बच्चों की सुरक्षा के लिए सावधानी जरूरी:15 अप्रैल से अब तक 7 बच्चे पॉजिटिव, शिशु वार्ड में मरीज घटे

सवाई माधोपुर6 महीने पहले
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  • संक्रमण के चलते एमसीएच यूनिट के बच्चा वार्ड में बेड होने लगे खाली

जिले में उच्च स्तर पर फैल रहे कोरोना संक्रमण के चलते अब एक से 10 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चे भी संक्रमण की चपेट में आने लगे हैं। अप्रैल माह में अब तक 7 बच्चों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इससे चिकित्सा विभाग के साथ ही परिजनों की भी परेशानी बढ़ गई है। बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण सामान्य चिकित्सालय में स्थित मातृ एवं शिशु इकाई में 15 दिन पहले तक वार्ड में क्षमता से अधिक भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या अब 50 से घटकर 8 से 10 रह गई है।बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती हैमार्च 2020 से अब तक यह पहला मौका था, वार्ड में भर्ती बच्चों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई हो। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों के संक्रमित के पीछे परिजनों की लापरवाही रही है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।

24अप्रैल काे 28 बेड की क्षमता वाले वार्ड में केवल 3 बच्चे24 अप्रैल को तो 28 बेड की क्षमता वाले दोनों वार्ड में केवल 3 बच्चे भर्ती थे।सामान्य चिकित्सालय से मिली जानकारी के अनुसार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई में पहली बार 15 अप्रैल को 3 बच्चों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। इसके बाद दूसरे दिन भी फिर से 3 बच्चे संक्रमित मिले। इसके बाद 20 अप्रैल को एक बच्चे की रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

20 अप्रैल के बाद से वार्ड में खाली होने लगे बेड

एमसीएच यूनिट में इलाज के लिए आने वाले बच्चों को भर्ती करने के लिए 28 बेड है। मौसमी बीमारियां बढ़ने से बीमार बच्चों से यह वार्ड भरा रहता है। एक ही बेड पर दो-दो बच्चे तक भर्ती करने पड़ते हैं। अप्रैल माह के शुरूआत में एक अप्रैल को वार्ड में 66 भर्ती थे। 8 अप्रैल को इनकी संख्या बढकर 71 तक पहुंच गई। लेकिन 20 अप्रैल के बाद जिले में रिकॉर्ड तोड़ कोरोना पॉजिटिव केस आने के बाद से अस्पताल में भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या में कमी आती चली गई। 22 अप्रैल को शिशु वार्ड में 20 व 23 को 16 बच्चे भर्ती थे, जो 24 अप्रैल को केवल 3 बच्चे रह गए। हालांकि 25 को इनकी संख्या बढ़कर 11 हो गई। 28 अप्रैल को 10 बच्चे भर्ती थे।

पिछले एक सप्ताह से भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या में कमी आई है। संक्रमण के कारण लोग बच्चों को अस्पताल में दिखाने के बाद दवा लेकर घर चले जाते हैं। स्थिति खराब होने पर ही अस्पताल में भर्ती करवाते हैं।-डॉ. सियाराम मीना, वरिष्ठ विशेषज्ञ, शिशु रोग

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