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मेवा-फल; पश्चिम का कल:क्या भया; जैसे पेड़ खजूर, फल लागे अति दूर ये हुआ; 7-8 फीट पर लड़ियों में लटकाया मेवा

जयपुर8 महीने पहले
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7-8 फीट पर खजूर के गुच्छे लूम्ब रहे हैं। - Dainik Bhaskar
7-8 फीट पर खजूर के गुच्छे लूम्ब रहे हैं।

राजस्थान में चारों तरफ रेगिस्तान या डांग ढूंढ़ाड़ ही नजर आता है। मैदानों पर भी इसी पारिस्थितिकी का प्रभाव रहा है। प्राकृतिक बाध्यताओं के बावजूद यहां के कृषि वैज्ञानिकों और किसानों ने वो कर दिखाया है, जो पहले सोचना भी असंभव माना गया। अब केसर, खजूर, नारियल... सब उपजा रही है मरूधरा।

जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर के कृषि अनुंसधान वैज्ञानिकों और किसानों ने अनार उत्पादन कर कृषि क्रांति के लिए राजस्थान को दुनिया में अलग पहचान दी है। सरसों, बाजरा, बेर, ढांसरा वाले खेतों-मेढ़ों पर संतरा, अंजीर, खीरा, नींबू, टमाटर की राजस्थान में बंपर पैदावार होने लगी है।

खजूर, अनार की लकदक उपज देखकर किसान बहुत उत्साहित हैं। अकेले बाड़मेर में 7500 हेक्टेयर में 135 करोड़ का अनार हो रहा है। 120 हेक्टेयर में खजूर पैदाकर यहां के किसानों ने धोरों से 16 करोड़ रुपए उगा लिए हैं।

राजस्थान के किसानों ने प्रचलित कहावत बदली
लीजिए खजूर... खड़े-खड़े तोड़िए
सामान्य-सी दिखने वाली यह तस्वीर बाड़मेर की है। यहां का सिंदूरी अनार 10 साल के प्रयासों, प्रयोगों और परिश्रम का प्रतिफल है। यह तस्वीर उस स्थापित कहावत को साफ झुठलाती है- बड़ा भया तो क्या भया जैसे पेड़ खजूर...पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर...। यहां 7-8 फीट पर खजूर के गुच्छे लूम्ब रहे हैं। गुच्छे ऐसे कि उनकी छाया भी भरपूर...। पूरे देश सहित नेपाल-भूटान में मांग है, लोकल भी जबरदस्त डिमांड है।

2010 में शुरू हुई सिंदूरी अनार की खेती में राष्ट्रीय उत्पादकता के हम बहुत करीब
अनार उत्पादन में बाड़मेर प्रदेश में पहले पायदान नंबर पर है। यहां 7500 हेक्टेयर में अनार हो रहा है। बाड़मेर में कम आर्द्रता के कारण अनार में बीमारियां कम फैल रही हैं। इसी वजह से अनार की साइज, क्वालिटी और स्वाद अनोखा है। जयपुर, सीकर, पाली, गंगानगर, हनुमानगढ़, झालावाड़, बाड़मेर, टोंक व झुंझनू ने 2010-11 में 500 हैक्टर में अनार की खेती शुरू की थी। राजस्थान में 0.8 हजार हैक्टेयर के साथ उत्पादन 5.5 लाख टन और उत्पादकता 6.4 टन/हैक्टर है, जो राष्ट्रीय उत्पादकता 6.6 टन/हैक्टर के करीब है।

किन्नू के किंग, खीरे में भी हीरा हैं हम
जयपुर, बस्सी, झाझड़ा, गुढ़ा कुमावतां, बसेड़ी में 500 से ज्यादा किसान पॉली हाउस लगा साल में दो बार खीरा ले रहे हैं। गंगानगर के किन्नू का स्वाद देश-विदेश तक पहुंच रहा है। यहां साढ़े छह हजार किसान करीब 11 हजार हेक्टेयर में किन्नू पैदा कर रहे हैं।

जो है उसे भी बढ़ाया

  • अंजीर-बेर-नींबू की खेती भी बढ़ी

अंजीर: 2-3 साल में रुझान बढ़ा है। बाड़मेर, चौहटन, बालोतरा, गुड़ामालानी, धनाऊ इलाके में अंजीर खूब है। पश्चिम राज्य में ये खेती बहुत प्रचलित हो गई है।

बेर: परंपरागत बेर में प्रयोग जारी हैं। सेव व गोला किस्म की बेर से हर साल 450 मैट्रिक टन उत्पादन हो रहा है। एक पौधे से 20 किलो बैर उत्पादन होता है।

नींबू: कागजी नींबू की बुआई खूब है। 1 पौधे पर 20 किलो नींबू आते हैं, एक हेक्टेयर में 300 पौधे लगते हैं। इनसे हर साल 600 मैट्रिक टन नींबू मिल रहा है। ये नींबू 40 से 80 रुपए किलो में बिक रहा है।

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