कलेक्टर के चाल-चरित्र की फिर से शिकायत:सरकार के रणनीतिकार के क्यों गले पड़ी महिला विधायक, UP की पुलिस से क्यों डर गए नेताजी?

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी
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सरकार में विधायकों का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। पिछले दिनों इसका एक नजारा सत्ताधारी पार्टी के मुख्यालय में देखने को मिला। सरकार के एक सौम्य छवि वाले रणनीतिकार संगठन के मुखिया को बधाई देने पार्टी दफ्तर गए थे। रणनीतिकार की चलते-चलते एक महिला विधायक की मुलाकात हुई। महिला विधायक ने मिलते ही रणनीतिकार को बताए हुए कामों की परफॉर्मेंस ऑडिट शुरू कर दी। महिला विधायक ने इतने जोर से रणनीतिकार की क्लास लगाई कि देखने वाला हर नेता दंग रह गया। तभी किसी ने कहा, समय बड़ा बलवान है, अन्यथा यही रणनीतिकार विधायक को इंतजार करवा सकता है।

कलेक्टर के चाल-चरित्र की फिर से शिकायत
राजस्थान में एक कलेक्टर के चाल चरित्र से जुड़ी शिकायत प्रशासनिक हलकों में जबर्दस्त चर्चा का विषय बनी हुई है। ब्यूरोक्रेसी के मुखिया तक पहले भी शिकायत पहुंची थी, उस समय मामला दबा दिया गया। हाल ही में एक व्हिसल ब्लोअर ने कलेक्टर के चाल चरित्र के चक्कर में सरकारी नियमों के उल्लंघन की शिकायत बड़े लेवल पर कर दी है। अब ब्यूरोक्रेसी के टॉप, मिडल लेवल से लेकर कर्मचारियों तक को पता लग गया है कि कलेक्टर साहब ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट तक से फोटो भी डिलीट कर दिए हैं। सफाई भी दी, लेकिन बात बनी नहीं। अब आगे एक्शन का इंतजार है।

इस राज में शादी क्यों नहीं हो रही?

पूर्वी राजस्थान के एक जिले के क्षत्रप हाल ही महीनों बाद पुरानी रंगत में लौटे हैं। सत्ताधारी पार्टी की सभा में क्षत्रप के बोले बोल चर्चा में हैं। संगठन के मुखिया की मौजूदगी में क्षत्रप ने सरकार के कामकाज की पोल खोलनी शुरू कर दी है। यहां तक कह दिया कि वोट देकर जनता को क्या मिला? विकास में पिछड़ने से यहां के लड़कों की शादियां नहीं हो रही है। क्षेत्रीय क्षत्रप के तेवर देख मौके पर कोई कुछ नहीं बोल पाया लेकिन बाद में एक नेताजी ने सुझाव दिया कि स्थानीय नेता क्यों न मिलकर एक मैरिज ब्यूरो ही खोल लें।

आईजी और तीन एसपी के बीच घमासान में कोई तो जाएगा
एक रेंज आईजी और तीन एसपी के बीच मचे घमासान ने सरकार के कान खड़े कर दिए। टकराव यहां तक बढ़ गया है कि कामकाज पर असर पड़ने लगा है। तीनों एसपी का काम रेंज आईजी को किसी एंगल से ठीक नहीं लगता। आईजी ने तीनों एसपी की शिकायत नमक मिर्च लगाकर डीजीपी से कर दी। टॉप लेवल से फटकार पड़ी। वाया डीजीपी फटकार की फ्रिक्वेंसी अब बढ़ने लगी है। पिछले दिनों सुबह एक इंस्पेक्टर को एसपी ने सम्मानित किया, शाम को आईजी ने उसे सस्पेंड कर दिया। जब टकराव इस लेवल पर बढ़ जाए तो बदलाव ही एकमात्र चारा है। अब आईपीएस की अगली तबादला सूची में आईजी और तीन एसपी में से कोई न कोई तो बाहर जाएगा, यह तय है।

