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लॉकडाउन में कितना खूबसूरत हुआ जयपुर, देखें फोटो और VIDEO:50 दिन में जयगढ़, नाहरगढ़ और जलमहल खिल उठे, भास्कर की नजर से आप भी देखिए पिंक सिटी को

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: विष्णु शर्मा
विश्व पर्यावरण दिवस पर देखिए जयपुर का नजारा। इस बार जेठ में ही सावन का अहसास होने लगा है। बारिश से जयपुर ने हरियाली की चादर ओढ़ ली है। फोटो में जलमहल, कनक वृंदावन और कनक घाटी का विहंगम दृश्य

कोविड संक्रमण के कारण करीब 50 दिन से लोग घरों में बंद हैं। महामारी से बचाने के लिए सरकार ने जब सख्ती की थी, तब पतझड़ का मौसम था। हवाओं के तेज थपेड़ों के बीच गिरते-टूटते पत्तों से सड़कें अटी थीं। अब गुलाबी नगरी जयपुर का नजारा एकदम बदल गया है। हर तरफ प्रकृति मुस्कुरा रही है। जलमहल में पानी की थोड़ी आवक शुरू हो गई। अरावली पर्वतमाला में नाहरगढ़ और जयगढ़ की पहाड़ियों की रंगत बदल गई है।

अरावली पहाड़ियों के गर्भ में हरी-भरी वादियों से घिरा हुआ जलमहल। झील के बीचों-बीच होने से 'आई बॉल' भी कहा जाता है। पहाड़ों में बनी नर्सरी में 1 लाख से अधिक वृक्ष लगे हैं। यहां करीब 200 वर्ष पुराने पेड़ों को ट्रांसप्‍लांट कर नया जीवन दिया गया है।
अरावली पहाड़ियों के गर्भ में हरी-भरी वादियों से घिरा हुआ जलमहल। झील के बीचों-बीच होने से 'आई बॉल' भी कहा जाता है। पहाड़ों में बनी नर्सरी में 1 लाख से अधिक वृक्ष लगे हैं। यहां करीब 200 वर्ष पुराने पेड़ों को ट्रांसप्‍लांट कर नया जीवन दिया गया है।

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर भास्कर टीम शहर के प्रमुख स्थानों पर पहुंची। जहां भी गए, भीगी हुई मिट्‌टी की सौंधी खुशबू के साथ मनमोहक नजारे देखने को मिले। नाहरगढ़, जयगढ़ और चरण मंदिर की प्राचीर से झांका तो आंखों को भरोसा ही नहीं हो रहा था कि सावन नहीं जेठ का महीना है। हरियाली की चादर ओढ़े गुलाबी नगरी की छटा आंखों में बस गई।

जयपुर में अरावली पर्वतमाला में चील का टीला (ईगल की पहाड़ी) पर आमेर दुर्ग एवं मावठा झील के ऊपरी हिस्से में जयगढ़ किला है। महाराजा सवाई जयसिंह ने इस किले का निर्माण कराया था।
जयपुर में अरावली पर्वतमाला में चील का टीला (ईगल की पहाड़ी) पर आमेर दुर्ग एवं मावठा झील के ऊपरी हिस्से में जयगढ़ किला है। महाराजा सवाई जयसिंह ने इस किले का निर्माण कराया था।

जलमहल का दृश्य इतना मनोरम था कि आने का मन नहीं कर रहा था। लॉकडाउन नहीं होता तो यह जगह सैलानियों से पटी होती। पैर रखने की जगह नहीं मिलती। जयमहल के अलावा आमेर के मावठे की खूबसूरती भी कम नहीं थी। आप भले घरों में बंद हैं, लेकिन भास्कर आपको पूरा नजारा दिखाएगा। आप अपने पसंदीदा स्थानों से जुड़ेंगे और बेहद सुकून महसूस करेंगे। प्री-मानसून के साथ प्रदूषण का स्तर कम होने से हर चौराहे पर उगे पेड़ पौधे भी खिल उठे हैं।

हरियाली के बीच जयगढ़ की पहाड़ी से नजर आता आमेर जयपुर नगर सीमा में ही स्थित उपनगर है। यहां का प्रसिद्ध आमेर किला बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए पहचाना जाता है।
हरियाली के बीच जयगढ़ की पहाड़ी से नजर आता आमेर जयपुर नगर सीमा में ही स्थित उपनगर है। यहां का प्रसिद्ध आमेर किला बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए पहचाना जाता है।
जयपुर-आमेर मार्ग पर मानसागर झील के मध्‍य स्थित इस महल का निर्माण सवाई प्रताप सिंह ने अश्वमेध यज्ञ के बाद 1799 में कराया था।
जयपुर-आमेर मार्ग पर मानसागर झील के मध्‍य स्थित इस महल का निर्माण सवाई प्रताप सिंह ने अश्वमेध यज्ञ के बाद 1799 में कराया था।

