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महाअर्चना:तीनलोक मंडल विधान की महाअर्चना श्रद्धापूर्वक की

निवाई6 दिन पहले
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निकटवर्ती गांव हरभगतपुरा में श्री चन्द्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर मे आयोजित दस दिवसीय दशलक्षण पर्व के चलते रविवार को शान्तिधारा कर तीन लोक मण्डल विधान की महाअर्चना की गई। जिसमें श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पडा। जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौंला ने बताया कि तीन लोक मण्डल विधान का शुभारंभ गुमानमल जैन देवली एवं महेन्द्र कुमार सुनारा द्वारा दीप प्रज्वलित करके किया। इस दौरान भगवान सुपाश्र्वनाथजी की चित्र का लोकार्पण किया गया। जौंला ने बताया कि तीन लोक मण्डल विधान मे सोधर्म इन्द्र मूलचंद जैन एवं इन्द्राणी लाड़देवी जैन द्वारा मण्डप पर पांच मंगल कलश की स्थापना की।

विधान मे रविवार तक 21 पूजा की गई जिसमें श्रद्धालु अनीता जैन, सन्जू जौंला, टीना जैन, गायत्री देवी बरवाडा, मुन्नी देवी सोगानी, प्रेमदेवी जैन सहित कई श्रद्धालुओं ने भक्ति नृत्य किए। विधान मे देव शास्त्रए गुरु पूजा, चंद्रप्रभु भगवान पूजा, सुपाश्र्वनाथ पूजा के साथ मण्डल विधान की आराधना की।विधान के बाद तीन लोक की महाआरती करके श्रद्धालुओं ने जाप किए। उन्होंने बताया कि विधान मे संगीत के साथ पर्युषण पर्व के अन्तर्गत उत्तम आर्जव धर्म की विशेष पूजा अर्चना की। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने तीन लोक मण्डल विधान को सजाया जिस पर श्री फल अध्र्य समर्पित किए। इस दौरान बंटी पांडया, अक्षय कुमार, रोहित पांडया, यश संघी सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे। जौंला ने बताया कि इसी प्रकार निवाई में भी पर्युषण पर्व के तहत दशलक्षण धर्म की विशेष आराधना की गई जिसमें सभी जैन मंदिरों में उत्तम आर्जव धर्म की पूजा अर्चना की गई।

टोडारायसिंह: प्रसन्नता के लिए अपनाएं उत्तम आर्जव धर्मटोडारायसिंह|शहर के जिनालयों में रविवार को जैन धर्म के पर्यूषण पर्व के अवसर पर उत्तम आर्जव धर्म की पूजा का आयोजन पं.संजीव कासलीवाल के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। जिसमें जैन समाज अध्यक्ष संतकुमार जैन की अगुआई में कई जैन महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जैन समाज अध्यक्ष संत कुमार जैन ने बताया कि जीवन में हमेशा प्रसन्नतारूपी रथ पर सवार होकर खुशियों का दामन नही छोडे। इसके लिए दशलक्षण धर्म का तीसरा कदम यानी उत्तम आर्जव धर्म अपनाना अत्यंत आवश्यक है। हमारे आचार्यों ने मन, वचन और कार्य से सात्विक व्यक्ति के आचरण को आर्जव धर्म माना है। जब मनुष्य का मन, वचन और काय किसी एक कार्य में एक साथ लग जाए तो समझ लेना चाहिए कि उसके जीवन में आर्जव धर्म का प्रवेश हो गया है। समस्त शुभ-अशुभ कर्म का संबंध भी मन, वचन और काय ही होते हैं। जब व्यक्ति मन, वचन और काय को शुभ कार्य में लगाता है तो सुख, शांति और समृद्धि का अनुभव करता है।

कार्यक्रम के प्रवक्ता मुकुल जैन ने बताया कि प्रतिदिन जैन भवन में सायंकालीन संगीतमय श्री भक्ताम्बर पाठ का आयोजन किया जारहा है।देवली के पटेल नगर पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शांति धारादेवली|शहर के पटेल नगर स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दश लक्षण पर्व के तृतीय दिवस पर समाज द्वारा जलाभिषेक एवं शांति धारा का आयोजन किया गया । समाज के प्रचार - प्रसार मंत्री राजीव जैन ने बताया कि इस मौके पर बोलियों द्वारा प्रथम , द्वितीय एवं तृतीय शांति धारा की गई ।

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