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भास्कर एक्सक्लूसिव:165 शहरों के जोनल प्लान बनाए ही नहीं, 27 शहरों में 50% ही काम पूरा, नतीजा- हाईकोर्ट की रोक के बाद 5 से 7 लाख पट्टे विलंबित होंगे

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: डूंगरसिंह राजपुरोहित
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हाईकोर्ट के आदेश पर आधी रात को निकायों को भेजे निर्देश- बिना जाेनल प्लान वाले पट्‌टे फिलहाल रोको। - Dainik Bhaskar
हाईकोर्ट के आदेश पर आधी रात को निकायों को भेजे निर्देश- बिना जाेनल प्लान वाले पट्‌टे फिलहाल रोको।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 21 माह पहले जनवरी-2020 में ‘प्रशासन शहरों के संग’ अभियान की घोषणा की थी। इसके तहत शहरों में लोगों को पट्टे दिए जाने थे। इसलिए यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने अब तक 30 बैठकें की। सीएम और मंत्री ने प्रशासन शहरों के संग अभियान को सफल बनाने का जिम्मा 193 शहरी निकायों की करीब डेढ़ लाख कर्मचारी और अफसरों की फौज को सौंपा था। लेकिन अफसराें की वजह से यह अभियान प्रभावित हो गया है।

अब तक 193 में से 165 शहरों ने जोनल प्लान ही नहीं बनाए। मंत्री से कहते रहे कि हमारी तैयारी पूरी है। जयपुर को छोड़कर बाकी 1 लाख से अधिक आबादी के 27 बड़े शहरों का भी जोनल प्लान और सेक्टर प्लान का काम 100% पूरा नहीं है। जोधपुर, कोटा, उदयपुर, भिवाड़ी, अलवर, अजमेर, बीकानेर, भरतपुर जैसे बड़े शहरों के भी जोनल प्लान के काम 50 से 60% ही पूरा है। केवल मास्टर प्लान बनाने के नाम पर अफसर खुद की पीठ थपथपाते रहे।

सरकार ने आते ही 3 साल पहले ही नगर नियोजन विंग को मजबूत करते हुए सभी निकायों के अलग से टाउन प्लानिंग अफसर नियुक्त किए थे। लेकिन उन्होंने सभी शहरों को जोनल प्लान बनाकर नोटिफाइड ही नहीं करवाए। बिना नोटिफाइड जोनल प्लान को लागू नहीं कर सकते। अब हाईकोर्ट ने बिना जोनल प्लान और सेक्टर प्लान के किसी काॅलोनी, सिटी में पट्टे पर रोक लगाने के बाद सामने आ रहा है कि जिन अफसरों के जिम्मे 5 से 7 लाख पट्टे थे, उनके जोनल प्लान ही नहीं बने।

दो महीने में ही 12 शहरों के मास्टर प्लान बनवाए, फिर भी काम अधूरा
पट्टा अभियान कितना महत्वपूर्ण है यह इसी से समझा जा सकता है कि 17 जून 2021 को यूडीएच के सलाहकार बनाए गए पूर्व आईएएस जीएस संधु ने सभी निकायों को 7 दिन में ही मास्टरप्लान और जोनल प्लान के संबंध में निर्देशित कर दिया। संधु ने मात्र 2 माह में 12 शहरों के अधूरे या संशोधित मास्टर प्लान दुबारा से जारी करवाए। श्रीगंगानगर का 2035 का, खाटू श्यामजी का 2035 का, किशनगढ़बास का 2041 तक का, तिजारा का 2031 तक का, रूपबास, अलवर, सवाईमाधोपुर, सरदार शहर, यूआईटी बीकानेर और कोटा का संशोधित मास्टर प्लान तैयार करवाया। पाली का 2023 और नसीराबाद 2031 तक का मास्टर प्लान बनाया। लेकिन नीचे निकाय मशीनरी ने जोनल प्लान ही नहीं बनाए। इसके कारण पूरे अभियान पर ही हाईकोर्ट की रोक लग गई।

1 लाख से कम आबादी के शहर सर्वाधिक प्रभावित

सरकार की जांच में जोनल प्लान की सबसे बड़ी खामी 1 लाख तक आबादी के 165 शहरों में सामने आई है। इनमें अब जोनल प्लान के ड्राफ्ट बनाकर जनता के सुझाव आपत्ति के लिए जारी किए बिना पट्टे नहीं दे सकेंगे।

2 प्राधिकरणों, 14 यूआईटी में काम रुकेगा: जोनल प्लान का पूरा होने से जयपुर जेडीए, निगम, हाउसिंग बोर्ड के शिविरों का काम नहीं अटकेगा। जोधपुर विकास प्राधिकरण, अजमेर विकास प्राधिकरण, कोटा, उदयपुर, बीकानेर, अलवर, भिवाड़ी में बकाया जोनल प्लान वाली काॅलोनियों के ड्राफ्ट जोनल प्लान त्वरित गति से तैयार करने होंगे।

मंत्री बाेले- जल्द बाकी शहरों का जोनल प्लान भी बना देंगे
जल्द बाकी शहरों के जोनल प्लान तैयार करवाएंगे। हम हाईकोर्ट के आदेश की पालना के तहत मकानों का नियमन नहीं कर रहे। केवल भूखंडों का आवंटन पत्र जारी कर रहे हैं। जिन शहरों के जोनल प्लान नहीं बने, उन्हें रोज मॉनिटरिंग करवाते हुए जल्द तैयार करवाएंगे। पट्टा अभियान अभी लंबा चलेगा, जनता को परेशान नहीं होने देंगे। पट्टे के अलावा 30 प्रकार के अन्य काम भी हो रहे हैं। -शांति धारीवाल, नगरीय विकास मंत्री

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