दाह संस्कार के लिए जगह नहीं:श्मशान में प्लेटफॉर्म फुल, जमीन पर अंतिम संस्कार

सवाई माधोपुर6 महीने पहले
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सवाई माधोपुर| खैरदा श्मशान पर जगह नहीं, जमीन पर किया दाह संस्कार। - Dainik Bhaskar
सवाई माधोपुर| खैरदा श्मशान पर जगह नहीं, जमीन पर किया दाह संस्कार।
  • अभी भी सतर्क नहीं हुए इससे भी भयानक तस्वीर सामने होगी

मुकेश आर्य | कोरोना महामारी का कहर लोगों पर किस कदर टूट रहा है, इसका अंदाजा श्मशान घाटों में कम पड़ती जगह से लगाया जा सकता है। कोरोना के बढते संक्रमण के गंभीर परिणाम अब सामने आने शुरू हो गए हैं। जिले में कोरोना संक्रमण की तीव्रता इतनी है कि अस्पतालों में बेड नहीं है और श्मशान में दाह संस्कार के लिए जगह नहीं मिल रही है। श्मशान में शव दाह प्लेटफार्म फुल होने से जमीन पर दाह संस्कार करना पड़ रहा है। हाल यह है कि एक चिता की आग ठंडी नहीं होती, इससे पहले ही दूसरी चिता की तैयारी हो शुरू हो जाती है। यह आने वाले भयावह मंजर की आहट मात्र है। यदि अभी भी सतर्क नहीं हुए इससे भी भयानक तस्वीर सामने होगी। जिला मुख्यालय पर बजरिया स्थित खैरदा लटिया नाले के पास श्मशान घाट पर लकड़ी से शवदाह करने के लिए 3 प्लेटफार्म हैं।

तीनों प्लेटफार्म पर चिताओं की आग ठंडी नहीं होती, इससे पहले श्मशान में अन्य चिताओं की तैयारी शुरू हो जाती है। ऐसे में यहां शवदाह प्लेटफार्म पर अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं होने से नीचे ही चिताएं लगाई जा रही है।जिला मुख्यालय पर बजरिया में खैरदा श्मशान घाट सबसे बड़ा है। यहां बजरिया क्षेत्र में बसी कॉलोनियों सहित खैरदा क्षेत्र के लोग यहां दाह संस्कार के लिए आते हैं। इसके अलावा आदर्श नगर, बंमोरी, आलनपुर, आवासन मंडल व शहर सहित सभी श्मशान घाट व कब्रिस्तानों के कमोबेश यही हालात है।सभी क्षेत्रों के श्मशान घाटों की हालत खराब है।

सुबह से देर शाम तक खैरदा श्मशान घाट पर गुरुवार को करीब 5 से 6 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। जबकि 20 अप्रैल से पूर्व यहां एक दिन में कभी एक तो कभी दो शवों के अंतिम संस्कार होते थे। लेकिन 20 अप्रैल के बाद से जिले में कोरोना संक्रमण के केस बढ़ने से अब एक चिता की आग ठंडी नहीं होती कि दूसरी को जलाने का बंदोबस्त शुरू हो जाता है। एक शव को लकड़ी से जलने में दो-ढाई घंटे का समय कम से कम लगता है। शवदाह स्थलों पर लोग शवों को जलाने के लिए इंतजार करते नजर आ रहे हैं।अब दिनोंदिन कोरोना संक्रमण के गंभीर परिणाम सामने आते जा रहे है।

जिले में रोजाना तेजी से सामने आ रहे रिकॉर्ड तोड़ कोरोना पॉजिटिव केसों के चलते अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड नहीं है। उन्हें अस्पताल में बेड खाली होने के लिए एक से दो दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। आवासन मंडल निवासी शशांक शर्मा ने बताया कि उसकी मां 3 दिन से सेविका अस्पताल में भर्ती थी, लेकिन गुरुवार को सांस लेने में ज्यादा परेशानी आने पर उन्होंने सामान्य चिकित्सालय भेज दिया। अब यहां आकर पता किया तो बेड खाली नहीं है।

जब तक कोई अन्य मरीज को डिस्चार्ज नहीं किया जाता, तब तक बेड खाली होने का इंतजार करना पड़ेगा।लकड़ी विक्रेता अब्दुल शाकिर का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से शव दाह संस्कार के लिए लकड़ी की डिमांड बढ़ी है। अभी रोजाना 5 से 6 शवों के दाह संस्कार के लिए मृतकों के परिजन लकड़ी लेने आ रहे हैं। पहले एक या दो मृतकों परिजन ही आते थे। जिला मुख्यालय पर मुख्य रूप से दाह संस्कार की लकड़ी के लिए व्यवस्था हमारे पास ही है। हमारे अलावा खैरदा में लकड़ी की तीन से चार स्टालें और हैं, जहां से लोग शव के दाह संस्कार के लिए लकड़ी लेते हैं।

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