प्रदेश का पहला स्टेशन:जहां एक दिशा में सभी ट्रेनों का ठहराव, लेकिन दूसरी में एक का भी नहीं, जयपुर मंडल का पहला स्टेशन जहां ट्रेन कंप्यूटर कंट्रोल करेगा

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: शिवांग चतुर्वेदी
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प्लेटफाॅर्म पर आए बिना सीधे निकल सकेंगे स्टेशन से बाहर, यह मामला जयपुर के उपनगरीय स्टेशन जगतपुरा का है। - Dainik Bhaskar
प्लेटफाॅर्म पर आए बिना सीधे निकल सकेंगे स्टेशन से बाहर, यह मामला जयपुर के उपनगरीय स्टेशन जगतपुरा का है।

शायद ये राजस्थान में रेलवे का पहला और बड़ा रोचक मामला होगा, जहां एक स्टेशन ऐसा जिस पर डाउन लाइन पर सभी ट्रेन रुकती हैं, लेकिन अप लाइन पर एक भी नहीं। दरअसल यह मामला जयपुर के उपनगरीय स्टेशन जगतपुरा का है। जहां जयपुर की ओर अप लाइन पर एक भी ट्रेन नहीं रुकती। जबकि उसी स्टेशन पर दिल्ली की तरफ जाने वाली सभी ट्रेनें रुकती हैं। पहले इसकी वजह स्टेशन रिमॉडलिंग और इलेक्ट्रिफिकेशन नहीं होना था।

लेकिन करीब डेढ़ महीने पहले ये कार्य पूरा होने के बाद भी अब सांसद से इसका फीता कटवाने के कारण यहां ट्रेनें नहीं रुक पा रही हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या यात्री सुविधाओं को इसलिए शुरू नहीं किया जा रहा, क्योंकि सिर्फ वहां माननीय (सांसद) के नाम लिखी उद्घाटन पट्टी का फीता कटवाना है ? जबकि ना तो जनप्रतिनिधि द्वारा इसके विकास की कोई मांग की गई थी। वहीं इस पूरे विकास कार्य को रेलवे ने अपने कोष से पूरा करवाया है।

पहले दबाव: यात्री सुविधा का मामला है जल्दी करो, अब फीता कटवाने का इंतजार

दरअसल पहले जगतपुरा स्टेशन पर तीन लाइन थीं। जिसमें से तीन नंबर लाइन (लूप/प्लेटफॉर्म वाली लाइन) पर दिल्ली जाने वाली ट्रेनों को लिया जाता था। वहीं दो मेन लाइन पर जयपुर, अजमेर की ओर जाने वाली ट्रेनों को लिया जाता था। क्योंकि इन दोनों लाइनों पर हाई लेवल प्लेटफॉर्म नहीं था। इसलिए यात्रियों को यहां उतरने में काफी दिक्कत आती थी। कई बार तो ये हादसे की बड़ी वजह भी थी।

ऐसे में रेलवे ने स्टेशन को रिमॉडलिंग की योजना बनाई और यहां एक लूप लाइन डाली और प्लेटफॉर्म का निर्माण किया। जिसके बाद अब यहां दो मेन, एक (प्लेटफॉर्म-4) और एक (प्लेटफॉर्म-1) लूप लाइन यानि कुल चार लाइन हो गई। वहीं हाई लेवल प्लेटफॉर्म भी बना दिया गया। पहले तो रेलवे निर्माण और सिग्नल विभाग पर इसे यात्री सुविधा के चलते जल्दी पूरा करने के लिए दबाव बना रहा था।

लेकिन करीब डेढ़ महीने पहले जब इसे पूरा कर लिया गया, तो रेलवे इसे सांसद की पट्टी का फीता कटवाने के लिए शुरू नहीं कर रहा। जबकि रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि ना तो इसे लेकर कोई जनप्रतिनिधि द्वारा मांग की गई थी और ना ही इसके लिए उनके द्वारा कोई आर्थिक सहयोग दिया गया।

इसे रेलवे ने ही योजना बनाकर स्वयं के कोष से तैयार किया है। ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या जनता की सुविधा को सिर्फ इसलिए शुरू नहीं किया जाएगा, क्योंकि वहां के जनप्रतिनिधि को फीता काटने का समय नहीं है?

पॉइंट फेल, तो भी ट्रेन का संचालन बाधित नहीं होगा
रेलवे ने करीब 20 करोड़ की लागत से स्टेशन भवन और सर्कुलेटिंग एरिया का निर्माण किया है। वहीं यह देश के उन चुनिंदा स्टेशनों में भी शुमार है, जहां ट्रेनों को मैनुअल की बजाय कंप्यूटर से कंट्रोल किया जाएगा। जयपुर मंडल के पहले अत्याधुनिक तकनीक से लैस इस स्टेशन पर ट्रेनों का ऑपरेशन कंप्यूटर से किया जाएगा। जिसके चलते प्वाइंट फेल होने जैसी स्थिती में ट्रेन संचालन बाधित नहीं होगा। वहीं ट्रेनों का आवागमन (रिसेप्शन/डिस्पैच) भी सरल हो जाएगा।

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