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आरएएस में सलेक्शन ले जिले का बढ़ाया मान:नियमित पढ़ाई कर हासिल की सफलता, रचा इतिहास, होनहारों ने माता-पिता को दिया श्रेय

सवाई माधोपुर16 दिन पहले
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आरएएस में चयनित समीक्षा वर्मा (ब्लैक ड्रेस में) परिवार के साथ। - Dainik Bhaskar
आरएएस में चयनित समीक्षा वर्मा (ब्लैक ड्रेस में) परिवार के साथ।

आरएएस 2018 के मंगलवार को जारी हुए रिजल्ट में जिले के होनहार युवक-युवतियों ने सलेक्शन लेकर अपने माता-पिता जिले का नाम रोशन किया है। दैनिक भास्कर आपको सवाई माधोपुर जिले से आरएएस में चयनित हुए अभ्यर्थियों के रूबरू करवाने जा रहा है।

पिता के मार्गदर्शन से मिली सफलता, दे चुकी है आईएएस का इंटरव्यू

1. समीक्षा वर्मा निवासी रैगर मोहल्ला शहर सवाई माधोपुर ने पहले ही प्रयास में आरएएस सफलता हासिल की है। उन्होंने आरएएस में 1319 वीं रैंक हासिल की है जबकि एससी केटेगरी ने 22 वीं रेंक हासिल की है। समीक्षा के पिता द्वितीय श्रेणी के अध्यापक हैं और मां आगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। समीक्षा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को दिया है।

वे बताती हैं कि उनके पिता ने उन्हें बचपन से ही सिविल सर्विस के लिए प्रेरित किया। उन्हें समय-समय पर मार्गदर्शन देते रहे। 2015 में महारानी कॉलेज से बीए करने के बाद आरएएस की तैयारी में जुट गई। उन्होंने आईएएस 2017 में इन्टरव्यू भी दिया था, लेकिन सफलता नहीं मिल पायी।

माता पिता के साथ समीक्षा
माता पिता के साथ समीक्षा

इसके बाद भी वह लगातार 8 से 10 घंटे नियमित पढ़ाई करती रही। जिसके बाद आरएएस 2018 में पहले प्रयास में ही सफलता हासिल करते हुए अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है। समीक्षा के तीन बहने और एक भाई है फिलहाल सभी भाई बहन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

एमटेक कर किया सिविल सर्विस का रुख

2. विशाल वर्मा निवासी पटेल नगर सवाई माधोपुर ने आरएस ने पहले प्रयास में 911 वीं रेंक व एससी में 17 वीं रेंक हासिल की है। इनके पिता संतोष कुमार वर्मा द्वितीय श्रेणी के अध्यापक है। विशाल ने एमटेक किया था। जिसके बाद वे राजस्थान विश्वविद्यालय से साइलॉजी में पीएचडी कर रहे हैं।

विशाल बताते हैं कि उनको कैलाश सिंह ने उन्हें मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने नोट्स से लेकर सभी तरह की मदद की। फिलहाल कैलाश सिंह झालावाड़ में लेबर इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। विशाल बताते हैं कि उन्होंने इसके लिए नियमित 7 से 8 घंटे की पढ़ाई की थी। उन्होंने इस बार फिर से आरएएस परीक्षा के लिए फार्म भरा है। वह एक बार फिर इसकी तैयारी करके परीक्षा देंगे।

3. माता-पिता ने मजदूरी कर बेटे को पढ़ाया, बेटे ने आरएएस में चयन हो बढ़ाया मान

जिले के चौथ का बरवाड़ा तहसील क्षेत्र के बलरिया गांव के बनवारी लाल बैरवा का भी आरएएस में चयन हुआ है। उन्होंने पहले ही प्रयास में 1544वीं रैंक व एससी में 118 वीं रैंक प्राप्त कर अपने माता-पिता का मान बढ़ाया है।

बनवारी लाल का जीवन संघर्ष से भरा रहा है। उनके पिता मजदूरी का कार्य करते हैं। पढ़ाई की ललक को देखते हुए उन्होंने मजदूरी के पैसों से ही बेटे को पढ़ाया तो बेटे ने आएएस में चयनित होकर माता-पिता का मान बढ़ाया है।

