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यह चिंता के आंकड़े:जिले में 24 घंटे में 15 मरीजों ने दम तोड़ा, मृतकों में 10 कोरोना संक्रमित

सवाई माधोपुरएक महीने पहले
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कोरोना जांच के लिए सैंपल लेते हुए। - Dainik Bhaskar
कोरोना जांच के लिए सैंपल लेते हुए।
  • जिला अस्पताल में एक सप्ताह में 72 मरीजों ने दम तोड़ा, 3043 एक्टिव केस

जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर मरीजों की सांसों की डोर को कहर बनकर तोड़ रही है। उखड़ती सांसों के साथ गंभीर अवस्था में मरीज परिजनों के साथ जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं, लेकिन संक्रमण इतना खतरनाक साबित हो रहा है कि कुछ मरीजों का तो अस्पताल पहुंचते ही दम निकल रहा है।

वहीं कुछ मरीज वार्ड दर वार्ड शिफ्ट होते हुए आईसीयू में पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ रहे हैं। हालात यह है कि जिला अस्पताल में रोजाना सौ से सवा सौ इनडोर मरीजों में से दस फीसदी मौतें रोज हो रही है। शुक्रवार को भी पिछले 24 घंटे में जिला अस्पताल में 15 मरीजों ने दम तोड़ दिया। इनमें से 3 मरीज कोरोना पॉजिटिव बताए जा रहे हैं। वहीं पिछले सात दिनों में अब तक की बात करें तो 72 मरीजों की मौत अकेले जिला अस्पताल में हुई है। इनमें से 10 मृतकों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव बताई है।

गंभीर मरीजों की संख्या में कमी

पिछले दो-तीन दिनों से अस्पताल में पहले जैसे हालात नहीं है। मई माह की शुरूआत में तो मरीजों को वार्ड में भर्ती होने से पहले बाहर गलियारे में ही स्ट्रेचर पर बेड खाली होने तक इंतजार करना पड़ता था। बेड मिल भी गया तो फिर ऑक्सीजन के लिए संघर्ष करना पड़ता था।

ऐसे में बेड व ऑक्सीजन के लिए संघर्ष करते-करते कई मरीजों की सांसें तो इलाज शुरू होने से पहले ही टूट जाती थी, लेकिन अब अस्पताल आने वाले गंभीर मरीजों की संख्या मे कमी आने से थोड़ी राहत है। हालांकि चिकित्सा प्रशासन ने पहले की अपेक्षा अस्पताल में बेड भी बढा दिए है। ऑक्सीजन की कमी को लेकर मरीजों की परिजनों की शिकायतें अभी भी आ रही है।

जिला अस्पताल में अधिकांश वार्ड कोरोना के संदिग्ध मरीजों से फुल, ओपीडी में 664 मरीज

जिला अस्पताल में अधिकांश वार्ड कोरोना के संदिग्ध मरीजों से फुल है। वहीं कुछ वार्ड में कोरोना पॉजिटिव भर्ती है। ऐसे में कोरोना संक्रमण के डर से पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से अस्पताल में सामान्य बीमारियों के मरीज न के बराबर आ रहे हैं। यही कारण है कि पहले की अपेक्षा जहां 15 सौ से 18 सौ के बीच रहने वाला आउटडोर मरीजों का आंकड़ा अब 6 सौ से 7 सौ पर ही सिमट कर रह गया।

गुरुवार को जिला अस्पताल में ओपीडी में 664 मरीज चिकित्सक को दिखाने आए। वहीं आईपीडी में 108 मरीज आए। अस्पताल परिसर में दोपहर बाद सन्नाटा पसरा रहता है। हालांकि वार्ड मरीजों से फुल है। दिन में गंभीर हालत में मरीज को लाने के दौरान इक्के-दुक्के लोगों की जरूर आवाजाही नजर आती है।

जिले में 316 नए रोगी, एक सप्ताह में 2778 पॉजिटिव संख्या पहुंची

जिले में शुक्रवार को 316 कोरोना संक्रमित केस मिले हैं। ऐसे इस माह एक सप्ताह में कोरोना पॉजिटिव केस की संख्या बढ़कर 2778 हो गई है। खास बात यह है कि पिछले एक-दो दिन से जिले में संक्रमण दर घटी है। दूसरे दिन जिले में कोरोना संक्रमण दर घटकर 20.87 रह गई, जबकि गत दिवस 24.74 थी। सीएमएचओ डॉ. तेजराम मीना ने बताया कि शुक्रवार को 1514 सैंपलों की जांच की गई। इनमें से 316 सैंपलों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जिले में कोरोना के एक्टिव केस 3043 है।

ब्लॉकवार पॉजिटिव केस: शुक्रवार को 316 नए पॉजिटिव में से सर्वाधिक सवाई माधोपुर ब्लॉक में 125 केस मिले हैं। दूसरे नंबर पर गंगापुरसिटी में 118, खंडार में 37, बौंली में 26 व बामनवास में 10 पॉजिटिव केस सामने आए हैं। सवाई माधोपुर ब्लॉक में 1698 संक्रमित सामने आ चुके हैं। खंडार में 340, बौंली में 379, गंगापुर 534 व बामनवास में 92 मिले हैं।

बौंली में 30 संक्रमित: बौंली ब्लॉक में कोरोना संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को को 30 व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाए गए है। जिनमें 26 व्यक्ति बौंली क्षेत्र के व चार मलारना डूंगर के हैं। बौंली मुख्यालय पर 13 पॉजिटिव है। थड़ौली में दो, लाखनपुर, झनून, जटावती, मित्रपुरा, रवासा, शीशोलाव, गंगवाड़ा, हरसोती, जयलालपुरा, मामडोली व कोडयाई में एक-एक व्यक्ति की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई हैं।

जिला अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं मिलने पर युवक ने तोड़ा दम, भाई ने लगाया आरोप

जस्टाना| जिला अस्पताल में शुक्रवार को सुबह जस्टाना गांव के 29 वर्षीय चंद्रप्रकाश नापित पुत्र मटूल नापित की मौत हो गई। मृतक के भाई का कहना है कि उसके भाई की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई है। मृतक युवक के भाई जितेंद्र ने बताया कि उसका भाई प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था।

एक मई को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। कोरोना जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। ऑक्सीजन लेवल कम होने से ऑक्सीजन लग रही थी। शुक्रवार को सुबह हमने आपस में बातें भी की थी। डॉक्टर दो-तीन दिन में मरीज के रिकवर होने की बात कह रहे थे। सुबह करीब आठ बजे भाई के लग रहे ऑक्सीजन सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म हो गया, जिससे उसकी तबियत बिगड़ने लगी। मैं स्टाफ से सिलेंडर की गुहार लगाता रहा।

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