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सादगी से मनाई ईद-उल-अजहा:अमन-चैन व खुशियों के लिए दुआ मांगी, कोरोना के चलते घरों में ही अदा की ईद की नमाज

सवाई माधोपुर13 दिन पहले
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घर में ईद की नमाज अदा करता एक बच्चा। - Dainik Bhaskar
घर में ईद की नमाज अदा करता एक बच्चा।

पूरे जिले में कुर्बानी का त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) बुधवार को हर्षोल्लास से मनाया गया। ईदगाहों एवं मस्जिदों में ईद की नमाज के लिए सुबह से ही लोग जुटने लगे। जिला अस्पताल के पीछे स्थित ईदगाह पर ईद की नमाज अदा की गई। कोरोना के चलते ईदगाह व सभी मस्जिदों पर चुनिन्दा लोगो ने ही नमाज अदा की जबकि लोगों को अपने घर में रहकर नमाज अदा की। नमाजियों ने अमन-चैन व खुशियों के लिए दुआ मांगी।

ईदगाह में सुबह 7.30 बजे की ईद की नमाज शहर काजी निसारउल्लाह ने अदा करवाई तथा ईद का कुतबा दिया जबकि अन्य सभी मस्जिदों में ईद की नमाज सुबह 6.30 बजे अदा की। बकरीद की नमाज अदा करने के बाद घरों में जानवरों की कुर्बानी की गई। ईद उल अजहा का पर्व जिले भर में धूमधाम से मनाया गया। ईद पर ईदी देने की परम्परा के चलते छोटे बच्चों ने अपने बड़ों से ईदी ली।

इस्लाम में गरीबों और मजलूमों का खास ध्यान रखने की परंपरा है। इसी वजह से बकरीद पर भी गरीबों का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस दिन कुर्बानी के बाद तीन हिस्से किए जाते हैं जिसमें एक हिस्सा खुद के लिए और शेष दो हिस्से समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों में बांट दिए जाते हैं। इस्लाम में ईद-उल-फितर या बड़ी ईद के बाद दूसरा सबसे बड़ा त्योहार बकरीद को माना जाता है। बकरीद को इस्लाम में कुर्बानी के त्योहार के तौर पर जाना जाता है। बकरीद का त्योहार इस्लामी कैलेंडर के आ़खरी महीने जुल-हिज्जा में मनाया जाता है।

प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम
ईदु उल जुहा पर त्यौहार पर जिला मजिस्ट्रेट राजेन्द्र किशन ने मंंगलवार को जिले में साम्प्रदायिक सद्भाव, कानून एवं शांति व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के लिए सभी उपखण्ड मजिस्ट्रेट को कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया था।

इसी के साथ कोविड-19 गाइडलाइन की पालना सुनिश्चित करवाने के लिए सभी उपखण्ड मजिस्ट्रेट को इसकी जिम्मेदारी सौंपी थी। प्रशासन की सख्ती व भीड़भाड़ पर रोक के चलते इस बार बाजारोंं में बकरीद की रौनक फीकी ही रही। लोगों ने अपने घरों में रहकर बड़ी सादगी के साथ त्योहार मनाया।

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