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कोरोना संकट में सांसद कहां ?:केंद्र के सामने राजस्थान की प्रभावी पैरवी क्याें नहीं की, हेल्थ को स्टेट सब्जेक्ट बता जिम्मेदारी से बचने की काेशिश

जयपुर6 महीने पहलेलेखक: हर्ष खटाना
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राज्य में विकराल हाेते काेराेना के बीच ऑक्सीजन, दवा और वैक्सीन की भारी कमी शुरू हाे चुकी है। ऑक्सीजन की कमी से मरीजाें की माैत तक होना शुरू हाे चुकी है, लेकिन इस संकट की घड़ी में भी कांग्रेस-भाजपा के बीच सियासी वार पलटवार जारी है। एक दूसरे काे जिम्मेदार ठहराने की राजनीति चरम पर है। राज्य के 25 सांसदाें ने अपने इलाकाें के मरीजाें के जीवन काे बचाने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए क्या किया।

राज्य के मरीजाें काे समय पर ऑक्सीजन, दवा और वैक्सीन मिले। इसके लिए सांसदाें ने क्या प्रयास किया। पड़ताल में सामने आया कि राज्य के लिए चार-पांच सांसद ही पैरवी के लिए आगे आए, जबकि ज्यादातर सांसद राज्य की स्थिति से केंद्र काे अवगत करा पाने में नाकाम रहे।

प्रदेश के 4-5 सांसद ही कोरोना महामारी से लड़ने को दवा प्रबंध के लिए केंद्र सरकार के समक्ष अपने राज्य की पैरवी करने को आगे आए

गजेंद्र सिंह शेखावत : केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत काेराेनाकाल में भी पश्चिम बंगाल चुनावाें में गुजरा है। शेखावत ने इस बीच जाेधपुर में एकआध बैठक करके काेराेना पर फीडबैक लिया था, लेकिन उसका बड़ा फायदा जाेधपुर या प्रदेश में नहीं मिला।

कैलाश चाैधरी : केंद्रीय राज्य मंत्री कैलाश चाैधरी का भी अधिकांश समय बंगाल और उप चुनावाें में गुजरा है। मंत्री कैलाश चाैधरी भी बिगड़े हालाताें पर केंद्र काे एक भी चिट्ठी लिखकर जनता का काेई पक्ष या ऑक्सीजन आदि की जरुरत काे नहीं रख सके हैं।

अर्जुन मेघवाल : केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल कहते है कि हेल्थ एक स्टेट का सब्जेक्ट है, लेकिन सच यह है कि आज की तिथि में ऑक्सीजन से लेकर वैक्सीन तक की कमान केंद्र के पास ही है। केंद्र के अनुसार ही सारे राज्य काम कर रहे हैं। हालांकि उनका तर्क है कि केंद्रीय चिकित्सा मंत्री सीधे बात राज्य का पक्ष रखा है।

ओम बिड़ला : लाेकसभा स्पीकर और काेटा सांसद ओम बिड़ला राज्य काे मदद करने में सबसे आगे रहे। बिड़ला की ओर से केंद्र सरकार के सामने राज्य का लगातार पक्ष रखा गया, जिससे राज्य के मरीजाें काे लाभ मिल सके। दो दिन पहले राज्य सरकार के तीन मंत्री भी दिल्ली में उनसे मिलने आए थे।

सुभाषचंद बहेडिया : भीलवाड़ा सांसद सुभाषचंद बहेडिया ने कहा कि ऑक्सीजन व मेडिसन मामले में मैंने 19 अप्रैल काे ही पत्र लिखकर अपना पक्ष रख दिया है। इसके अलावा आमजन में जागरूकता अभियान चला रखा है।

कनकमल कटारा : बांसवाड़ा सांसद कनकमल कटारा ने केंद्र के सामने ऑक्सीजन का मुद्दा उठाया। पार्टी अध्यक्ष सामने भी अपनी बात रखी।

रामचरण बाेहरा : जयपुर शहर सांसद रामचरण बाेहरा ने केंद्र सरकार से राज्य की हालत काे लेकर काेई पत्र ताे नहीं लिखा, लेकिन वह कहते है कि अपनी बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से लेकर पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा तक पहुंचाई है।

भागीरथ चाैधरी: अजमेर सांसद भागीरथ चाैधरी कहते हैं कि ऑक्सीजन पर मेरी केंद्र में बात हुई है। मैंने कहा कि एमपी-हरियाणा में कमी नहीं आने दी जा रही ताे मेरे क्षेत्र में क्या व्यवस्था है। जवाब मिला कि परिवहन का प्राेसेस जारी है।

राहुल कस्वा : चूरू सांसद राहुल कस्वा ने केंद्र के सामने राज्य का पक्ष ताे नहीं रखा, लेकिन बिगड़ने की संभावनाओं काे देखते हुए भामाशाहाें से संपर्क में है। वह मदद करने के लिए तैयार खड़े है। खुद का फंड दाे कराेड कराेड़ रुपए और खर्च कर रहा हूं।

दीयाकुमारी : राजसमंद सांसद दीया कुमारी ने ऑक्सीजन से लेकर दवाईयाें के मुद्दे पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से बात की है। अपने क्षेत्र में क्या - क्या जरुरत है, वाे केंद्रीय मंत्री काे नाेट कराया। सप्लाई में काेई कमी नहीं रहेगी। क्षेत्र में हमारी टीम जुटी हुई है। वैसे भी हेल्थ स्टेट सब्जेक्ट है।

हनुमान बेनीवाल : नागाैर सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्र के सामने साेशल मीडिया पर अपनी बात रखी। राज्य काे मदद करने की अपील की।

गहलाेत सरकार की गलतियों की सजा जनता क्यों भुगते: राज्यवर्धन
भाजपा के के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जयपुर ग्रामीण सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि केंद्र ने किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया है। महाराष्ट्र में हमारी सरकार नहीं है फिर भी वहां पर सबसे ज्यादा ऑक्सीजन और दवा सप्लाई की है। ये भाजपा शासित राज्याें की तुलना में दाे से चार गुना तक अधिक है।

राज्य काे लेकर हमारे सांसद लगातार अपनी बात स्वास्थ्य मंत्रालय, संबंधित मंत्री या अधिकारियाें के समक्ष रख रहे हैं। जनवरी में श्रीगंगानगर में काेराेना का नया स्टेन आते ही हमने अलर्ट किया था ताे क्याें नहीं हुए। उधर पूर्णरूप से लाॅकडाउन की जरुरत है ताे उस पर भी सही प्लान नहीं किया।

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