अहिंसा यात्रा:14 किमी विहार कर देईखेड़ा पहुंची आचार्यश्री महाश्रमण की अहिंसा यात्रा

सवाई माधोपुरएक महीने पहले
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तीन देश, बीस राज्य और लगभग अठारह हजार किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा के संकल्पों के साथ गतिमान अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी श्वेत सेना व सवाई माधोपुर के पचास से अधिक श्रद्धालुओं के संग मंगलवार को देईखेड़ा पहुंचे। यहां पर उन्होंने लोगों को गृहस्थ जीवन को धर्ममय बनाने के सूत्रों की प्रेरणा प्रदान करने के साथ ही अहिंसा यात्रा की संकल्पत्रयी से भावित कर उन्हें सन्मार्ग पर चलने को अभिप्रेरित भी किया। मंगलवार को प्रातः की मंगल बेला में आचार्यश्री महाश्रमणजी ने कापरेन स्टेशन से मंगल प्रस्थान किया। मार्ग में आने वाले ग्रामीण जनों व विभिन्न वाहनों से अन्यत्र जाने वाले लोगों ने आचार्यश्री के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। लगभग चौदह किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री देईखेड़ा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पधारे तो विद्यालय के शिक्षकों आदि ने आचार्यश्री का भावभीना स्वागत किया।

आचार्यश्री ने विद्यालय परिसर में आयोजित मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि गृहस्थ जीवन को धर्ममय बनाने के लिए सात सूत्र बताए गए हैं। गृहस्थ इनके माध्यम से धर्माचरण कर अपने जीवन को कल्याण के मार्ग पर ले जा सकता है। सुपात्र में दान देना। शुद्ध साधु को सुपात्र में दान देने की भावना होनी चाहिए। गृहस्थ गुरुजनों व ज्ञानियों के प्रति विनय का भाव रखे व उनकी पर्युपासना करने करने का प्रयास करे।

गृहस्थ को सभी प्राणियों के प्रति दया और अनुकंपा की भावना रखने का प्रयास करना चाहिए। किसी को उसके द्वारा कोई अनावश्यक कष्ट न पहुंचे, ऐसा प्रयास होना चाहिए। आदमी को अपनी वाणी से किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए। गृहस्थ को धन का घमंड नहीं करना चाहिए। लक्ष्मी को चंचला कहा गया है। इसलिए गृहस्थ को धन का घमंड नहीं करना चाहिए। गृहस्थ को समय-समय पर सत्संगति, धर्माराधना, स्वाध्याय, अच्छे साहित्य, ग्रंथ आदि को पढ़ने, प्रवचन श्रवण आदि करने का प्रयास करना चाहिए। इस प्रकार गृहस्थ आदमी भी अपने जीवन को धर्मयुक्त बना सकता है और अपने जीवन का कल्याण कर सकता है।

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