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चंबल में बढ़ा घड़ियालों का कुनबा:एक वर्ष में घड़ियाल की संख्या बढ़कर 54 हुई, 9 प्रजाति के कछुए मिले

सवाई माधोपुरएक महीने पहले
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सवाई माधोपुर| चंबल नदी के किनारे बैठे घड़ियाल के बच्चे। - Dainik Bhaskar
सवाई माधोपुर| चंबल नदी के किनारे बैठे घड़ियाल के बच्चे।
  • गणना में मगरमच्छ व डॉल्फिन सहित अन्य जलीय जीवों के कुनबे में भी हुई बढ़ोतरी

राष्ट्रीय चंबल घड़ियालाें अभयारण्य में जलीय जीवों की गणना की रिपोर्ट आ चुकी है। राजस्थान में 395 किमी. के दायरे में बह रही चंबल में 22 फरवरी से शुरू हुई गणना के दौरान विभिन्न घाट व टापुओं पर की गणना में गत वर्ष की अपेक्षा घडिय़ाल सहित अन्य जलीय जीवों के कुनबे में वृद्धि हुई है। गत वर्ष हुई गणना के मुकाबले इस वर्ष चंबल नदी में 54 घड़ियालाें अधिक मिले हैं। खुशी की बात यह है कि इस बार घडिय़ाल के साथ ही मगरमच्छ व डॉल्फिन की संख्या में भी वृद्धि हुई है।

खास बात यह है जिले की सीमा में धीरोली घाट से रामेश्वर घाट तक करीब सवा सौ किमी के दायरे में ही घडिय़ाल के रहने के लिए बेहतर अनुकूल वातावरण व स्थिति है। यही कारण है कि चंबल में पाली घाट से लेकर रामेश्वर घाट तक बड़ी संख्या में सर्वाधिक घड़ियालाें मिलते हैं।विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पूरे भारत में सबसे अधिक घड़ियालाें चंबल नदी में पाए जाते हैं। घडिय़ाल को अति संकटग्रस्त जलीय जीव की श्रेणी में माना जाने से घडिय़ाल के संरक्षण के लिए वर्ष 1984 में घडिय़ाल की संख्या जानने के लिए गणना शुरू की गई थी। इस वर्ष भी चंबल अभयारण्य के तत्कालीन वन संरक्षक फुरकान अली के अली निर्देशन में 22 फरवरी से गणना शुरू की गई। गणना के लिए जलीय जीव विशेषज्ञ सहित 5 सदस्यों की टीम गठित की गई थी।

ऐसे होती है गिनती: चंबल घड़ियालाें अभयारण्य में हर वर्ष फरवरी माह में घड़ियालाें सहित जलीय जीवों की गणना की जाती है। अधिकारियों के अनुसार जीवों को भोजन के अलावा अपने शरीर का तापमान संतुलित रखना होता है। फरवरी माह में तापमान न ज्यादा ठंडा होता है और न ज्यादा गर्म। इसके चलते इस माह में पानी में से निकलकर बाहर किनारों पर आते हैं। इससे इनकी गिनती में आसानी होती है।

गत वर्ष 34 बढ़े थे, इस साल 54 घड़ियाल की वृद्धि इस वर्ष राजस्थान की सीमा में बह रही चंबल नदी के 395 किमी के दायरे में करीब 54 घड़ियालाें बढ़े है, जबकि गत वर्ष हुई गणना में 34 घड़ियालाें ही अधिक मिले थे। गत वर्ष चंबल में कोटा जिले से लेकर धौलपुर तक 900 घड़ियालाें थे, जो अब बढ़कर 954 हो गए है। वहीं इस वर्ष 4 मगर व एक डॉल्फिन की संख्या में वृद्धि हुई है। इस कारण हुआ संरक्षण: अन्य नदियां की अपेक्षा चंबल काफी साफ-सुथरी नदी है। यह वर्षभर बहती है। ज्यादातर जंगल क्षेत्र में बहने से इसका पानी शुद्ध और स्वच्छ होने के साथ गहरा भी है। यह परिस्थितियां घड़ियालाें संरक्षण के लिए बेहद अनुकूल साबित होती है।

चंबल में पाली घाट, रामेश्वर घाट क्षेत्र में घडिय़ाल को स्वछंद विचरण करते देखा जा सकता है। सर्दी में टापुओं पर धूप सेकते हुए भी देखा जा सकता है।9 प्रजाति के कछुए भी मिले: चंबल में जलीय जीवों की गणना में करीब 9 प्रजाति के कछुए मिले हैं। सफाईकर्मी कहे जाने वाले कछुओं में चित्रा इंडिका छोटे सिर वाला व कोमल कवच वाला कछुए की प्रजाति मिली है। यह प्रजाति विलुप्त हो रही है। चित्रा इंडिका की आंखें बहुत सूक्ष्म पर दृष्टि के मामले में अत्यधिक तेज होती है। जल में काफी दूर पर हुई हलचल को भांप लेने की क्षमता इनकी आंखों में होती है। इनके सूंघने की क्षमता भी अधिक होती है।

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