राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा:ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन की सप्लाई में भेदभाव क्यों, केन्द्र व राज्य सरकार से मांगा जवाब

जयपुर6 महीने पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।

हाईकोर्ट ने केन्द्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि कोरोना के अधिक मरीज होने के बावजूद केन्द्र सरकार की ओर से प्रदेश को ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति कम क्यों की गई है। सीजे इन्द्रजीत महांति व जस्टिस इन्द्रजीत सिंह की खंडपीठ ने यह निर्देश अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी की याचिका पर बुधवार को दिया। साथ ही अदालत ने मामले को हाईकोर्ट में इसी मुद्दे पर बार एसोसिएशन की लंबित याचिकाओं के साथ सूचीबद्द करने के लिए कहा है।

याचिका में कहा कि केन्द्र सरकार इंजेक्शन और मेडिकल ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर प्रदेश के साथ भेदभाव कर रही है। केन्द्र सरकार ने गुजरात को 1 लाख 63 हजार पांच सौ रेमडेसिविर इंजेक्शन का आवंटन किया है। जबकि वहां 84 हजार 126 मरीज हैं। दूसरी ओर प्रदेश में एक लाख से अधिक मरीज होने के बावजूद राजस्थान को सिर्फ 26 हजार पांच सौ इंजेक्शन आवंटित किए हैं। गुजरात को 970 मैट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन आवंटित की है जबकि राजस्थान में सिर्फ 80 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही भेजी है।

वहीं मध्यप्रदेश सहित कई अन्य राज्यों में भी मरीज कम होने के बावजूद इंजेक्शन और ऑक्सीजन प्रदेश के मुकाबले अधिक दिए हैं। इसलिए अदालत मामले में दखल देकर बीमारों की संख्या के आधार पर ऑक्सीजन एवं जीवन रक्षक दवाइयों का आवंटन करने का निर्देश दे। वहीं हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष भुवनेश शर्मा ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि कोविड मरीजों के इलाज में राज्य सरकार फेल हो रही है। अस्पतालों में न तो बैड्स खाली हैं और न ही ऑक्सीजन की पर्याप्त सप्लाई है। इसलिए प्रदेश में कोविड मरीजों का उचित इलाज किया जाए।

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