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लॉकडाउन ने तोड़ी रोड़वेज की कमर:सवाई माधोपुर डिपो से सिर्फ 20 दिन में 2.40 लाख किलोमीटर लंबा सफर रुका, रोज 4 लाख की आय का नुकसान

सवाई माधोपुर19 दिन पहले
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यात्रियों के अभाव में सूना बस स्टैंड। - Dainik Bhaskar
यात्रियों के अभाव में सूना बस स्टैंड।

कोरोना महामारी का असर रोड़वेज बसों पर सबसे ज्यादा पड़ा है। पहले से घाटे में चल रही रोड़वेज की कोरोना काल के इस असर ने कमर तोड़ दी है। कोरोना के लॉकडाउन में बंद पड़े आवागमन के कारण बसों का संचालन ठप हो गया है। इसका सीधा असर रोडवेज की कमाई पर पड़ा है। बीते बीस दिन में करीब 80 लाख रुपए की आय का नुकसान हो चुका है।

जिलें में 10 मई से रोड़वेज बसों का संचालन पूर्णतया बंद होने से सवाई माधोपुर डिपो को काफी नुकसान हो रहा है। पिछले साल संक्रमण काल से ही आधी अधूरी संख्या में चलने वाली रोड़वेज बसों का पहिया घाटे में ही चला। अप्रैल में जरूर रोड़वेज बसों ने थोड़ी रफ्तार पकड़ी, लेकिन संक्रमण को देखते हुए यात्रीभार कम हुआ तो डिपो प्रशासन ने रोड़वेज बसों की संख्या आधी कर दी। इसके बाद 10 मई से लगे लॉकडाउन के कारण सारी बसें डिपो में ही खड़ी हैं।

34 बसों का रोज का संचालन बंद यानी 4 लाख का घाटा प्रतिदिन

सवाई माधोपुर डिपो से प्रतिदिन 34 रोड़वेज बसे अलग-अलग मार्गों के लिए संचालित होती हैं। ये फिलहाल डिपो में खड़ी हैं। यदि लॉकडाउन और बढ़ता है तो आगे के संचालन पर भी संशय बरकरार है। सवाई माधोपुर डिपो की 34 रोड़वेज बसें रोजाना 12 हजार किलोमीटर का सफर तय करती थीं। इनसे रोज करीब 4 लाख रुपए प्रतिदिन की आय हो रही थी। अब चक्काजाम जैसी स्थिति में यह आय बंद है। यानी रोज 4 लाख रुपए का नुकसान रोडवेज को उठाना पड़ रहा है। अब लॉकडाउन के 10 मई से आज तक के दिनों की गणना करें तो यह घाटा 80 लाख रुपए के आसपास का माना जा सकता है।

छोटे-बड़े व्यापारी भी प्रभावित

कोरोना संक्रमण के चलते जनजीवन अस्त व्यस्त होने के साथ ही कई बड़े व्यापारियों व छोटे कारोबारियों को काफी नुकसान हो रहा है। यही नहीं, सरकार को भी राजस्व की हानि हो रही है।

मेंटीनेंस बंद नहीं, खर्चे सब यथावत

सवाई माधोपुर डिपो के चीफ मैनेजर भंवरलाल जाट का कहना है कि भले ही आय बंद है, लेकिन रोडवेज के खर्च सब यथावत हैं। जैसे बसें भले ही डिपो में बंद हैं, लेकिन उनकी मेंटीनेंस का काम लगातार चल रहा है। सभी बसों की बैटरियां हर दो दिन में चार्ज कराई जा रही हैं।

फोटो : गोविन्द तिवारी

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