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प्रशासन की अनदेशी:अस्पताल परिसर में व्यवस्थाएं बदहाल दीवारों में दरारों के साथ गंदगी से अटे शौचालय

सवाई माधोपुर13 दिन पहले
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  • करीब पांच लाख मरीज आते हैं सालभर में, इनमें से 50 से 60 हजार होते हैं भर्ती, मरीजों के परिजनों को सर्द रात गुजारने में हो रही परेशानी

जिला मुख्यालय स्थित सामान्य चिकित्सालय में आने वाले मरीजों के परिजनों को रात्रि के समय आश्रय देने के लिए करीब 5-7 वर्ष पूर्व लाखों की लागत से बनाई गई धर्मशाला अनदेखी व अव्यवस्थाओं की भेंट चढी हुई है। धर्मशाला की दीवारों में जगह-जगह दरारें पडने के साथ ही सारसंभाल के अभाव में दीवारों में सीलन आने से प्लास्टर झड़ रहा है। कमरों के अटैच में बने शौचालयों के हालात भी खराब है। वाशबेशन की महीनों से सफाई नहीं होने से पीक से सने होने के साथ ही कचरे से अटे पडे हैं। इन कमरों की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है, जैसे महीनों से इन कमरों में किसी ने आश्रय नहीं लिया। आखिर लें भी कैसे, हालात जो खराब है। यदि स्वस्थ आदमी भी इस आश्रय स्थल के कमरे में एक रात गुजार ले, तो वह भी बीमार हो जाए। डॉरमेट्री व सिंगल कमरों में लगे बिस्तरों पर काई व धूल मिट्‌टी छाई होने से बदबू मार रहे हैं।4 से 5 लाख मरीज आते हैं हर सालजिला अस्पताल में हर साल करीब 4 से 5 लाख मरीज इलाज के लिए आते हैं। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2015 में अस्पताल में कुल 4 लाख 10 हजार 600 मरीज आए थे। इनमें से 39 हजार 107 मरीजों को भर्ती किया गया। इसके मुकाबले वर्ष 2019 में जिला अस्पताल में 5 लाख 24 हजार 10 मरीज आए थे। इनमें से 4 लाख 73 हजार 358 ओपीडी में आए थे व 50 हजार 652 मरीज भर्ती किए गए थे। वर्ष 2020 में कोरोना के चलते करीब 5 माह लॉकडाउन रहने के बावजूद नवंबर माह तक 3 लाख 62 हजार 732 मरीज अस्पताल आए। इनमें ओपीडी में 3 लाख 25 हजार 242 व 37 हजार 490 मरीज भर्ती हुए। अस्पताल परिसर में खुले में सोने को मजबूर तीमारदार: सामान्य चिकित्सालय में इलाज के लिए आस-पास के जिलों के ग्रामीण क्षेत्र सहित मध्यप्रदेश से आने वाले मरीजों के परिजन इन दिनों सर्द रातें खुले आसमान में नीचे बिताने को मजबूर है। रात्रि के समय मरीज के साथ एक अंटेडेंट को ही ठहरने की अनुमति है। ऐसे में मरीज के साथ अन्य परिजन जाएं तो कहां। हालांकि मरीजों के परिजनों को आवास सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एक धर्मशाला चिकित्सालय परिसर में व दूसरी जनता धर्मशाला सीएमएचओ कार्यालय के बगल में बनी हुई है, लेकिन दोनों ही धर्मशालाएं तीमारदारों के लिए अनुपयोगी साबित हो रही है।अस्पताल के पास दो धर्मशालाएं, दोनों अनुपयोगीसामान्य चिकित्सालय परिसर में दो धर्मशालाएं बनी हुई है। इनमें से एक धर्मशाला में इन दिनों एनआरएचएम कार्यालय संचालित हो रहा हैं, वहीं दूसरी में इंदिरा रसोई। हालांकि जिस धर्मशाला में इंदिरा रसोई संचालित होती है, इसमें मरीजों के तीमारदारों के ठहरने की व्यवस्था कर रखी है, लेकिन अस्पताल के पीछे बनी होने से इस धर्मशाला तक हर कोई आसानी से नहीं पहुंच सकता। इस कारण दोनों ही धर्मशालाओं का लाभ मरीजों के परिजनों को नहीं मिल रहा है।^मैंने हाल ही में ज्वॉइन किया है, इसलिए धर्मशाला कब और कितने की लागत से बनी हैं, इसकी मुझे जानकारी नहीं हैं। -9 ओ.पी. किराड, एक्सईएन, एनआरएचएम^धर्मशाला के संचालन की जिम्मेदारी एनजीओ को दे रखी है। धर्मशाला में अव्यवस्थाएं हैं तो संबंधित को निर्देशित कर सुधार करवा देंगे।-9 बी.एल. मीना, पीएमओ, सामान्य चिकित्सालय

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