अनदेखी:बालेरे की पहाड़ियों में बसे गांवों के लोगों के हलख सूखे

सवाई माधोपुर6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
बालेर। हेंडपम्प सुधारो अभियान की पोल खोलते ये हेंडपम्प। - Dainik Bhaskar
बालेर। हेंडपम्प सुधारो अभियान की पोल खोलते ये हेंडपम्प।
  • बालेर पंचायत की पहाड़ियों में बसे गांवों में नहीं हुआ विकास, हैंडपंप सुधारने के नाम पर खानापूर्ति

बालेर पंचायत समिति खंडार की ग्राम पंचायत बालेर के दुर्गम पहाडिय़ों में बसे भीमपुरा(बेरई),श्रीनाथपुरा, विश्वनाथपुरा गांव के ग्रामीणों को आजादी के बाद से ही गांव ढाणियों के विकास की उम्मीदों को आज भी पंख नही लग पाए हैं।बालेर पंचायत के दुर्गम पहाडिय़ों में बसे इन गांवों में यहां के बाशिंदों को आज भी मूलभूत सुविधाओं का इंतजार है। लेकिन कोई सुनने बाला नही होने के कारण यहां के बाशिंदे आज भी नारकीय जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं।मूलभूत सुविधाओं का टोटाबालेर पंचायत के इन गांव ढाणियों में बिजली ,पानी,सड़क शिक्षा, चिकित्सा जैसी अहम सुविधाओं का अभाव लोगो के लिए टीस बना हुआ है।

दुर्गम पहाडिय़ों से गुजर कर लगभग 8-15 किमी दूर बालेर कस्बे में जाकर रोजमर्रा उपयोग में आने वाली सामग्री सहित चिकित्सा सेवाओं का लाभ भी दुर्गम पहाडिय़ों से गुजरने के बाद नसीब होती है। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की लेकिन नतीजा शून्य ही रहा।ऐसे में लोगो को मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिलता दिखाई नहीं दे रहा है। दुर्गम पहाडिय़ों में बसे इन गांवों के बाशिंदों की प्यास बुझाने का एक मात्र साधन हैंडपंप ही है। इनमे बिगत कई वर्षों से दो हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। महिलाओं छोटी छोटी बच्चियों को पानी के जुगाड़ के लिए भरी दुपहरी भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है।

हैंडपंपों में कुछ देर पानी निकलता है। इसके बाद हवा फेकना शुरू कर देते हैं। कुछ समय बाद पानी इकट्ठा होने का इंतजार रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल हो गया है। अभी हैंडपंप सुधारने के अभियान में खराब पड़े हेंडपम्पो की कोई सुध नहीं ली गई। चंद दिनों बाद भीषण गर्मी में लोगो की प्यास बुझाने के लिए प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के पास कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है।

खबरें और भी हैं...