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भास्कर विशेष:सिग्नल फ्री करने को फिर आसान टास्क पर डेढ़ से 3 गुना तक में काम, जाम वाले रामबाग-ओटीएस-जेडीए चौराहे फिर छूटे

जयपुर6 महीने पहलेलेखक: महेश शर्मा
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शहर के ट्रैफिक को आसान करने के लिए सरकारें एक ‘लॉन्ग टर्म प्लान’ के बजाए ‘अपनी-अपनी डपली’ बजा रही हैं। - Dainik Bhaskar
शहर के ट्रैफिक को आसान करने के लिए सरकारें एक ‘लॉन्ग टर्म प्लान’ के बजाए ‘अपनी-अपनी डपली’ बजा रही हैं।

शहर के ट्रैफिक को आसान करने के लिए सरकारें एक ‘लॉन्ग टर्म प्लान’ के बजाए ‘अपनी-अपनी डपली’ बजा रही हैं। बीजेपी सरकार में सर्किल हटाए गए तो अब कांग्रेस सरकार ‘सिग्नल फ्री’ का प्रयोग कर रही है। इसके लिए 700 करोड़ की बजट घोषणा में जिन 7 सर्किल-चौराहों को चुना गया है, उनमें भी ट्रैफिक की परेशानी के लिहाज से काम की प्राथमिकता चुनने के बजाए जेडीए खुद की सहूलियत देख रहा है।

जवाहर सर्किल पर जहां हर सरकार के कार्यकाल में कुछ न कुछ काम होते रहते हैं, वहां फिर ट्रैफिक की मुसीबतों कम होने के बावजूद पहले टेंडर लगा दिए गए हैं। जबकि हर सरकार में ट्रैफिक मुसीबतों के बावजूद टलते आ रहे रामबाग-ओटीएस-जेडीए सर्किल को फिर हाशिये पर रखा गया है।

आसान टास्क के पीछे जमीन अवाप्ति की मुसीबतें हैं। बाकी सभी सर्किल-चौराहे पर निजी और सरकारी उपक्रमों से जमीन अवाप्त करनी होगी। इससे जिम्मेदार बचना चाह रहे हैं और उन तीन सर्किल-चौराहों को चुना, जहां तत्काल बुकिंग में किसी तरह की परेशानी नहीं। और कहनेभर को काम शुरू करने की थपथपी भी।

2 करोड़ का ट्रैफिक सर्वे धराशायी
2016-2017 में बजट घोषणा के साथ जेडीए ने ट्रैफिक सर्वे कराया, आगामी प्लान किए जा सकें। इस पर 2 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

2038 तक के प्लान में सभी मेजर 100 पाइंट (तिराहे, चौराहे, सर्किल) शामिल किए गए। सर्वे में भी जवाहर सर्किल और बीटू बाईपास पर ट्रैफिक की परेशानी दूसरे चौराहों से कम है।

आसान टास्क इसलिए, क्योंकि हमारी ट्रैफिक समस्या पर भारी सरकारी उलझनें
रामबाग चौराहा: 2001-02 में गोपालपुरा बाईपास पर फ्लाईओवर और सांगानेर फ्लाईओवर बना तब यहां फ्लाईओवर की प्लानिंग बनी थी। शिलान्यास के लिए पैडस्ट्रियन के पत्थर भी लग गए। पर सहमति नहीं बनी। 2008 में फिजिबलिटि कराई तब भी फ्लाईओवर की बात थी लेकिन मैट्रो की प्लानिंग के चलते फाइनल नहीं हो पाई।

ओटीएस: यहां भी 2008 में फ्लाईओवर के बारे में प्लान तैयार किया गया। लेकिन मामला सीएमओ तक पहुंचा तो कहा गया कि आखिर क्यों इस इकलौती बची सड़क की स्काई लाइन खराब की जाए? विकल्प के तौर पर कई बार विद्याश्रम स्कूल साइड ब्रिज को चौड़ा करने की बात हुई, लेकिन जमीन के कुछ पार्ट पर स्टे के कारण पीछे हटे और अब रोजाना जाम की मुसीबत। फिलहाल जल्द राहत के आसार नहीं दिख रहे।

अब हश्र: एक साथ काम शुरू नहीं कराए जा सकते हैं
जवाहर सर्किल पर जाम नहीं लगता। ओटीएस, जेडीए पर पीक आवर्स में 3-4 बार ग्रीन सिग्नल का इंतजार करना पड़ता है। टोंक रोड-जेएलएन के 3 चौराहों पर टेंडर हो गए हैं अब जाम वाले आसपास के चौराहों पर एक साथ काम नहीं होगा। एक बार फिर सरकार के साथ प्राथमिकताएं बदलेंगी।

तीन जगह काम शुरू करा रहे हैं। ओटीएस पर भी जल्द प्लानिंग फाइनल होगी। कुछ जगह जमीन अवाप्त करनी है, जिस पर भी काम करेंगे। -गौरव गोयल, कमिश्नर, जेडीए