हाईकोर्ट का सवाल‌:जब कर चोरी ही नहीं की थी तो 60 करोड़ रुपए क्यों जमा कराए

जयपुरएक महीने पहले
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जीएसटी चाेरी के आरोपी कंपनी निदेशक की जमानत अर्जी खारिज। - Dainik Bhaskar
जीएसटी चाेरी के आरोपी कंपनी निदेशक की जमानत अर्जी खारिज।

हाईकोर्ट ने करीब 869 करोड रुपए की जीएसटी चोरी के मामले में मिराज प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विनयकांत आमेटा की जमानत अर्जी मंगलवार को खारिज कर दी। जस्टिस एनएस ढड्‌ढा ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि मामला आर्थिक अपराध का है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरा है।

अदालत ने कहा कि मामले में प्रार्थी की ओर से कहा है कि उसने प्रोटेस्ट के तौर पर 60 करोड़ रुपए जमा करा दिए थे तो ऐसे में कोर्ट की राय है कि जब उसने कर की चोरी ही नहीं की तो फिर 60 करोड़ रुपए प्रोटेस्ट के तौर पर क्यों जमा कराए। गौरतलब है कि पिछले दिनों ही अदालत ने दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद फैसला बाद में देना तय किया था।

आरोपी ने जमानत अर्जी में कहा था कि विभाग ने फैक्ट्री में उत्पाद के खाली पडे रैपर के आधार पर जीएसटी की गणना कर 869 करोड रुपए की कर चोरी बताई। जबकि कर की गणना उत्पाद के बिक्री होने के बाद होनी चाहिए थी। वह तो प्रार्थी कंपनी में वेतनभोगी कर्मचारी है और कर चोरी से उसे कोई फायदा नहीं होने वाला था, इसलिए उसे जमानत दी जाए।

इसके विरोध में डीजीजीआई के अधिवक्ता किंशुक जैन ने कहा कि विभाग ने आरोपी को बडी कर चोरी करते पकड़ा है। मौजूद साक्ष्यों से भी साबित है कि उसने करोडों रुपए की जीएसटी चोरी की है। इसलिए आरोपी को जमानत पर रिहा नहीं कर सकते। अदालत ने विभाग की दलीलों से सहमत होकर आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। दरअसल कर चोरी के मामले में डीजीजीआई ने 24 अक्टूबर को आरोपी आमेटा को गिरफ्तार किया था और तब से वह जेल में ही है।

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