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असमंजस:आरटी-पीसीआर रिपोर्ट नेगेटिव, फिर भी 80 प्रतिशत से अधिक मौतें फेफड़ों में संक्रमण से, 30 फीसदी जांच में पकड़ में नहीं आ रहा कोरोना

सवाई माधोपुरएक दिन पहले
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सवाई माधोपुर| सामान्य चिकित्सालय के मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज। - Dainik Bhaskar
सवाई माधोपुर| सामान्य चिकित्सालय के मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज।
  • इलाज में देरी बन रहा मौत का कारण, सीटी स्कैन कराने पर फेफड़े खराब होने का चल रहा पता

जिले में कोरोना संक्रमण अब घातक रूप लेता जा रहा है। जिला अस्पताल में 80 फीसदी से अधिक मौतें फेफड़ों में संक्रमण से होना सामने आया है। आरटी-पीसीआर रिपोर्ट नेगेटिव होने के बावजूद मरीज दम तोड़ रहे हैं। मंगलवार को जिला अस्पताल में हुई 14 मौतों में से 12 की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट नेगेटिव थी। दो मृतक ऐसे थे, जिसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव थी। चिकित्सकों के अनुसार कोरोना वायरस ने अपना रूप बदल लिया है। अब यह आरटी-पीसीआर जांच में भी पकड में नहीं आ रहा है। जबकि यह लोगों के फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसे में जब लोग सीटी स्कैन जांच करा रहे हैं, तब उन्हें पता चल रहा है कि फेफड़े पूरी तरह संक्रमित हो चुके हैं। वहीं समय रहते सही इलाज न मिल पाने के कारण संक्रमण लोगों की जान ले रहा है।कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर काफी खतरनाक साबित हो रही है।

वजह यह है कि अब यह वायरस रेपिड एंटीजन टेस्ट के साथ-साथ आरटी-पीसीआर जांच में भी नहीं दिख रहा है। जिससे रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद मरीज लापरवाह हो जाते है। लेकिन जब हालत ज्यादा बिगड़ती है, तब तक बहुत देरी हो जाती है। ऐसे में अब लोग कोविड टेस्ट की बजाए एचआरसीटी जांच पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। हालांकि सिटी स्कोर बढा हुआ आने के बाद भी सरकार उन्हें कोविड मरीज नहीं मानती। लेकिन समय रहते इलाज शुरू हो जाने की वजह से उनकी जान बच जाती है। वर्तमान में जिला अस्पताल में अधिकांश मरीज ऐसे भर्ती हैं, जिनकी कोविड रिपोर्ट नेगेटिव है, लेकिन सीटी स्कोर काफी अधिक होने के कारण वे ऑक्सीजन पर हैं।कोरोना जांच कराई तो नेगेटिव आई: जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती खैरदा निवासी एक महिला के परिजनों ने बताया कि करीब चार-पांच दिन पहले उन्हें बुखार की शिकायत हुई।

इस पर उन्होंने चिकित्सक से परामर्श लेकर दवाइयां ली। आरटी-पीसीआर जांच भी कराई, लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव आई। दो दिन बाद ही उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई तो अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। सामान्य चिकित्सालय के कोरोना वार्ड में भर्ती बरवाड़ा निवासी एक महिला ने बताया कि 10 दिन पूर्व बुखार आया था। मेडिकल से दवा ली, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। बाद में आरटी-पीसीआर जांच भी कराई। रिपोर्ट नेगेटिव आई, तब तक हालत ज्यादा बिगड़ गई और ऑक्सीजन चढ़ानी पड़ी। बाद में सीटी स्कैन करवाने पर पता चला कि फेफड़ों में इंफेक्शन है।

एचआर सीटी चेस्ट का हाई रिजोल्यूशन कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी स्कैन है। इस जांच के जरिए फेफड़ों की एक थ्रीडी इमेज बताती है, जो बहुत बारीक डिटेल्स भी बताती है। इससे फेफड़ों में हुए इंफेक्शन का पता चल जाता है। कोरोना का लक्षण दिखाई देने पर कुछ लोग आरटी-पीसीआर न करवाकर सीधे सीटी स्कैन करवा रहे हैं। सिटी स्कैन में स्कोर 8 से कम है तो हल्का, 9 से 17 के बीच मध्यम और 17 से अधिक स्कोर होने पर गंभीर माना जाता है। पूरा स्कोर 25 होता है। सीटी स्कैन में यदि 7 से ज्यादा स्कोर है तो उसे कोविड-19 मानकर चलना चाहिए। ऐसे मरीजों को अलग रखकर इलाज किया जाना चाहिए।- डॉ. भरत लाल मथुरिया,सांस रोग विशेषज्ञ।

लक्षण ज्यादा दिखें, तो चिकित्सक से लें सलाह

शुरूआत में हल्की खांसी, जुकाम या बुखार में चिंता की कोई बात नहीं है। मौसम परिवर्तन के साथ खानपान बदलने से ऐसा हो जाता है। लेकिन एक दो दिन में लक्षण ज्यादा बढते हैं, जैसे बुखार नहीं उतर रहा हो, खासी ज्यादा चल रही हो तो फिर फिजिशियन को दिखाना चाहिए। वही डिसाइड कर पाएंगे ये कोविड है या मौसम के कारण नॉर्मल बुखार या खांसी है। अभी अस्पताल में केवल कोरोना के संदिग्ध मरीज या फिर हार्ट, बीपी, शुगर व क्रोनिक डिजीज वाले दो ही तरह के मरीज आ रहे हैं। बुखार नहीं उतरने, सूखी खांसी, सीने में दर्द, सांस लेने में घबराहट और बेचैनी है तो तुरंत कोरोना की जांच और सीटी स्कैन भी करवानी चाहिए।- डॉ. सियाराम मीना, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ।

आरटी-पीसीआर 30 फीसदी रिपोर्ट दिखाती है नेगेटिव

70 फीसदी पेशेंट की आरटी-पीसीआर पॉजिटिव आती है, बाकी 30 फीसदी की रिपोर्ट नेगेटिव दिखाती है, जबकि बीमारी मौजूद होती है। किसी भी टेस्ट की एक लिमिटेशन होती है कि कितने पॉजिटिव को दिखा पाएगा। आरटी-पीसीआर टेस्ट 70 पर्सेंट सैंपल को ही पॉजिटिव दिखा सकता है। इसलिए हम लोग सीटी स्कैन और दूसरी जांचें करवाते हैं। आरटी-पीसीआर रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद लोग समय पर इलाज नहीं करवाते और फेंफड़ों में संक्रमण ज्यादा फैलने से ऐसी स्थिति आती है।- डॉ. शैलेश चतुर्वेदी, वरिष्ठ श्वसन रोग विशेषज्ञ।

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