युवा और अनुभव के नए गठबंधन से सत्ता खेमे के कान खड़े

सत्ताधारी पार्टी में खींचतान के बीच बने एक नए गठबंधन की तरफ कम ही लोगों का ध्यान गया। यह गठबंधन विधानसभा सत्र के बाद ही बना है। अचानक शाम को सत्ताविरोधी खेमे के अगुवा नेता ने मुलाकात की। यह मुलाकात अचानक नहीं थी, इसकी तैयारी हुई थी, मुलाकात में गिले शिकवे दूर हुए। इस मुलाकात के कुछ ही दिन बाद जयपुर में लुटियंस जोन के नामी पत्रकार की किताब के विमोचन के लिए प्रोफेसर साहब को न्योता दिया गया। प्रोफेसर साहब ने युवा नेता को बुलाने का भी सुझाव दिया, सुझाव को माना गया। दोनों नेताओं ने मंच शेयर किया, खूब बातें हुईंं। किताब विमोचन के बाद दोनों नेताओं ने लंबी गपशप की। अब तक दूर-दूर रहे इन दो नेताओं की नजदीकी ने सत्ता खेमे के कान खड़े कर दिए हैं। कुछ तो नए सियासी समीकरण बन रहे हैं।

झूठ बोलने का दुख

बीजेपी में वल्लभनगर और धरियावद के टिकटों ने इस बार सबको चौंकाया। खरी-खरी और कुछ भी कह देने के लिए मशहूर मेवाड़ के नेताजी शुरू से ही हमलावर रुख में थे। दुर्वासा के अवतार में रहने वाले नेताजी ने अपने विरोधी की एंट्री नहीं होने दी, लेकिन अपने समर्थक को भी टिकट नहीं दिलवा पाए। टिकटों की घोषणा के बाद नेताजी ने मीडियाकर्मियों से ही कह दिया- मुझसे कितना झूठ बुलवाएंगे। इसका मतलब एकता की बातें गलत थीं।

विवाद की बला मीडिया के सिर

सरकार के मुखिया की सनातन शिकायत रहती है कि विकास के मुद्दों को मीडिया में तरजीह नहीं मिलती। गांधी जयंती के दिन सरकार ने शहर और गांवों में अभियान की लॉन्चिंग की। लंबे समय बाद बड़े घर में मीडिया को बुलाया गया। यहां चर्चा सरकार के अभियानों से ज्यादा सियासत की हो गई। सरकार के मुखिया ने इशारों में जिस तरह के सियासी तीर चलाए उनमें गांव-शहर में पट्टे बांटने का अभियान पीछे छूट गया। एक मंत्री ने कार्यक्रम के बाद कहा कि जब खुद ही विवाद बुलाए तो दूसरा क्या करेगा?

यूपी पुलिस के नियम से डरे नेता
लखीमपुर खीरी की घटना के विरोध में सत्ताधारी पार्टी के नेताओं की जिगजैग पॉलिटिक्स चर्चा में है। पहले लखीमपुर खीरी पैदल मार्च निकालने की घोषणा की। जब यूपी बॉर्डर पर पहुंचे और किसी ने नहीं रोका तो पैदल मार्च कैंसिल कर दिया। फिर तय हुआ कि यूपी बॉर्डर पार करके पीएम मोदी और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ का पुतला जलाकर विरोध जताया जाए। बॉर्डर पार करने के बाद यूपी पुलिस ने नेताओं को बताया कि हमारे यहां बाकी किसी का भी पुतला जला लीजिए, लेकिन सीएम योगी का पुतला जलाने पर नामजद मुकदमा दर्ज होगा। यह सुनते ही सत्ताधारी प्रदर्शनकारियों ने रणनीति बदली, योगी का पुतला राजस्थान सीमा में जलाया ताकि केस दर्ज न हो। इस फियर फैक्टर की खूब चर्चा हो रही है।

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इलेस्ट्रेशन : संजय ढिमरी,जयपुर

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