राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश:रणथंभौर वन क्षेत्र में प्रतिबंधित एक हजार मीटर में 10 साल में हुए अवैध निर्माण ध्वस्त करने होंगे

सवाई माधोपुर2 महीने पहले
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  • रीट पीटिशन पर सुनाया फैसला, प्रशासन ने कहा, आदेश अस्पष्ट इसलिए दुबारा की जाएगी सुनवाई की अपील

रणथम्भौर वन क्षेत्र की प्रतिबंधित सीमा एक हजार मीटर के दायरे में दस साल के अंदर हुए निर्माणों को हटाया जाएगा। इस सम्बन्ध में राजस्थान हाईकोर्ट ने एक रिट पिटिशन पर निर्णय सुनाते हुए आदेश जारी किए हैं। साथ ही आदेशों की कॉपी पालना के लिए प्रधान वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक, ईसीई सचिव वन और कलेक्टर सवाईमाधोपुर को भेजने के आदेश भी दिए हैं। दूसरी तरफ जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों का कहना है कि न्यायालय का आदेश अस्पष्ट है साथ ही एक ही पक्ष को सुन कर दिया गया है।

ऐसे में सरकार की तरफ से दुबारा इस मामले की सुनवाई के लिए न्यायालय में अपील कर अपना पक्ष रखा जा कर स्पष्ट निर्देश के लिए आग्रह किया जाएगा। राजस्थान हाईकोर्ट में लड्‌ड़ो पत्नी शमीम व राना पत्नी रईस निवासी रणथम्भौर रोड ने पिटिशन दायर की थी कि जिसमें उनकी जमीन खसरा नंबर 4600 व 4601 जोन 6 की सीमा से 551 मीटर की दूरी पर है जिस पर निर्माण की इजाजत वन विभाग द्वारा नहीं दी जा रही है। जबकि खसरा नम्बर 4612 पिल्लर नम्बर 278 से केवल 480 मीटर दूरी पर है, जिसे निर्माण के लिए वन विभाग से निर्माण के लिए अनापत्ति जारी कर दी है। इस पिटिशन पर निर्णय सुनाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है कि वन विभाग द्वारा प्रतिबंधित वर्तमान सीमा के अनुसार, याचिकाकर्ता की अनापत्ति देने की प्रार्थना स्वीकार नहीं की जा सकती है। क्योंकि वन विभाग की वास्तविक प्रतिबंधित सीमा कम से कम 1000 मीटर की दूरी पर है।

याचिकाकर्ताओं की शिकायतों के संबंध में अदालत ने सीमाओं के माप से संबंधित कुछ विसंगति को पाया

न्यायालय ने आदेशों में बताया कि याचिकाकर्ताओं की शिकायतों के संबंध में अदालत ने पाया कि सीमाओं के माप से संबंधित कुछ विसंगति प्रतीत होती है। ऐसे में उप संरक्षक वन, रणथंभौर को सख्त हिदायत दी जाएगी कि पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी भवन के निर्माण की अनुमति देने के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें और वन क्षेत्र को चिह्नित करने वाले स्तंभों से कम से कम एक हजार मीटर की दूरी को निर्माण से मुक्त रखे। यदि एक हजार मीटर के भीतर कोई भी भवन निर्मित पाया जाता है तो वन विभाग द्वारा निर्धारित सीमा तक भवनों को गिराने की कार्रवाई की जाएगी।

10 साल से अधिक समय से अनुमत होटल्स को परेशान नहीं किया जाएगा न्यायालय ने आदेशों में बताया कि बाघ अभयारण्य मानव अभयारण्य के चारों ओर एक हजार मीटर दूर क्षेत्र को पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के रूप में माना जाएगा। इस क्षेत्र में कोई भी इमारत है तो वन विभाग संबंधित इमारत स्वामियों को नोटिस जारी कर तथा सुनवाई का अवसर देने के बाद वन सीमा एक हजार मीटर से अधिक के क्षेत्र में किसी अन्य क्षेत्र में स्थानांतरित/पुनर्वास करेगा। यदि आस-पास कोई पुरानी विरासत की इमारतें हैं तथा 10 साल से अधिक समय से अनुमत होटल हैं, उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा। मुख्य अभयारण्य की सीमाओं के बाहर एक हजार मीटर के भीतर मौजूद भवन में आगे निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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