अब सरकार कह रही है कि अगले एक महीने में ऑफलाइन परीक्षा कराकर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सेंटर इंचार्ज का तर्क; सॉफ्टवेयर क्रैश हुआ
^एक सेंटर पर साॅफ्टवेयर क्रैश हुआ और दो जगह नेटवर्क काम न करने से पेपर लेट हो गया। तीनों सेंटर्स (आर्या, बियाणी, भवानी निकेतन कॉलेज) पर परीक्षा नहीं कराई जा सकी। कंपनी का नाम डिस्क्लोज नहीं कर सकते। अक्टूबर अंत तक ऑफलाइन परीक्षा करा देंगे।
- डॉ. संजय राजपाल, सेंटर इंचार्ज, एमएनआईटी

बड़ा सवाल...राजधानी में बार-बार कैसे गायब हो रहा नेटवर्क?

Q. आखिर राजधानी में नेटवर्क कैसे ठप हो सकता है?
परीक्षा रद्द करने के पीछे सरकार का तर्क है कि नेटवर्क ठप हो गया था। इससे कुछ सेंटरों पर परीक्षा नहीं हो सकी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर केवल तीन सेंटर्स पर नेटवर्क कैसे ठप हो सकता है? जबकि कंपनी को पहले से इसकी जानकारी थी कि यहां परीक्षा करानी है तो एक दिन पहले पूरी जांच और अन्य तकनीकी प्रक्रिया को पूरी तरह दुरुस्त क्यों नहीं किया गया?

Q. गड़बड़ी के बावजूद भी उसी कंपनी को फिर काम क्यों दिया?
सरकार ने कहा कि एमएनआईटी से परीक्षा कराई गई लेकिन हकीकत यह है कि एमएनआईटी ने उस कंपनी को काम सबलेट कर दिया, जो पहले भी विवादों में रह चुकी है और जिस पर नीट जैसी परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लग चुका है। हालांकि हर बार बिना किसी कार्रवाई के कंपनी को बचा लिया जाता है और हजारों अभ्यर्थियों के साथ खिलवाड़ किया जाना जारी है।

Q. जिसकी लापरवाही से परीक्षा रद्द, उस पर कार्रवाई क्यों नहीं?
पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी की संभावना है। इसके बावजूद सरकार ने ना तो कंपनी पर ना ही किन्हीं अधिकारियों पर इसकी जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की है। यदि सरकार दोषियों पर कार्रवाई नहीं करती है तो निश्चित रूप से मिलीभगत के आरोप और प्रबल होंगे। करीब तीन माह पहले भी इसी कंपनी ने यही भर्ती प्रक्रिया कराई थी और उस समय भी तकनीकी खामी सामने आई थी।

इधर...विपक्ष का वार

ऑफलाइन परीक्षा इसलिए करा रहे ताकि आसानी से अपने चहेतों काे मौका दिला सकें : राठौड़

^ मेडिकल अफसरों की ऑफलाइन परीक्षा इसलिए कर रहे हैं ताकि गड़बड़ी कर सकें। कोरोना के बहाने आरपीएससी में इंटरव्यू इसलिए नहीं कराए ताकि अपना अध्यक्ष नियुक्त कर मनमानी कर सकें।
-राजेंद्र राठौड़, उपनेता प्रतिपक्ष व पूर्व चिकित्सा मंत्री

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