जिला अस्पताल में नहीं हृदय रोग विशेषक:एक माह में आते है 500 मरीज, ईसीजी जांच के बाद कर देते है रेफर, इको कार्डियालॉजी व इको टू डी कलर डॉलपर मशीन ताले में बंद

सवाई माधोपुर2 महीने पहले
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जिला अस्पताल सवाई माधोपुर। - Dainik Bhaskar
जिला अस्पताल सवाई माधोपुर।

जिले में हृदय रोगियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रहा है। जिले की आबादी फिलहाल करीब 15 लाख के आस पास है, लेकिन जिला अस्पताल में एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में जिले के ह्रदय रोगियों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है। हृदय संबंधित रोगों के उपचार की सुविधाओं के मामले में जिला अस्पताल सहित जिले के सभी अस्पतालों के हालात बदहाल है। जिला अस्पताल में आने वाले हृदय के रोगियों को इलाज के नाम पर सिर्फ रेफर कार्ड पकड़ा दिया जाता है। ऐसे में कई बार गंभीर हालत में जयपुर या कोटा ले जाना पड़ता है। जिनके के साथ रास्ते में किसी अनहोनी का डर बना रहता है।

1 माह में करीब 500 मरीज

जिले की 15 लाख की आबादी में जिला अस्पताल में एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। जिला अस्पताल में एक भी स्थाई कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण जिलेभर के सभी लोगों को इलाज के लिए अन्य जिलों का रुख करना पड़ता है। जिलेभर से रोजाना औसतन 15 से 20 हृदय रोगी जिला अस्पताल के आउटडोर में उपचार व परामर्श के लिए आते हैं, लेकिन इन रोगियों को यहां उच्च स्तर जांच सुविधा नहीं मिल रही है। यहां ईसीजी में बीमारी का संकेत नजर आने पर डॉक्टर रोगी के परिजनों को जयपुर रेफर कराने की सलाह देते हैं। जिससे मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इन मरीजों को जयपुर या कोटा जाकर इलाज करवाना आर्थिक रूप से भी महंगा पड़ रहा है।

इको कार्डियोलॉजी मशीन को संचालित करने के लिए नहीं है स्टाफ

जिला चिकित्सालय में हृदय संबंधी रोगों की केवल ईसीजी जांच की सुविधा उपलब्ध है। यहां जांच के लिए इको कार्डियोलॉजी मशीन तो है, लेकिन इसे संचालित करने के लिए कोई स्टाफ नहीं है। फिलहाल यहां डॉक्टर ईसीजी कराने के बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर रोगी को आईसीयू वार्ड में भर्ती कर प्रारंभिक उपचार शुरू कर देते हैं। तबीयत ज्यादा खराब होने की स्थिति में उन्हें रेफर कर दिया जाता है।

इको टू डी कलर डॉपलर मशीन के लिए भी नहीं है स्टाफ

जिला अस्पताल में इको टू डी कलर डॉपलर मशीन लम्बे समय खराब रहने के बाद सही करा दी गई है, लेकिन इसके लिए भी कोई स्टाफ नियुक्त नहीं होने से अस्पताल प्रशासन ने मशीन को ताले में बंद कर रखा है। जिसकी वजह से रोगियों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। इसके पीछे अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि जब मशीन को संचालित करने वाला ही कोई नहीं है तो इसको खोलने से भी कोई फायदा नहीं है।

जिला अस्पताल में फिलहाल कार्डियोलॉजिस्ट का एक भी पद स्वीकृत नहीं है। इको कार्डियोलॉजी व इको टू डी कलर डॉपलर मशीन को संचालित करने के लिए भी स्टाफ नहीं है। ऐसे में यहां पर हृदय रोगियों का समुचित उपचार नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है।

डॉ. बीएल मीणा, पीएमओ, जिला अस्पताल सवाईमाधोपुर।