जल महल के निर्माण से पहले जयपुर की जलापूर्ति के लिए बांध बनवाकर मानसागर झील का निर्माण करवाया। जलमहल अब पक्षी अभ्‍यारण्य के रूप में भी विकसित हो रहा है। इस महल से पहाड़ और झील का खूबसूरत नजारा देखा जा सकता है। चांदनी रात में मानसागर झील के पानी में जल महल का नजारा बेहद आकर्षक होता है।

जयपुर में नाहरगढ़ की पहाड़ी से अरावली पर्वतमाला का नजारा। यहां आमेर और जयपुर की सुरक्षा के लिए पहाड़ियों पर कई जगह बुर्ज बना रखी है।
जयपुर में नाहरगढ़ की पहाड़ी से अरावली पर्वतमाला का नजारा। यहां आमेर और जयपुर की सुरक्षा के लिए पहाड़ियों पर कई जगह बुर्ज बना रखी है।

जरूरत 9 स्क्वायर मीटर प्रति व्यक्ति ग्रीन स्पेस की, हमारे आसपास केवल 1.60 मीटर हरियाली
WHO के अनुसार, शहरी क्षेत्र में प्रति व्यक्ति कम से कम 9 स्क्वायर मीटर हरियाली होनी चाहिए। वर्ष 2010 के अध्ययन के मुताबिक, जयपुर में 1.60 स्क्वायर मीटर प्रति व्यक्ति ग्रीन स्पेस है। ऐसे में हमको 38.50 स्क्वायर किलोमीटर एरिया में ग्रीन स्पेस बढ़ाना पड़ेगा।

आमेर में मावठा झील के बीच एक छोटा-सा टापू बना है। इसे केसर क्यारी कहा जाता है। बताया जाता है कि कभी इसमें सुगंधित केसर उगाई जाती थी। यहीं मावठा झील के ऊपर आमेर महल नजर आ रहा है।
आमेर में मावठा झील के बीच एक छोटा-सा टापू बना है। इसे केसर क्यारी कहा जाता है। बताया जाता है कि कभी इसमें सुगंधित केसर उगाई जाती थी। यहीं मावठा झील के ऊपर आमेर महल नजर आ रहा है।

हमें प्रकृति, पेड़ और जल को संभाल कर रखना होगा
ऊर्जा संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर काम कर रहे डॉ. अमित झालानी के मुताबिक, नीति आयोग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भविष्य में जयपुर सहित 20 शहरों में भूजल समाप्त हो सकता है। जयपुर जिले में वर्ष 1984 में भूजल स्तर 12 मीटर गहराई पर था। इसके बाद 2020 में भूजल स्तर 150 मीटर तक हो गया है। पिछले करीब 50 वर्षों में 6000 किलोमीटर से ज्यादा वन क्षेत्र कट गया है। ऐसे में हमें प्रकृति, पेड़ और जल का संरक्षण करने में मजबूत भूमिका निभानी होगी।

सावन से पहले ही जेठ की भीषण गर्मी में बारिश से जयपुर से गुजर रही अरावली पर्वतमाला हरी भरी हो गई है। यहां मोर भी नाचते नजर आ रहे हैं। नाहरगढ़ की पहाड़ी पर चरण मंदिर के पास एक मोर कुछ इस अंदाज में दिखा।
सावन से पहले ही जेठ की भीषण गर्मी में बारिश से जयपुर से गुजर रही अरावली पर्वतमाला हरी भरी हो गई है। यहां मोर भी नाचते नजर आ रहे हैं। नाहरगढ़ की पहाड़ी पर चरण मंदिर के पास एक मोर कुछ इस अंदाज में दिखा।
हरियाली के बीच नजर आ रहा कनक वृंदावन। राजधानी जयपुर में आमेर रोड पर यह उद्यान सैलानियों को काफी रिझाता है। यह अरावली पर्वतमाला से घिरी आमेर घाटी में बना है। इसके नजदीक प्राचीन गोविंद देव जी का मंदिर भी स्थित है।
हरियाली के बीच नजर आ रहा कनक वृंदावन। राजधानी जयपुर में आमेर रोड पर यह उद्यान सैलानियों को काफी रिझाता है। यह अरावली पर्वतमाला से घिरी आमेर घाटी में बना है। इसके नजदीक प्राचीन गोविंद देव जी का मंदिर भी स्थित है।
जेठ के महीने में पहले पहाड़ियां कुछ ऐसी नजर आती थीं। इस बार बारिश ने जयपुर के आसपास नाहरगढ़ और जयगढ़ की पहाड़ी पर हरियाली ला दी है।
जेठ के महीने में पहले पहाड़ियां कुछ ऐसी नजर आती थीं। इस बार बारिश ने जयपुर के आसपास नाहरगढ़ और जयगढ़ की पहाड़ी पर हरियाली ला दी है।

सभी फोटो: मनोज श्रेष्ठ

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