अवैध चराई:खटोला में अवैध चराई के खिलाफ 8 किमी पैदल चलकर की कार्रवाई

सवाई माधोपुर2 महीने पहले
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खंडार | उबड़ खाबड़ रास्तों से गुजरती वन विभाग की टीम। - Dainik Bhaskar
खंडार | उबड़ खाबड़ रास्तों से गुजरती वन विभाग की टीम।

रणथंभौर राष्ट्रीय अभयारण्य में अवैध चराई के खिलाफ वन विभाग की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। भारी बारिश के बीच हुई इस कार्रवाई में वनाधिकारियों के वाहन फंस गए। इसके बाद भी टीम ने हिम्मत नहीं हारी और रात के अंधेरे में ही 3 हजार मीटर ऊंची पहाड़ियाें पर करीब 8 किलोमीटर पैदल चल कार्रवाई को अंजाम देकर ही वापस लौटी। वन विभाग की टीम ने बताया कि पादड़ा विस्थापित गांव के 10-12 लोगों ने मंत्रणा कर क्षेत्र में हो रही भारी बारिश का फायदा उठाते हुए रणथंभौर राष्ट्रीय अभयारण्य की खंडार रेंज के खटोला डांग क्षेत्र में अवैध चराई के लिए भैंसें चढ़ा दी थी। इसकी जानकारी मिलते खंडार क्षेत्रीय वनाधिकारी विष्णु गुप्ता के नेतृत्व में तीन वाहनों से करीब 25 कर्मचारियों की टीम कार्रवाई के लिए गिलाईसागर नाके से रवाना हुई।

इसी दौरान लगातार हो रही बारिश से अभयारण्य की रांवरा डांग के रास्ते में टीम के सभी वाहनों के टायर जमीन में धंस गए और वह पूरी तरह से फंस गए। टीम द्वारा वाहनों को निकालने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन वाहन एक कदम भी आगे नहीं बढ़े। बाद में टीम वाहनों को वहीं छोड़कर कार्रवाई के लिए पैदल ही रवाना होकर मौके पर पहुंची। मौके पर जंगल में सैकड़ों भैसें चर रही थी, जिन्हें टीम द्वारा खदेड़कर अभयारण्य से बाहर निकाला गया।

इस पूरी कार्रवाई के दौरान टीम को मौके पर ही रात हो गई थी। बाद में टीम मौके से पैदल रवाना होकर बड़ी मशक्कत के साथ गिलाईसागर चौकी पर पहुंची थी।जंगल में रास्ता भटकी टीमटीम ने बताया कि इस पूरी कार्रवाई के दौरान ऊपर से बारिश हो रही थी। वहीं नीचे जमीन पर पहाड़ी इलाके के चिकनी मिट्टी युक्त उबड़ खाबड़ रास्ते थे, जिससे कई बार वह रास्ते में भी गिर गए थे, जिन्हें एक दूसरे ने संभाला था। रात के अंधेरे में मोबाइल की रोशनी से वह आगे बढ़ते रहे, लेकिन कई बार अभयारण्य में वह रास्ता भी भटके।

अभयारण्य में कई स्थानों पर नालों में पानी की भारी निकासी हो रही थी, जिससे टीम आसानी से जंगल से बाहर नहीं निकल पाई। रात के अंधेरे में 8 किलोमीटर पैदल चली टीमवन विभाग की यह पूरी कार्रवाई 11 घंटे तक चली। सुबह 12 बजे टीम कार्रवाई के लिए गिलाईसागर नाके से निकली थी तथा रात 11 बजे वह वापस गिलाईसागर नाके पर पहुंची थी। इस कार्रवाई के दौरान वन विभाग की टीम जमीन से करीब 3 हजार मीटर ऊंची पहाड़ियाें पर 8 किलोमीटर अभयारण्य में पैदल चली थी। टीम ने बताया कि उनके वाहन अभी भी मौके पर ही फंसे हुए हैं। आबादी क्षेत्र में मगरमच्छ बगैरा आ जाए तो इसके लिए क्षेत्रीय वनाधिकारी द्वारा एक फ्लाइंग की गाड़ी व बालेर रेंज की गाड़ी को मुख्यालय पर बुलाया गया है।

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