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  • With The Arrival Of Two Holidays With Sankranti, Kite Flying Will Be Done For 3 Days, Sales Increased By 40% But The Business Of Sweets Decreased By 50%, Sesame jaggery Doubled

त्‍योहार का उत्‍साह:संक्रांति के साथ दो छुट्टियां आने से 3 दिन होगी पतंगबाजी, बिक्री 40% तक बढ़ी पर मिठाइयों का कारोबार 50% तक कम रहा, तिल-गुड़ दोगुना

जयपुर4 दिन पहले
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बाजारों में देर रात तक पतंग खरीदने वालों की भीड़ लगी रही। - Dainik Bhaskar
बाजारों में देर रात तक पतंग खरीदने वालों की भीड़ लगी रही।

मकर सक्रांति को लेकर शहर वासियों में उत्साह देखने को मिला। गुरुवार को सक्रांति की पूर्व संध्या पर लोगों ने जमकर खरीदारी की। महिलाओं ने कलपने के लिए श्रृंगार सामग्री खरीदी। वहीं युवाओं में पतंग डोर खरीदने का उत्साह देखा गया। हल्दियों का रास्ता, जय लाल मुंशी का रास्ता, गंणगोरी बाजार, किशनपोल बाजार और हांडी पुरा में पतंग डोर की जमकर खरीदारी करते लोग नजर आए। जयपुर के पतंग व्यापारियों के अनुसार कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बावजूद इस बार पतंग और मांझा की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है।

इस बार त्यौहार का रंग 3 दिन तक जमेगा क्योंकि शुक्रवार की सक्रांति है, अगले दिन शनिवार और रविवार को संपूर्ण लॉकडाउन के चलते लोग 3 दिन तक जमकर पतंगबाजी का आनंद लेंगे। इसलिए इस बार जयपुर जिले में करीब 40 करोड़ रुपए के पतंग और मांझे की बिक्री की संभावना है। हालांकि पतंग और मांझा की कीमत में 40 से 50% का इजाफा हुआ है। जो पतंगे ₹500 सैकड़ा आ रही थी, अब ₹700 सैकड़ा पहुंच गई है। सबसे ज्यादा बिक्री ढाही की साइज और मंझौली पतंग की हुई है। पन्नी की पतंग लोग कम पसंद कर रहे हैं।

कोरोना संक्रमण के कारण सामान देरी से और कम आया इसलिए पतंगों के दामों में बढ़ोतरी
पतंग कारोबारी फरमान अख्तर ने बताया हर साल बारिश में बरेली, मुरादाबाद, रामपुर से पतंग व डोर आती है। इस बार कोरोना की वजह से पतंग और मांझा देरी से आया। पहले के मुकाबले 40% माल ही आया। यही कारण है कि पतंग और मांझा की कीमत 30 से 40% तक बढ़ गई है। पहले जो मंजे की चरखी 500 रुपए की थी अबकी कीमत 800 रुपए पहुंच गई है। इस साल 5 रुपए की पतंग 8 से 10 रुपए में बिक रही है।

एमके पतंग हाउस के दीपक माहेश्वरी ने बताया पतंगों के साथ ही इस बार विशिंग (लालटेन) का भी क्रेज है। महंगाई बढ़ने के बावजूद पतंग और मांझा की खरीद भी बढ़ी है। इधर, मिठाई कारोबारी हुकुम चंद अग्रवाल का कहना है मिठाई व फीनी का कारोबार 50% ही रह गया है। लोग देसी घी की फीनी ही खाना पसंद कर रहे हैं। जयपुर व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सुभाष गोयल का कहना है कि तिल गुड़ का कारोबार दोगुना हुआ है।

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