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30 साल बाद दिवाली पर विशेष योग-संयोग:महालक्ष्मी की पूजा का मिलेगा चौगुना फल, स्वाति नक्षत्र की साक्षी में प्रीति व आयुष्मान योग के क्रम में मनेगा दीपोत्सव

जयपुर6 महीने पहलेलेखक: लता खण्डेलवाल |
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इस बार दिवाली पर्व गुरुवार को चंद्र-मंगल के केंद्र तथा शनि के शश योग की साक्षी में मनाया जाएगा। इस दिन इस प्रकार के शुभ योगों का संयोग लक्ष्मी प्राप्ति के लिए विशेष माना गया है। इस दिन ग्रह, नक्षत्र व योगों का यह विशिष्ट संयोग 30 साल बाद बन रहा है।
इसलिए बन रहा शश योग
ज्योतिष शास्त्र में पंच महापुरुष योग का उल्लेख मिलता है। उन्हीं योगों में एक शश नाम का योग भी है। यह योग शनि के स्वराशि में केंद्रगत होने से बनता है। इस बार शनि स्वयं की राशि मकर में रहेंगे।

ये रहेंगे ग्रह, नक्षत्र व विशेष योग

ज्योतिषशास्त्री पं. दिनेश मिश्रा के अनुसार दिवाली के दिन चित्रा नक्षत्र में आरंभ होगी और स्वाति नक्षत्र की साक्षी में प्रीति व आयुष्मान योग के संयुक्त क्रम में दीपोत्सव मनाया जाएगा। ग्रह गोचर की गणना से देखें, तो दीपावली पर ग्रह, नक्षत्र व योगों का विशेष अनुक्रम बन रहा है। केंद्र के तहत चंद्र, मंगल, शनि का विशेष संयोग रहेगा। यह भी कहा जा सकता है कि यह उत्तरोत्तर वर्गोत्तम रहेंगे। साथ ही सूर्य, मंगल व चंद्र की युति विशेष लाभ देने वाली रहेगी। यही नहीं केंद्र में शुभ ग्रहों का योग भी सहयोगात्मक रहेगा।

पूजन के लिए प्रदोषकाल विशेष

ज्योतिषाचार्य प्रो. विनोद शास्त्री ने बताया कि दिवाली पर पूजन की मान्यता मुहूर्त विशेष पर निर्भर करती है। यदि श्रेष्ठ मुहूर्त में पूजन किया जाए तो श्रेष्ठ फल मिलता है। लक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ समय प्रदोषकाल है। इसी समय वृषभ लग्न की साक्षी भी रहती है। इस बार प्रदोष काल शाम 5:38 से रात्रि 8:15 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त में पंचोपचार व षोडशोपचार पूजन करना चाहिए।

दिवाली का इतिहास
दिवाली को लेकर विभिन्न प्रथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता है कि भगवान राम जब रावण का वध करके माता सीता के साथ अयोध्या वापस आए थे, तो उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने नगर को सजाया था। उन्होंने लाखों द्वीप जलाकर हर्षोल्लास के साथ उनके आगमन पर खुशी मनाई थी। इसके अलावा दीपावली पर्व के दिन ही माता लक्ष्मी का अवतार इस सृष्टि में हुआ था। एक मान्यता यह भी है कि इस दिन ही पांडवों को अपना खोया हुआ राज्य वापस मिला था और खुशी में नगर को दीपों से सजाया गया था।
दिवाली का महत्व
दिवाली पर्व को असत्य पर सत्य की विजय के रूप में भी मनाया जाता है। जीवन के घने अंधकार को छोड़कर प्रकाश की ओर ले जाने वाला त्योहार है। इस दिन मां लक्ष्मी और गणेश का विधिवत पूजन किया जाना चाहिए। हिंदू धर्म में लक्ष्मी को धन की देवी तो गणेश को बुद्धि का देवता माना जाता है। दीपावली के दिन इनकी पूजा करने से लोगों को बुद्धि और धन की विशेष प्राप्ति होती है।

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