पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अनदेखी का निर्माण...:घटिया निर्माण : पांच माह में ही क्षतिग्रस्त हुई नहर, सवाल : अंतिम छोर के खेतों में कैसे पहुंचेगा पानी

सवाई माधोपुर2 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
बागडोली | ढील बांध की नवनिर्मित पक्की नहर, जो कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त हो गई। - Dainik Bhaskar
बागडोली | ढील बांध की नवनिर्मित पक्की नहर, जो कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त हो गई।
  • ढील बांध की नहर के निर्माण कार्य को ठेकेदार ने टुकड़ों में कहीं पक्का किया तो कहीं कच्चा ही छोड़ दिया

जल संसाधन विभाग की ओर से ढील बांध की नहर को पक्की करने का कार्य करीब 21 करोड़ की लागत से किया जा रहा है। 16 फुट भराव क्षमता वाले ढील बांध की 43 किलोमीटर नहर है, जो मलारना डूंगर तक जाती है। ढील बांध से बागडोली नहर की पुलिया तक जाने वाले लगभग चार किलोमीटर नहर कच्ची है। इसके बाद बागडोली पुलिया से 1-2 किलोमीटर तक नहर वाले बालाजी तक नहर को पक्का करने का काम किया गया। इसके आगे फिर नहर को कच्ची छोड़ दिया। कुल मिलाकर ठेकेदार द्वारा टुकड़ों में नहर को पक्की करने का काम किया गया है।

ऐसे में कुछ जगहों पर तो यह नहर पक्की है तो वहीं शेष जगहों पर इसे कच्ची छोड़ दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पूरी नहर का पक्का निर्माण नहीं किया जाएगा तो नहर का पानी आखिरी छोर तक कैसे जाएगा। वहीं दूसरी ओर जहां पर भी नहर को पक्का करने का कार्य किया गया है, वह भी गुणवत्तापूर्वक नहीं किया गया। निर्माण के कुछ ही महीनों के बाद यह नहर बरसात भी झेल नहीं पाई और जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई।जानकारी के अनुसार ढील बांध की नहर का निर्माण कार्य करीब तीन साल से चल रहा है। इस ढील बांध की नहर के पानी पर लगभग 32 गांव के किसान निर्भर है, लेकिन जब तक इसका पक्का निर्माण पूरा नहीं होगा, तब तक नहर का पानी आखिरी टेल तक नहीं पहुंचेगा। इसके कारण कई गांवों के किसानों की फसलों को बांध का पानी नहीं मिल सकेगा।

घटिया निर्माण कार्य का किसानों ने किया था विरोध, जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया

नहर में किया गया घटिया निर्माण कार्य अब धीरे-धीरे उजागर होने लगा है। करोड़ों की लागत से बनी पक्की नहरें कई जगहों में क्षतिग्रस्त हो गई है। ठेकेदार द्वारा घटिया तरीके से नहर का निर्माण किया गया है, जिस कारण से पांच-छह महीने के भीतर ही नहर जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होने लगी है। खास बात तो यह है कि नहर के घटिया निर्माण कार्य को लेकर किसानों के द्वारा शुरू से ही विरोध जताया जाता रहा है, लेकिन अधिकारियों ने कभी भी इसकी सुध नहीं ली। इसका नतीजा यह हुआ कि ठेकेदार अपनी मनमानी से घटिया निर्माण करता चला गया और पूरी नहर भ्रष्टाचार की बलि चढ़ गई। नहर में बांध का पानी छोड़ने से पूर्व नहर बरसात के पानी से ही ग्रसित हो गई है तो बांध का पानी छोड़ने के बाद नहर कहां तक टिकेगी। नहरों के निर्माण के लिए जो मापदंड तय किए गए थे, उनकी अनदेखी कर निर्माण किया गया है। ऐसे में किसानों ने मांग की है कि नहरों के निर्माण की वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जांच करवाकर दोषी ठेकेदार के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

ठेकेदार कराएगा मरम्मत नहर के पक्के निर्माण में जो आगे से सेंक्शन होकर आया है, वहीं पर नहर का पक्कीकरण का निर्माण किया गया है। नहर का पक्का निर्माण कार्य गारंटी पीरियड में है। जहां नहर क्षतिग्रस्त हुई है, वहां ठेकेदार उसकी मरम्मत करके देगा। अभी बारिश से मरम्मत का कार्य नहीं किया जा रहा है।सुरेश चंद भोपरिया, अधिशासी अभियंता, जल संसाधन विभाग, सवाई

पक्के निर्माण की वजह : नहर का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंचता थानहर के पक्के निर्माण के पहले नहर का पानी अपने अंतिम टेल तक भी नहीं पहुंच पता था, जिसके कारण कई किसानों की भूमि बिना सिंचित रह जाती थी। नहर का पानी नहीं मिलने के कारण किसान अपने वैकल्पिक संसाधनों द्वारा फसलों की सिंचाई करते थे। किसानों की इस परेशानी को देखते हुए विभाग द्वारा नहर को पक्की करने का कार्य किया गया। लेकिन इसमें भी उदासीनता बरती गई। नहर को पक्की करने का काम टुकड़ों में किया गया और बीच-बीच में से नहर को पक्की किया गया। ऐसे में जब तक नहर पूरी तरह से पक्की नहीं होगी, तब तक आखिरी छोर तक नहर का पानी नहीं पहुंच पाएगा।

खबरें और भी हैं...