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हांफता सिस्टम, तड़पते मरीज:24 घंटे में 12 मौत, अस्पताल में हर दो घंटे में एक मरीज तोड़ रहा दम

सवाई माधोपुर10 दिन पहले
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सवाई माधोपुर। बेड के इंतजार में अस्पताल के गलियारे में स्ट्रेचर पर लेटी वृद्धा। - Dainik Bhaskar
सवाई माधोपुर। बेड के इंतजार में अस्पताल के गलियारे में स्ट्रेचर पर लेटी वृद्धा।
  • बाहर बेड के लिए और अंदर ऑक्सीजन के लिए तड़प रहे मरीज

जिले के अस्पतालों में अब हालात दिनों दिन बिगड़ते जा रहे हैं। बढ़ती मरीजों की संख्या के आगे अब सिस्टम हांफ रहा है। बेड के इंतजार में अस्पताल में बाहर स्ट्रेचर पर लेटा मरीज बेड के अभाव में और वार्ड में भर्ती मरीज ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए तड़प रहे हैं। हालात यह है कि जिला अस्पताल में पिछले 24 घंटे के दौरान 12 मरीजों ने दम तोड़ दिया। यानि कि हर दो घंटे में एक मरीज दम तोड़ रहा है। इसके बावजूद प्रशासन अभी तक एसी के कमरों में बैठकर सिर्फ प्लानिंग कर रहे हैं।

आखिरकार उनकी ये प्लानिंग कागजों से बाहर निकलकर दम तोड़ते मरीजों की सांसों में कब दम फूंकेगी? पिछले करीब दस दिनों से जिले में कोरोना संक्रमण के केसेज बढ़ने से जिला अस्पताल में बेड से लेकर ऑक्सीजन, दवाइयां यहां तक कि चिकित्सा स्टाफ की भी कमी हो गई है।जिले में रोजाना सामने आ रहे कोरोना पॉजिटिव केस के चलते इन दिनों घर और बाजार से लेकर अस्पताल व श्मशान तक हालात खराब हैं। जहां एक तरफ ऑक्सीजन बेड के लिए वेटिंग चल रही है, वहीं मरीजों के परिजन ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था में इधर-उधर भागदौड़ कर रहे हैं। स्थिति यह हो गई है कि एक भी अस्पताल में ऑक्सीजन बेड खाली नहीं है। अस्पतालों में मरीज तड़पते हुए पहुंच रहे हैं, लेकिन उनको बेड के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

क्योंकि वहां नए मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड नहीं है। ऐसे में मरीजों की हालत बिगड़ती जाती है। उपचार नहीं मिलने से पिछले कुछ दिनों से इस तरह से कई मरीजों की मौत हो चुकी है। अब तो स्थिति यह हो गई है कि अधिकांश ने मरीजों को अस्पतालों में लाना बंद कर दिया है। परिजन उनका अपने स्तर पर ही उपचार कराने में लगे है। हालांकि घरों पर भी उनकी दिक्कतें कम नहीं है। यहां भी उनको ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल रहे। इसके लिए यहां से वहां भटकने के लिए मजबूर है। जिले में ऑक्सीजन सिलेंडरों की पहले से किल्लत चल रही है। ऐसे में मरीजों की हालत बिगड़ती जा रही है।

निजी अस्पतालों ने खड़ेकर दिए हाथ सरकारी अस्पतालों में बेड नहीं है। साथ में निजी अस्पतालों में भी बेड नहीं है। उन्होंने बाहर ही गार्ड से मना करवा दिया है। सीधे तौर पर भर्ती नहीं कर रहे हैं। क्योंकि उनके पास भी पर्याप्त संसाधन नहीं है। ऐसे में भर्ती कर भी लेंगे तो उपचार कैसे संभव हो सकेगा। इसके चलते मरीज सरकारी अस्पतालों मे पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां भी बेड नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में वे परेशान हो रहे हैं।

12 मृतकों में से एकपॉजिटिव था जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार एक मई को सुबह 8 बजे से 2 मई सुबह 8 बजे तक अस्पताल के विभिन्न वार्डों में भर्ती 12 मरीजों की मौत हो गई। इनमें से एक मृतक ही कोरोना पॉजिटिव था, बाकी सभी की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट नेगेटिव थी। हालांकि उनमें कोरोना के लक्षण थे, इसलिए कोरोना मरीजों के वार्ड में भर्ती किया गया था।

किसी मरीज की छुट्‌टी होनेदो, तब मिल जाएगा बेड जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों के परिजनों को इन दिनों काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। संबंधित मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए पहले बेड के लिए लंबा इंतजार करो, यदि बेड मिल भी गया तो फिर ऑक्सीजन और फिर रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए। इतना लंबा इंतजार करने के चक्कर में कई मरीज की सांसों की डोर तो बीच में ही टूट जाती है। रविवार को सुबह शहर से अपनी मां को घर से ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर अस्पताल में लेकर आए अब्दुल सत्तार ने बताया कि उसकी मां पिछले चार-पांच दिन से बीमार है। सुबह अचानक तबीयत खराब होने पर अस्पताल लेकर आए है, लेकिन यहां आने पर पता चला कि बेड खाली नहीं है।

चिकित्साकर्मियों का कहना है कि वार्ड में भर्ती मरीज की छुट्‌टी होने या किसी मरीज की मृत्यु होने तक इंतजार करना पडेगा, तभी बेड मिलेगा।11 बजे ऑक्सीजन मांगी और12 बजे दम तोड़ दियाअलीगढ निवासी मृतक शेर मोहम्मद के परिजनों ने बताया कि वार्डों में रात के समय कोई संभालने वाला नहीं आता। चिकित्सक के नहीं आने से मरीज परेशान होते रहते हैं। उनके वार्ड में भर्ती एक युवक ने रात को 11 बजे सांस लेने की तकलीफ बताई। इस परिजनों ने चिकित्साकर्मियों से ऑक्सीजन सिलेंडर लगाने की गुहार लगाई, लेकिन सिलेंडर उपलब्ध नहीं था। ऐसे में 12 बजे उसने दम तोड़ दिया।

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