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रणथम्भौर से आ सकती है फिर खुशखबरी:बाघिन टी-99 ने एक ही जगह डाला डेरा, जल्द ही मां बनने के आसार; वन विभाग बाघिन की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा

सवाई माधोपुर6 दिन पहले
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बाघिन टी-99 के शारीरिक बदलाव। - Dainik Bhaskar
बाघिन टी-99 के शारीरिक बदलाव।

रणथम्भौर नेशनल पार्क से एक बार फिर खुशखबरी आ सकती है। इस बार जोन नम्बर दस पर विचरण करने वाली बाघिन टी-99 के मां बनने और शावकों को जन्म देने की संभावना जताई जा रही है। इस बाघिन के शावकों को जन्म देने के बाद रणथम्भौर में बाघों के कुनबे में और बढ़ोतरी होगी। जिसके बाद रणथम्भौर में अब तक की बाघों की सर्वाधिक संख्या होगी।

वाइल्ड लाइफ स्पेशलिस्ट व सूत्रों के अनुसार बाघिन की संरचना में बदलाव दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में बाघिन के शावकों को जन्म देने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी तक बाघिन शावकों के साथ नजर नहीं आई है। और ना ही फोटो ट्रैप कैमरों में शावकों के साथ कैद हुई है।

ऐसे में इस संबंध में वन विभाग की ओर से इसकी पुष्टि नहीं गई है, लेकिन जानकारों के अनुसार बाघिन की शारीरिक संरचना में बदलाव उसके मां बनने की ओर इशारा कर रहे है। सूत्रों के अनुसार यह बाघिन पिछले कुछ दिनों से एक ही जगह पर डेरा डाले हुए है। बाघिन की शारीरिक संरचना एक ही जगह डेरा डाले रखने से इसके शावकोंं को जन्म देने की संभावना को बल मिला है जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही रणथम्भौर से एक बार फिर खुशखबरी आ सकती है।

पहली बार बनेगी मां

बाघिन की शारीरिक संरचना में बदलाव को देखते हुए बाघिन टी-99 शावकों को जन्म दे सकती है। अगर यह बाघिन शावकों को जन्म देती है तो यह पहली बार मां बनेगी। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस बाघिन की उम्र करीब चार साल है। बाघिन टी-99 बाघिन टी-60 की बेटी है। यह बाघिन टी-60 के दूसरी बार की संतान है।

यह है बाघिन टी-99 की टेरेटरी

वनाधिकारियों के अनुसार बाघिन-99 रणथम्भौर के जोन दस में विचरण करती है। इसकी टेरेटरी जोन नम्बर दस में बोदल वन क्षेत्र, कैलाश पुरी चौकी आदि इलाकों में रहता है। यह अक्सर इसी इलाके में पर्यटकों को अपने दीदार कराती है।

जोन नम्बर दस के एंट्री गेट पर आ रही आजकल नजर

सूत्रों के अनुसार बाघिन टी-99 पिछले कुछ दिनों से पर्यटकों को रणथम्भौर के जोन नम्बर दस के मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास के क्षेत्र में लगातार नजर आ रही है। ऐसे में उसी क्षेत्र के आसपास बाघिन के शावकों को जन्म देने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि वन विभाग एहतियात के तौर पर बाघिन की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। वन विभाग की ओर से जोन दस के प्रवेश द्वार व उसके आसपास के क्षेत्र में मॉनिटरिंग व ट्रैकिंग के लिए फोटो ट्रैप कैमरे भी लगाए गए हैं।

इनका कहना है
बाघिन की शारीरिक संरचना में बदलाव नजर आ रहा है। मॉनिटरिंग के लिए फोटो ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। हालांकि अभी तक बाघिन शावकों के साथ नजर नहीं आई है - एसएन सारस्वत, रेंजर, फलौदी, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधेापुर।

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