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  • When The Father Of 96 Years Got Infected, I Also Got Corona; Never Went To The Hospital In Life But Had To Stay In ICU For 23 Days, There Was So Much Strength In The Thread Of Mannat I Returned Home

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:पिता संक्रमित हुए तो मुझे भी कोरोना हो गया; कभी अस्पताल नहीं गईं पर आईसीयू में रहना पड़ा, मन्नत के धागों में ताकत इतनी थी कि मैं घर लौट आई

जयपुर6 महीने पहले
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  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां, पढ़िए आज डाॅ. गीता पारीक की कहानी।

मैं जिंदगी में कभी अस्पताल में भर्ती नहीं हुई। 64 साल की उम्र में जब काेराेना हुआ ताे पहली बार मेरा भर्ती टिकट बना और वो भी सीधे आईसीयू के लिए। शरीर पर चाराें तरफ मशीनाें के तार लगे थे और मुंह में एनआईवी, जिससे ऑक्सीजन दी जा रही थी। इसके बाद भी ऑक्सीजन का स्तर 82-85 तक ही था। इससे दांतों का दर्द बर्दाश्त से बाहर हो रहा था। सीटी स्कोर भी 16 था। एक तकलीफ और भी थी कि मेरे 96 साल के पिता सत्यनारायण व्यास भी कोरोना पॉजिटिव थे और उनका इलाज घर पर ही चल रहा था। ऑक्सीजन से उन्हें सांसें दी जा रही थी।

दोनों की जिंदगी और काेराेना के बीच जंग जारी थी। मेरी सकुशलता के लिए आठ साल का दाेहिता अमेरिका से वीडियाे काॅल कर मेरी सकुशलता के लिए हनुमान चालीसा पढ़ता था। परिवार के मन्नत के धागाें और आत्मविश्वास, संकल्प के साथ सकारात्मक साेच ने काेराेना जैसी बीमारी काे हरा दिया। 23 दिन तक आईसीयू में रही और इसके बाद 35 दिन तक ऑक्सीजन पर रही। मैं हमेशा गाती रही हूं- ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता...मन का विश्वास कमजाेर हाे ना’ बस इसी आत्मविश्वास ने मुझे और मेरे पिता को नया जीवन दिया है।

मैं जिला उपभोक्ता मंच की सदस्य रह चुकी हूं। 25 नवंबर 2020 की बात है। पापा काेराेना पाॅजिटिव आए ताे हम सब क्वारेंटाइन हाे गए। चार दिसंबर काे जब मुझे भी काेराेना के लक्षण आए ताे जांच कराई। रिपाेर्ट पाॅजिटिव आई। हालत बिगड़ी तो छह दिसंबर को मेरे बेटे विभाेर, जाे मेदांता में डाॅक्टर है, ने जयपुर एंबुलेंस भेजी और सीधे आईसीयू में एडमिट कराया। तीन जनवरी तक मैं अस्पताल के आईसीयू में ही रही।

ये दिन मेरे परिवार के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं था। अस्पताल में हर दिन किसी न किसी की माैत हाे रही थी। मैं बहुत डिप्रेशन में थी, लेकिन मेरी सकारात्मक साेच और परिवार के सदस्याें के मन्नत के धागाें ने कारेाना काे हरा दिया। भर्ती रहने के दाैरान मेरा ऑाक्सीजन लेवल न्यूनतम से भी काफी कम चला गया। मेरे बहू, बेटे और अमेरिका से बेटी-दामाद वीडियाे काॅल कर करते थे कि मां आप बहुत स्ट्रांग हाे। आखिर मैंने काेरेाना काे हराया और 3 जनवरी काे अस्पताल से डिस्चार्ज हाेकर जयपुर लाैटी। मेरे लिए यह नया जीवन था। इसके 35 दिन तक मैं ऑक्सीजन पर रही। मुझे गाने का शाैक है। अब मेरे फेफड़े वापस इतने मजबूत हाे गए हैं कि मैं उसी लय और ताल से वापस गाने लगी हूूं। - जैसा राजेंद्र गौतम को बताया।

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