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वन्य प्रेमियों में खुशी की लहर..:मॉनिटरिंग में खुलासा...खंडार के तारागढ़ दुर्ग में हो रहा बाघ, पैंथर, भालू और बघेराें का मूवमेंट

सवाई माधोपुर9 दिन पहले
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  • तारागढ़ दुर्ग को ट्यूरिज्म रूट में शामिल करने के भेजे प्रस्ताव; क्योंकि
  • दुर्ग बनेगा पर्यटन हब...दुर्ग क्षेत्र में स्वतंत्र विचरण करते वन्यजीव, टीमें कर रही गश्त

नंदलाल शर्मा | खंडार का तारागढ़ दुर्ग इन दिनों रणथंभौर राष्ट्रीय अभयारण्य के वन्य जीवों को रास आ रहा है। किले में सेंचुरी के बाघ, पैंथर, भालू, बघेरा, जरख सहित कई वन्य जीव स्वतंत्र विचरण कर रहे हैं। इससे इस ऐतिहासिक दुर्ग में पर्यटन की अपार संभावनाओं को बल मिलता नजर आ रहा है। वहीं वन्य जीव प्रेमियों में खुशी की लहर है।वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार तारागढ़ दुर्ग में रणथंभौर राष्ट्रीय अभयारण्य के बाघ टी-3 व टी-65 बारी बारी से आए दिन विचरण कर रहे हैं।

इसके अलावा इस किले में तीन पैंथरों का स्थायी विचरण है। इसमें एक नर व मादा पैंथर का (जोड़ा) तथा एक गर्भवती पैंथर शामिल है, जिसके बच्चे देने की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा इस दुर्ग में दो बच्चों सहित भालुओं का भी विचरण है। वहीं जरख, बघेरा, कवरबिज्जू, नेवला, सांभर, नीलगाय सहित अन्य वन्य जीव भी विचरण कर रहे है। इतना ही नहीं पिछले दिनों कानेटी गांव में चरवाहे पप्पू गुर्जर को मौत के घाट उतारकर बाघ टी-123 पुन: किला खंडार में वापस आया था। इसका पूरा खुलासा वन विभाग द्वारा इन दिनों की जा रही विशेष मॉनिटरिंग में हुआ है।उक्त क्षेत्र (किला खंडार) वन खंड से घिरा हुआ है तथा किला खंडार में प्राकृतिक आवास होने से शाकाहारी एवं मांसाहारी वन्यजीव रहते है।

दुर्ग में 6 से अधिक स्थानों पर लगाए कैमरे, दो माह से पर्यटन हब बनाने के प्रयासों में विभाग

पिछले करीब दो माह से वन विभाग द्वारा इस दुर्ग को पर्यटन हव बनाने के प्रयास चल रहे है। इसके लिये रणथंभौर बाघ परियोजना सवाई माधोपुर के उपवन संरक्षक महेंद्र शर्मा द्वारा इस किले को ट्यूरिज्म रूट में शामिल करते हुए जयपुर के उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव बनाकर भेजे जा चुके हैं। वहीं उच्चाधिकारियों के आदेश पर खंडार क्षेत्रीय वनाधिकारी विष्णु गुप्ता द्वारा पिछले करीब दो माह से इस दुर्ग एवं इसमें विचरण करने वाले तमाम वन्य जीवों की विशेष मॉनिटरिंग की जा रही है। दुर्ग में 6 अधिक स्थानों पर कैमरे फिट कर रखे है। वहीं वन विभाग की विभिन्न टीमों द्वारा प्रतिदिन किले की पैदल गश्त कर किले एवं विचरण करने वाले वन्य जीवों के मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है।

पूर्व में राजा महाराजाओं का था ठिकाना यह किला पूर्व में राजा महाराजाओं का ठिकाना रहा है, जिसके सबूत किले में मौजूद हजारों वर्ष पुरानी बड़ी बड़ी चट्टानों, महलों, मन्दिरों एवं पत्थरों पर प्राचीन भाषा में लिखे शिलालेखों पर मौजूद हैं। हालांकि यह किला किसने बनाया इसके इतिहास के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है। यह पूरा इलाका पूर्व में व्यापारिक दृष्टि से भी बड़ा केंद्र रहा है। रणथंभौर पर अल्लाउद्दीन खिलजी ने बार-बार आक्रमण का प्रयास किया था इस दौरान क्षेत्र के छाण में खिलजी द्वारा अपनी विशाल सेना के साथ कई दिनों तक पड़ाव डाला गया। उस समय खिलजी ने खंडार के तारागढ़ दुर्ग पर भी आक्रमण का प्रयास किया था जिसमें वह विफल रहा था।

ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है दुर्ग : तारागढ़ दुर्ग समृद्ध विरासत होने के साथ साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। सुरक्षा की दृष्टि से किले के चारों तरफ अभेद्य परकोटा बना हुआ है। इसमें विख्यात जैन मंदिर, जयंती माता मंदिर, चतुर्भुजनाथ मन्दिर, हनुमान मंदिर, शिवालय सहित कई मंदिर, मस्जिद व मजार मौजूद है। इसके अलावा किले में राजारानी महल, हवा महल, कई ऐतिहासिक ईमारतें, छतरियां, शस्त्रागार, सैनिक चौकिया, घुड़साल सहित सात कुंड मौजूद है। अगर यह दुर्ग ट्यूरिज्म से जुड़ता है तो इसमें पर्यटकों को वन्यजीवों के दीदार के साथ साथ ऐतिहासिक धरोहर को निहारने का भी मौका मिलेगा।

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