बनवारी लाल।
बनवारी लाल।

बनवारी लाल बैरवा के भाई जितेंद्र ने बताया कि उनके माता-पिता मजदूरी का कार्य करते हैं। उसके भाई बनवारी लाल बैरवा ने आठवीं, दसवीं तथा 12वीं कक्षा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चौथ का बरवाड़ा के पास की ती। उसने तीनों ही परीक्षाओं में तहसील क्षेत्र में प्रथम रैंक हासिल की। इसके बाद उसने कोटा यूनिवर्सिटी से साइंस मैथ लेकर बीएससी की परीक्षा पास की तथा पूरी यूनिवर्सिटी में तीसरा स्थान हासिल किया।

जितेंद्र ने बताया कि पढ़ाई में होशियार होने से पिता हरफूल बैरवा ने गरीबी के बावजूद उसकी पढ़ाई करवायी। बीएससी के बाद उसे दिल्ली में कोचिंग करवाया। बनवारी लाल के पांच भाई व तीन बहने हैं। इनका एक भाई जितेंद्र बैरवा सरकारी शिक्षक है। जिसका चयन एक साल पहले ही हुआ था। जबकि तीन भाई निजी क्षेत्र में कार्य करते है। बनवारीलाल रोज 6 से 7 घंटे पढ़ाई करता था।

4. पुलिस की नौकरी करते हुए भी आरएएस में पाई सफलता

जिले के चौथ का बरवाड़ा तहसील क्षेत्र के बलरिया के ही एक युवक ने पुलिस में नौकरी करते हुए आरएएस में सफलता प्राप्त की है। लक्ष्मी चंद मीणा पुत्र जगराम मीणा इससे पहले 8 साल पहले राजस्थान पुलिस में एसआई की परीक्षा भी पास कर चुके है। जिन्होंने अपने बिजी शेड्यूल के बावजूद आरएएस में एसटी वर्ग में 12 तथा सामान्य में 392 रैंक हासिल की है।

लक्ष्मी चंद।
लक्ष्मी चंद।

लक्ष्मी चंद बताते है कि वह 2006 में पटवारी बने थे। 2010 में राजस्थान पुलिस एसआई बने। उन्होंने पूरी पढ़ाई चौथ का बरवाड़ा से ही की थी। वह राजकीय सेवा में होने के बावजूद भी नियमित अध्ययन करते थे। फिलहाल वह जयपुर में मुख्यमंत्री सिक्योरिटी में तैनात है। वह रोजाना 6 से 8 घंटे पढ़ाई करते थे। इसी के साथ अपनी मुख्यमंत्री सिक्योरिटी में भी दे रहे थे।

उन्होंने सेवा और पढ़ाई को नियमित रखते हुए आरएएस की तैयारी की और सफलता हासिल की। इनका एक भाई रेलवे में इंजीनियर है तथा एक भाई पढाई करता हैं। जबकि माता पिता गांव में रहकर खेती का कार्य करती है।

पिता ने किया प्रेरित तो ठाना अधिकारी बनने का
5. अमित सक्सेना ने आरएएस 2018 में फाइनल सलेक्शन प्राप्त किया है। उन्होनें डिपार्टमेंटल कोटे से राजस्थान में तीसरी रेंक हासिल की है। अमित फिलहाल सवाई माधोपुर डिप्टी रजिस्टार कॉपरेटिव में कलर्क के पद पर कार्यरत है। उनका इस पद पर 2018 में सलेक्शन हुआ था।

अमित सक्सेना।
अमित सक्सेना।

अमित के पिता दिवाकर सक्सेना शिक्षा विभाग से कलर्क के पद से सेवानिवृत्त है। उनकी माता एक गृहणी है। अमित के दो भाई व एक बहिन है। अमित सवाई माधोपुर शहर के बिजली ऑफिस के पास रहते है। अमित ने अपनी पढाई सवाई माधोपुर से ही पूरी की थी। उन्होंने अपनी 12 वीं तक पढाई हाई सेकेण्डरी स्कूल सवाई माधोपुर से की थी। उसके बाद सरकारी कॉलेज सवाई माधोपुर से बीएससी की व कोटा ओपन यूनिवर्सिटी से एमएससी की। अमित बताते है कि उनके पिता ने उन्हें अधिकारी बनने के लिए प्रेरित किया तो उन्होंने अधिकारी बनने की ठानी और अपना सपना पूरा किया।

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