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श्रद्धालुओं और वन कर्मचारियों में झड़प:अभयारण्य में परीत बाबा के दर्शन को जा रहे थे, अनुमति न लेने पर कार जब्त, श्रद्धालुओं और वन कर्मचारियों में झड़प

सवाई माधोपुरएक महीने पहले
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  • कलेक्टर के पास पहुंचा मामला... श्रद्धालु बोले- वन कर्मियों ने ड्राइवर की गिरेबान पकड़ कर गाली-गलौच की, हंगामे के बीच शराबी युवकों ने वन कर्मियों को खदेड़ा

खंडार राष्ट्रीय अभयारण्य में बिना अनुमति वाहन प्रवेश के मामले को लेकर श्रद्धालुओं एवं वनकर्मियों में झड़प का मामला सामने आया है। वनकर्मियों की सूचना पर वन विभाग के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे तथा जुर्माना वसूल कर मामले को शांत किया गया। दूसरी ओर श्रद्धालुओं ने जिला कलेक्टर को शिकायत भेजकर इस पूरे मामले की जांच करवाकर दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की है। रामखिलाड़ी गुर्जर, मिश्रीलाल गुर्जर ने कलेक्टर काे भेजे ज्ञापन में बताया कि वह 23 अक्टूबर को विस्थापित गांव कैलाशपुरी से उनके 8-10 रिश्तेदार रणथंभौर राष्ट्रीय अभयारण्य की खंडार रेंज स्थित परीत बाबा के दर्शन करने के लिए जीप से आए हुए थे। दोपहर 12 बजे वे बोलेरो से क्षेत्रीय वनाधिकारी कार्यालय खंडार के रास्ते से परीत बाबा के पहुंचे। इस दौरान वहां करीब 200 श्रद्धालु पहले से मौजूद थे तथा 100 से अधिक मोटरसाइकिलें वहां खड़ी हुई थी। सभी यात्री परीत बाबा की पूजा कर रहे थे। इसी दौरान 2 वनकर्मी उनके पास आए और जीप ड्राइवर की गिरेबान पकड़कर अभद्रता व गाली गलोच की। इस दौरान परीत बाबा के स्थान से कुछ ही दूरी पर ही असामाजिक तत्व शराब पी रहे थे। मौके पर हंगामा सुन वे भी मौके पर आ गए और उन्होंने वनकर्मियों को वहां से भगा दिया। कुछ देर बाद वन विभाग के आलाधिकारियों सहित जाब्ता मौके पर पहुंचा और हमारी गाड़ी को उठाकर ले गया। जबकि वनकर्मियों को भगाने वालों से श्रद्धालुओं का कोई वास्ता नहीं था।

पत्र में बताया कि वन विभाग द्वारा उनकी गाड़ी व ड्राइवर को पकड़कर ले जाने के बाद सभी यात्री अपने बच्चों व महिलाओं सहित जंगल में 4 किलोमीटर का पैदल सफर कर वन विभाग की गिलाईसागर चौकी स्थित क्षेत्रीय वनाधिकारी कार्यालय पर पहुंचे। वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने गाड़ी छोड़ने के एवज में उनसे 15 हजार रुपए मांगे। मामले की जानकारी क्षेत्रीय नेताओं को दी गई तो उन्होंने मामले का निपटारा करते हुए 5 हजार रुपए में गाड़ी छोड़ने की बात कही। शाम करीब 7 बजे तक भी वन विभाग के अधिकारियों ने उनकी गाड़ी व ड्राइवर को नहीं छोड़ा। वनकर्मियों ने 7 हजार 500 रुपए का इंतजाम होने पर ही गाड़ी छोड़ने की बात कही। इस पर यात्रियों ने एक वनकर्मी से 2000 हजार रुपए उधार लेकर व अन्य लोगों से पैसे इकट्ठे कर 7500 रुपए का इंतजाम कर वन अधिकारियों को सौंपे। इस पर उन्होंने गाड़ी छोड़ दी। साथ ही रुपयों के एवज में वन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें एक खाली फर्जी रसीद सौंप दी। उन्होंने इस पूरे मामले की कलेक्टर से जांच करवाकर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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