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जयपुर:राशन में तो गेहूं मिला पर पिसाने को भटक रहे लोग, फ्लोर मिलें बन्द

जयपुरएक वर्ष पहले
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  • राशन कार्ड धारकों की मांग है कि उन्हें गेंहूं की जगह आटा ही उपलब्ध कराया जाए ताकि सहूलियत मिल सके
  • फिलहार विभाग के अफसरों का कहना है कि इस बारे मे कोई भी फैसला सरकार के स्तर पर ही किया जाना है

(शिव प्रकाश शर्मा). राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में जुड़े लोगों को अप्रैल में 5 किलो अतिरिक्त गेहूं मिलेगा। यह अनाज केंद्र सरकार की ओर से बांटा जाएगा जो 15 अप्रैल से बांटना शुरू होगा। शहर के कर्फ्यूग्रस्त खाद्य सुरक्षा में जुड़े लोगों का कहना है कि गली मोहल्लों की फ्लोर मिले बंद हैं। गेहूं बांटने के बजाय यह अनाज बड़ी फ्लोर मिलों को दे दिया जाए और वहां से आटा खरीद लिया जाए। आटा सीधा पहुंचेगा तो लोगों को नहीं पड़ेगा। जयपुर में अन्नपूर्णा के 215, अंत्योदय के 14613, बीपीएल के 92205 , स्टेट बीपीएल के 29 627 राशन कार्ड धारक हैं।

इनमें 7 लाख लोग खाद्य सुरक्षा से जुड़े हुए हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों को और जोड़ लिया जाए तो यह आंकड़ा लगभग 40 लाख लोगों का बैठता है। इस बारे में ग्रस्त क्षेत्र गंगापोल निवासी अंजू, घाटगेट निवासी सायरा, माजिद, मंडी का खटीकान निवासी संतरा का कहना है कि जो लोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में नहीं जुड़े उन गरीब परिवारों को सूखी राहत सामग्री में प्रति व्यक्ति 5 किलो आटा दिया जा रहा है। उन्हें सीधी रोटी बनानी होती है जो राशन का गेहूं लेकर आए हैं वे पिसाने लिए भटक रहे हैं। सबसे अधिक समस्या कर्फ्यू ग्रस्त जयपुर शहर के सामने सात थाना क्षेत्रों में हो रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर गेहूं पिसवाने के लिए कहां जाएं। ऐसे में राशन कार्ड धारकों की मांग है कि उन्हें गेंहूं की जगह आटा ही उपलब्ध कराया जाए ताकि सहूलियत मिल सके। फिलहार विभाग के अफसरों का कहना है कि इस बारे मे कोई भी फैसला सरकार के स्तर पर ही किया जाना है। 

सरकार आटा वितरित करवाए : सराफ
पूर्व मंत्री व विधायक कालीचरण सराफ का कहना है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के उपभोक्ताओं को गेहूं वितरित किया जा रहा है लेकिन लॉक डाउन में गेहूं पिसवाने में लोगों को परेशानी हो रही है। सराफ ने कहा परकोटे में कर्फ्यू के कारण लोगों को बहुत परेशानी आ रही है। इसलिए सभी राशन की दुकानों पर गेहूं की जगह आटा वितरित किया जाना चाहिए। 
सरकार ही फैसला ले सकती है : डीएसओ 
डीएसओ कनिष्क सैनी का कहना है कि इस बारे में सरकार ही निर्णय ले सकती है। गेहूं  खाद्यान्न सुरक्षा में जुड़े लोगों को समय पर पहुंचाया जा रहा है। शहर में डीएसओ इंस्पेक्टरों के नेतृत्व में आठ टीमें मॉनिटर कर रही है।

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